मेराज़ मुस्तफा की विशेष रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर:-प्रदेश के पूर्वांचल में नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले की महत्ता प्राचीन युग से ही उल्लेखनीय रही है परन्तु वर्तमान युग में जब तथागत गौतम बुद्ध कि इस धरती को कपितय लोगों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अतिपिछड़े जनपद में सिद्धार्थनगर की गिनती करते हैं तो यह चीज बेहद कष्टदायक लगती है उपरोक्त बातें अब्बास चौधरी मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव व अब्बास चौधरी मेमोरियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट के संस्थापक शाहिद सिराज ने पत्रकारवार्ता के दौरान कही।इटवा तहसील क्षेत्र के मूलतः रेहरा उर्फ भैसाही व वर्तमान में इटवा निवासी शाहिद सिराज ने रेहरा उर्फ भैसाही स्थित अपने आवास पर "वर्तमान समाज मे शिक्षा का स्तर" विषय पर वार्ता करते हुए कहा कि विश्व ख्यातिप्राप्त अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से परास्नातक की शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात जब गांव लौट तो यहां शिक्षा के प्रति मध्यम व निम्न वर्ग के लोगों की सोच देखकर काफी दुखी हुए क्योंकि मध्यम व निम्न वर्ग के लोग अपने बच्चों खासकर लड़कियों की शिक्षा को लेकर जरा भी गम्भीर नही थे इस पर शाहिद सिराज ने कहा कि वर्ग विशेष के लोगों ने अपने दिल-ओ-दिमाग में यही धारणा पाल रखी थी कि बेटियों को शिक्षा की क्या आवश्यकता जब आगे चलकर विवाह के पश्चात उन्हें चौका-चूल्हा ही सम्भालना है व लड़कों को पन्द्रह वर्ष की आयु के बाद एक कमाऊ मशीन के तौर पर देखते हुए उनके अभिभावकों द्वारा देश के विभिन्न प्रदेशों महाराष्ट्र,गुजरात,मध्यप्रदेश,राजस्थान,दिल्ली,आंध्रप्रदेश,पश्चिम बंगाल आदि जगहों पर मजदूरी करने भेज दिया जाता था क्योंकि उन अभिभावकों का मानना था कि जीवन में शिक्षा नही अपितु रूपये का महत्व अधिक है लोगों की इन्हीं संकुचित विचारों के चलते शाहिद सिराज ने उसी समय दृढ़ संकल्प लिया कि केवल मेरे शिक्षित होने से ही समाज का उत्थान असम्भव है और एक निश्चय कर तीन वर्ष पूर्व शाहिद सिराज ने अपने दादाजी मरहूम अब्बास चौधरी के नाम से एक ट्रस्ट का पंजीकरण करवाकर इटवा क्षेत्र के बढ़या में अब्बास चौधरी मेमोरियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की स्थापना की जिसमें दूरस्थ शिक्षा प्रणाली की मान्यता प्राप्त कर ऐसे लोगों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया जो पारिवारिक स्थितियों व आर्थिक समस्याओं के चलते अपनी शिक्षा को अधूरा छोड़ने पर विवश थे ऐसे में शाहिद सिराज द्वारा दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का पाठ्यक्रम ग्रामीण क्षेत्र में लाकर उन सभी को अपनी शिक्षा पूर्ण करने का सुनहरा अवसर प्रदान किया।शाहिद सिराज ने इस विषय में आगे बात करते हुए कहा कि दूरस्थ शिक्षा प्रणाली का केन्द्र बढ़या स्थित अब्बास चौधरी मेमोरियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट को मिलने के बाद सह शिक्षा के साथ-साथ प्रदेश सरकार द्वारा डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देकर कम समय में डिप्लोमा कोर्स प्राप्त कर रोजगार के अवसर प्रदान किया जिसपर शाहिद सिराज ने अपने अथक प्रयास व लगन के चलते कौशल विकास मिशन के केन्द्र की भी मान्यता लेकर आधुनिक शिक्षा द्वारा लोगों को स्वयं के पैरों पर खड़ा होने का अवसर प्रदान किया।शाहिद सिराज के मुताबिक विगत तीन वर्षों में डेढ़ सौ लोगों ने अपनी अधूरी शिक्षा को आगे बढ़ाकर स्नातक व परास्नातक की डिग्री प्राप्त करके निजी क्षेत्र में नौकरी कर अपने साथ-साथ परिवार का भी भरण पोषण सम्मानजनक रूप से कर रहे जो मेरे लिए गौरव की बात है।शाहिद सिराज ने आगे बात करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के तहत अलग-अलग विषयों में डिप्लोमा कर निजी क्षेत्र की कम्पनियों को इंस्टीट्यूट में ही आमंत्रित कर अपनी शिक्षा को पूर्ण कर चुके छात्र-छत्राओं का चयन करवाकर उन्हें भी स्वालम्बी बनने का सुनहरा मौका मिला।इटवा तहसील क्षेत्र के बढ़या चौराहे पर किराये के भवन में संचालित अब्बास चौधरी एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से दूरस्थ शिक्षा अथवा आधुनिक शिक्षा के माध्यम से तकरीबन तीन सौ लोग विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी व स्वयं का व्यवसाय शुरू कर पहले के इतर सम्मान के साथ जीवन व्यतीत करना सबसे महत्वपूर्ण सफलता है।शाहिद सिराज ने लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा जोर डालते हुए कहा कि जब एक लड़की पूर्ण रूप से शिक्षित होने के बाद विवाह कर दूसरे परिवार का हिस्सा बनती है तो उसकी शिक्षा केवल उसी के लिए नही होती अपितु दो परिवारों को उसकी शिक्षा से प्रकाश मिलता है और वही लड़की जब माँ बनती है तो अपने सन्तान की प्रथम शिक्षिका वही होती है जो अपने माँ की दी गयी तरबियत से उत्तम भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।शाहिद सिराज ने कहा कि एक स्वच्छ व स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए आने वाली पीढ़ियों को पूर्व की तरह कामचलाऊ शिक्षा ग्रहण करने के बजाय उच्च स्तर पर आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देना पड़ेगा जो किसी एक व्यक्ति विशेष की ही नही वरन समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है जिसका निर्वहन हम सभी को करना ही होगा।शाहिद सिराज ने शिक्षा के क्षेत्र में परिवर्तन के लिए उठाए गए कदम के बारे में बात करते हुए कहा कि अब्बास चौधरी मेमोरियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की स्थापना के समय किराए के भवन से आरंभ किए गए इस सफर में काफी संघर्षों व चुनौतियों का सामना करना पड़ा लेकिन परिवार के सदस्यों व मित्रों शुभचिंतकों का साथ मिलने से उन्होंने धैर्य बनाए रखा जिसके परिणामस्वरूप आज अब्बास चौधरी मेमोरियल एजुकेशनल इंस्टीट्यूट से आधुनिक शिक्षा व दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के तहत सैकड़ों लोगों का भविष्य उजव्वल हो चुका है यह मेरे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बात है।शाहिद सिराज के द्वारा शिक्षा क्षेत्र में दिए गए योगदान पर क्षेत्रीय लोगों में रेहरा उर्फ भैसाही के युवा ग्राम प्रधान मेराज़ मुस्तफा ने कहा कि किसी भी क्षेत्र में बदलाव लाने के लिए उठाया गया कदम आसान बिल्कुल नही होता क्योंकि आपको उस वक्त यह नही पता रहता कि आगे का रास्ता कहा तक और किन परिस्थितियों से होकर गुजरेगा।युवा ग्राम प्रधान व प्रवक्ता प्रधान संघ मेराज़ मुस्तफा ने आगे बात करते हुए कहा कि शाहिद सिराज ने इस बात की परवाह न करते हुए कि आगे क्या होगा अपना कार्य निरन्तर जारी रखा जिसका परिणाम आज सबके सामने है।सपा के इटवा विधानसभा अध्यक्ष व भगवतपुर निवासी कमरूज्जमां खां ने कहा कि शाहिद सिराज के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा संस्थान की स्थापना कर लोगों को उत्कृष्ट दिशा प्रदान करने में जो महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है वह अत्यंत सराहनीय है।शाहिद सिराज के द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में अतुल्यनीय योगदान पर युवा ग्राम प्रधान व जर्नलिस्ट मेराज़ मुस्तफा,कमरूज्जमां खां के अतिरिक्त डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद हाजी मोहम्मद मुकीम,रेहरा उर्फ भैसाही निवासी प्रधानाध्यापक मुस्तफा हुसेन खां,शिक्षक व वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद,वरिष्ठ पत्रकार डॉ.बलराम त्रिपाठी,साहित्यकार व कवि ज्ञानेन्द्र द्विवेदी 'दीपक' , वरिष्ठ पत्रकार व साहित्यकार राकेश त्रिपाठी,एडवोकेट शादाब शब्बीरी,अजीत सिंह,शिक्षक व पत्रकार शैलेन्द्र उपाध्याय,उदयभान सैनी,युवा संघ के महासचिव अरशद अहमद,युवा संघ के उपाध्यक्ष व सिसवां बुजुर्ग निवासी वरिष्ठ पत्रकार डॉ.जंगबहादुर चौधरी,डॉ.मोहम्मद हुसेन,बेलवा निवासी वरिष्ठ बसपा नेता हाजी मोहम्मद शकील,बेलवा निवासी वरिष्ठ समाजसेवी मोहम्मद इसराईल,मदरसा शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शाहिद हुसेन,राशिद सिराज,खालिद सिराज आदि ने शाहिद सिराज को बधाई देते हुए उजव्वल भविष्य की कामना की है।
Wednesday, December 5, 2018
ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की लौ जलाकर शाहिद सिराज ने पेश की मिशाल
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