चन्द्रकेश पटेल (संवाददाता)-
ककरहवा। भारत नेपाल सीमा के सटे पडोसी राष्ट्र नेपाल के कालीदह बॉर्डर पर अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए खतरों का भी सामना करने में नहीं चूकि छोटी बच्ची।
बुद्धवार को ककरहवा बॉर्डर पार नेपाल में एक चार साल की बच्ची का करतब देखकर लोग दंग रह गए। जिसमे बच्ची मात्र एक रस्सी पर खड़ा होकर उसी पर बिभिन्नन प्रकार की खेल दिखाती हुई दिखी। जिसमे बिना हाथ लगाये सारे करतब दिखाई और लोगों का मन मोह लिया । और वहीँ बॉर्डर होने की वजह से वहाँ पर भारी भीड़ दिखाई पड़ी जिसमे लोगों ने बच्ची को पैसे भी दिए जिससे वो अपने परिवार का खर्च चला सके। जिस उम्र में बच्ची को स्कूल का दरवाजा देखना चाहिए पर घर की स्थिति ठीक न होने से वह पढ़ न सकी उसे खतरों जैसा खेल खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा ।और वहीं अपने परिवार का भरण पोषण करने में जुट गयी ए छोटी बच्ची। और वहीं दूसरी तरफ सूबे की सरकार जहाँ परिषदीय विद्यालयो पर शिक्षा पर जोर दे रहे है और साथ साथ केंद्रीय सरकार बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का जागरूकता अभियान चला रही है। तो इसकी एक झलक ककरहवा के कालीदह बॉर्डर पर एक बच्ची गरीबी से मजबूर होकर सरकार के इस अभियान को चाह कर भी नहीं ले पा रही है । उसके सामने मज़बूरी हैं उसका परिवार। ऐसे हजारो लोग खतरों का खेल खेलने पर मजबूर है और वहीं सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।
ककरहवा। भारत नेपाल सीमा के सटे पडोसी राष्ट्र नेपाल के कालीदह बॉर्डर पर अपना और अपने परिवार का पेट पालने के लिए खतरों का भी सामना करने में नहीं चूकि छोटी बच्ची।
बुद्धवार को ककरहवा बॉर्डर पार नेपाल में एक चार साल की बच्ची का करतब देखकर लोग दंग रह गए। जिसमे बच्ची मात्र एक रस्सी पर खड़ा होकर उसी पर बिभिन्नन प्रकार की खेल दिखाती हुई दिखी। जिसमे बिना हाथ लगाये सारे करतब दिखाई और लोगों का मन मोह लिया । और वहीँ बॉर्डर होने की वजह से वहाँ पर भारी भीड़ दिखाई पड़ी जिसमे लोगों ने बच्ची को पैसे भी दिए जिससे वो अपने परिवार का खर्च चला सके। जिस उम्र में बच्ची को स्कूल का दरवाजा देखना चाहिए पर घर की स्थिति ठीक न होने से वह पढ़ न सकी उसे खतरों जैसा खेल खेलने के लिए मजबूर होना पड़ा ।और वहीं अपने परिवार का भरण पोषण करने में जुट गयी ए छोटी बच्ची। और वहीं दूसरी तरफ सूबे की सरकार जहाँ परिषदीय विद्यालयो पर शिक्षा पर जोर दे रहे है और साथ साथ केंद्रीय सरकार बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ का जागरूकता अभियान चला रही है। तो इसकी एक झलक ककरहवा के कालीदह बॉर्डर पर एक बच्ची गरीबी से मजबूर होकर सरकार के इस अभियान को चाह कर भी नहीं ले पा रही है । उसके सामने मज़बूरी हैं उसका परिवार। ऐसे हजारो लोग खतरों का खेल खेलने पर मजबूर है और वहीं सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।


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