हर शख़्स के पहचान का एक जरिया होता है जो ताउम्र उसके नाम के साथ जुड़ जाता है लेकिन बुद्ध भूमि का एक लाल ऐसा भी है जिसके पहचान के लिए अब एक नही कई नाम जुड़ गए हैं जिसको आप ग्राम प्रधान भी कह सकते हैं या प्रवक्ता प्रधान संघ भी कह लीजिए जर्नलिस्ट भी कहिए सतम्भकर , लेखक कहिए या युवा रचनाकार कहकर सम्बोधित करिए या फिर हिन्दी साहित्य उर्दू अदब का कवि / शायर कह लीजिए सब एक ही व्यक्ति के लिए प्रयोग कर सकते हैं। जी हां व्यक्ति एक और सम्बोधन के लिए पहचान का जरिया अनेक यह सभी बुद्ध भूमि के उस लाल के प्रयुक्त होता है जिसे सारा देश मेराज़ मुस्तफा के नाम से जानता है । मेराज़ मुस्तफा यह नाम सारे देश के प्रबुद्ध वर्ग से लेकर साहित्यकार व पत्रकारिता जगत के लिए नया नही है क्योंकि शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो जो साहित्य या पत्रकारिता जगत से जुड़ा हो और इस नाम से वाकिफ न हो क्योंकि देश के उच्च कोटि के साहित्यकारों से लेकर पत्रकारिता जगत के दिग्गजों के आशीर्वाद का भागीदार बन चुका है और उन सभी के दिलों में एक विशिष्ट स्थान प्राप्त करके समा गया है । कुछ समय पहले तक युवा ग्राम प्रधान के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले सिद्धार्थनगर के युवा ग्राम प्रधान मेराज़ मुस्तफा अब अपनी कलम के जरिए इस मुकाम तक पहुंच चुके हैं जो किसी स्वप्न से कम नही लगता लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने तक का सफर भी आसान कतई नही रहा क्योंकि किसी भी क्षेत्र में सफलता के उच्च शिखर तक पहुंचना कोई मामूली बात नही होती उसके पीछे छुपी होती है कड़ी मेहनत व संघर्ष जिसे सिर्फ वही व्यक्ति जान सकता है जिसने इसे पार करके आज एक विशिष्ट पहचान बनाई है । सिद्धार्थनगर के युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा की कलम से निकले लेख लोगों के दिलों में जो छाप छोड़ रहे वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है तभी तो मेराज़ मुस्तफा के लेख को पढ़ने वाले पाठक उन्हें लफ़्जों के जादूगर खिताब से नवाज चुके हैं। उत्तर प्रदेश सहित देश के लगभग सभी प्रदेशों से मेराज़ मुस्तफा के लेख पढ़ने वाले पाठकों की प्रतिक्रिया कुछ यूं मिल रही जैसे कोई साहित्यकार वर्षों के अनुभव के आधार पर इतनी बेहतरीन लेखों व रचनाओं को लफ़्जों की माला में पिरो रहा हो। इस विषय में जब हमारे सवांददाता ने सिद्धार्थनगर के युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा से दूरभाष के जरिए वार्ता करने के लिए संपर्क किया तो मेराज़ मुस्तफा ने कहा बैंक में आवश्यक कार्य करवा रहे इसलिए बाद में बात करें तो बेहतर है जिसपर हमारे संवाददाता ने साक्षात्कार हेतु बात करने का समय मांगा तो युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा ने कहा सांय सात बजे के बाद कभी भी बात कर सकते हैं । हमारे संवाददाता ने मेराज़ मुस्तफा के इतने खुले जवाब की प्रशंसा करते हुए कहा कि आपसे बात करके बेहद प्रसन्नता हुई कि आपने स्पष्ट जवाब दिया इसलिए मैं आपसे आपके द्वारा बताए गए समय पर ही वार्ता करने की कोशिश करूंगा । बहरहाल मेराज़ मुस्तफा ने जिस तरह साहित्य व पत्रकारिता जगत में इतने कम समय में विशिष्ट पहचान व स्थान बनाया है वह बेहद सराहनीय है ।
Thursday, January 10, 2019
मेराज़ मुस्तफा : एक ऐसा नाम जिसे लोग अब कहने लगे हैं लफ़्जों का जादूगर
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