'बच्चे की सांस की नली में फंसी खिलौने की सीटी निकाली
केजीएमयू ईएनटी विभाग के डॉक्टर ने एक बच्चे के सांस की नली में फंसी खिलौने की सीटी निकालकर उसकी जान बचाई। वहीं दो सिक्के निगलने के बाद इमरजेंसी पहुंची बच्चों को भी परेशानी से निजात दिलाई गई। केजीएमयू के डॉक्टरों ने रात एक बजे तक मेहनत कर दोनों बच्चों की जान बचाने में कामयाबी हासिल की है। सेहत में सुधार के बाद दोनों बच्चों की छुट्टी कर दी गई।
सांस की नली में फंसी सीटी निकाली
सीतापुर निवासी दीपक राठौर का आठ साल का बेटा आशीष रविवार शाम अचानक रोने लगा। पता चला कि वह खिलौने की सीटी निगल गया है। परिवारीजनों ने आशीष की पीठ ठोकी और पानी पिलाया। पर, बच्चे को आराम नहीं मिला। परिवारीजन बच्चे को लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने एक्सरे कराया। जांच में पता चला सांस की नली में सीटी अटकी है। इस दौरान बच्चे को सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। आनन-फानन परिवारीजन बच्चे को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
ट्रॉमा सेंटर से बच्चे को ईएनटी विभाग भेज दिया गया। यहां बच्चे को भर्ती किया गया। एक्सरे जांच कराई गई। विभाग के डॉ. सुनील कुमार को इमरजेंसी में फोन कर बुलाया गया। डॉक्टर ने एंडोस्कोपिक ऑपरेशन कर सीटी निकालने का फैसला किया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गले में फंसी सीटी निकाली जा सकी। डॉ. सुनील के मुताबिक सीटी सांस नली के दाहिने हिस्से में फंसी थी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्चे की सेहत में सुधार होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
गले में फंसे दो सिक्के निकाले गए
उधर चार साल की हुमेरा खातून ने 22 दिसम्बर को खेल-खेल में दो सिक्के निगल लिए। दो और पांच रुपये के सिक्के गले में अटक गए। सिक्के फंसते ही बच्ची छटपटाने लगी। अमौसी बेहटा निवासी पिता नजीरूद्दीन व परिवार के दूसरे सदस्य घबरा गए। स्थानीय अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां से बच्ची को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। ट्रॉमा से बच्ची को ईएनटी विभाग भेज दिया गया। रविवार सुबह 11 बजे विभाग में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने जांच कराई। जांच के बाद डॉ. सुनील कुमार ने हुमेरा को निगरानी में रखने का फैसला किया। कुछ दवाएं दी। डॉ. सुनील ने बताया कि लंबी जद्दोजहद के बाद सिक्के पेट की ओर खिसक गए। उन्होंने बताया कि यह सिक्के शौच के रास्ते निकल गए।
केजीएमयू ईएनटी विभाग के डॉक्टर ने एक बच्चे के सांस की नली में फंसी खिलौने की सीटी निकालकर उसकी जान बचाई। वहीं दो सिक्के निगलने के बाद इमरजेंसी पहुंची बच्चों को भी परेशानी से निजात दिलाई गई। केजीएमयू के डॉक्टरों ने रात एक बजे तक मेहनत कर दोनों बच्चों की जान बचाने में कामयाबी हासिल की है। सेहत में सुधार के बाद दोनों बच्चों की छुट्टी कर दी गई।
सांस की नली में फंसी सीटी निकाली
सीतापुर निवासी दीपक राठौर का आठ साल का बेटा आशीष रविवार शाम अचानक रोने लगा। पता चला कि वह खिलौने की सीटी निगल गया है। परिवारीजनों ने आशीष की पीठ ठोकी और पानी पिलाया। पर, बच्चे को आराम नहीं मिला। परिवारीजन बच्चे को लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने एक्सरे कराया। जांच में पता चला सांस की नली में सीटी अटकी है। इस दौरान बच्चे को सांस लेने में तकलीफ बढ़ गई। आनन-फानन परिवारीजन बच्चे को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
ट्रॉमा सेंटर से बच्चे को ईएनटी विभाग भेज दिया गया। यहां बच्चे को भर्ती किया गया। एक्सरे जांच कराई गई। विभाग के डॉ. सुनील कुमार को इमरजेंसी में फोन कर बुलाया गया। डॉक्टर ने एंडोस्कोपिक ऑपरेशन कर सीटी निकालने का फैसला किया। करीब दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद गले में फंसी सीटी निकाली जा सकी। डॉ. सुनील के मुताबिक सीटी सांस नली के दाहिने हिस्से में फंसी थी। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद बच्चे की सेहत में सुधार होने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
गले में फंसे दो सिक्के निकाले गए
उधर चार साल की हुमेरा खातून ने 22 दिसम्बर को खेल-खेल में दो सिक्के निगल लिए। दो और पांच रुपये के सिक्के गले में अटक गए। सिक्के फंसते ही बच्ची छटपटाने लगी। अमौसी बेहटा निवासी पिता नजीरूद्दीन व परिवार के दूसरे सदस्य घबरा गए। स्थानीय अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां से बच्ची को ट्रॉमा सेंटर रेफर कर दिया गया। ट्रॉमा से बच्ची को ईएनटी विभाग भेज दिया गया। रविवार सुबह 11 बजे विभाग में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने जांच कराई। जांच के बाद डॉ. सुनील कुमार ने हुमेरा को निगरानी में रखने का फैसला किया। कुछ दवाएं दी। डॉ. सुनील ने बताया कि लंबी जद्दोजहद के बाद सिक्के पेट की ओर खिसक गए। उन्होंने बताया कि यह सिक्के शौच के रास्ते निकल गए।


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