पवन यादव की रिपोर्ट
बढ़नी सिद्धार्थनगर
गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार से सभी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में रौनक लौट आई। हालांकि पहला दिन होने के कारण छात्रों की उपस्थिति थोड़ी कम नजर आई। स्कूल के पहले दिन सबसे ज्यादा मशक्कत अभिभावकों को करनी पड़ी।
गर्मी की छुट्टिया बीतने के बाद सोमवार को विद्यालयों में चहल-पहल लौट आई। छोटे बच्चे अनमने मन से विद्यालय की ओर जाते देखे। उनका हाथ अपने हाथों में थामे अभिभावक उन्हें समझाते हुए विद्यालय की ओर जा रहे थे। बच्चे को फुसलाने के लिए उन्हें अपनी जेब भी ढ़ीली करनी पड़ी। बड़े बच्चे तो जैसे स्कूल के खुलने का इंतजार ही कर रहे थे। इस दौरान विद्यालयों में एडमिशन के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ी ह़ुई थी। जो लोग अप्रैल में एडमिशन नहीं करा पाए थे। वह इस बात का पता कर रहे थे कि उनके मनचाहे विद्यालय में उनके लाडले का एडमिशन हो पाएगा या नहीं। विद्यालय खुलने के पहले दिन सबसे ज्यादा मशक्कत अभिभावकों को उठानी पड़ी। एक तो सुबह के समय बच्चे को जगाना उसके बाद उसे विद्यालय के लिए तैयार करना काफी कठिन साबित हुआ है। क्योंकि छुट्टी के बाद बच्चों का शिड्यूल बिगड़ गया है। अभिभावक उन्हें तरह-तरह के लालच देते नजर आए। वहीं काफी दिनों से बंद विद्यालयों में बच्चों के आने से रौनक लौट आई। पहला दिन होने के कारण विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति काफी कम रही लेकिन जो बच्चे विद्यालय पहुंचे उन्हें शिक्षकों ने आगे का पाठ पढ़ाया। सरकारी हो या प्राइवेट सभी विद्यालयों की हालत एक ही समान दिखी।
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गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार से सभी सरकारी और गैर सरकारी विद्यालयों में रौनक लौट आई। हालांकि पहला दिन होने के कारण छात्रों की उपस्थिति थोड़ी कम नजर आई। स्कूल के पहले दिन सबसे ज्यादा मशक्कत अभिभावकों को करनी पड़ी।
गर्मी की छुट्टिया बीतने के बाद सोमवार को विद्यालयों में चहल-पहल लौट आई। छोटे बच्चे अनमने मन से विद्यालय की ओर जाते देखे। उनका हाथ अपने हाथों में थामे अभिभावक उन्हें समझाते हुए विद्यालय की ओर जा रहे थे। बच्चे को फुसलाने के लिए उन्हें अपनी जेब भी ढ़ीली करनी पड़ी। बड़े बच्चे तो जैसे स्कूल के खुलने का इंतजार ही कर रहे थे। इस दौरान विद्यालयों में एडमिशन के लिए भी लोगों की भीड़ उमड़ी ह़ुई थी। जो लोग अप्रैल में एडमिशन नहीं करा पाए थे। वह इस बात का पता कर रहे थे कि उनके मनचाहे विद्यालय में उनके लाडले का एडमिशन हो पाएगा या नहीं। विद्यालय खुलने के पहले दिन सबसे ज्यादा मशक्कत अभिभावकों को उठानी पड़ी। एक तो सुबह के समय बच्चे को जगाना उसके बाद उसे विद्यालय के लिए तैयार करना काफी कठिन साबित हुआ है। क्योंकि छुट्टी के बाद बच्चों का शिड्यूल बिगड़ गया है। अभिभावक उन्हें तरह-तरह के लालच देते नजर आए। वहीं काफी दिनों से बंद विद्यालयों में बच्चों के आने से रौनक लौट आई। पहला दिन होने के कारण विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति काफी कम रही लेकिन जो बच्चे विद्यालय पहुंचे उन्हें शिक्षकों ने आगे का पाठ पढ़ाया। सरकारी हो या प्राइवेट सभी विद्यालयों की हालत एक ही समान दिखी।


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