आयुर्वेदिक अस्पताल अरिया बाजार विभागीय उपेक्षा का शिकार है। आलम है एक डॉक्टर तीन अस्पताल का कार्यभार देख रहा है। मरीजों की चिकित्सकीय सेवा यहां पर तैनात स्वीपर के हवाले रहता है। दवा की किल्लत भी बनी रहती है। वैसे तो आयुर्वेदिक पद्धति से मरीजों का इलाज सुरक्षित माना जाता है, लेकिन डॉक्टर के बजाय स्वीपर इलाज करें तो कहां तक सुरक्षित इलाज है। अरिया बाजार के किराये के भवन में चल रहे आयुर्वेदिक अस्पताल पर वैसे तो चार स्वास्थ्य कर्मी नियुक्त है। जिनमे चिकित्साधिकारी हरिश्चंद्र पांडेय, फार्मासिस्ट रामकुमार, स्वीपर रामहित व वार्डब्वॉय भी हैं। डाक्टर बरियावन और टांडा के अतिरिक्त चार्ज की भी जिम्मेदारी है। इस वजह से अक्सर अस्पताल पर नहीं रहते हैं। फार्मासिस्ट को भी बस अस्पताल नहीं आने का बहाना चाहिए। लिहाजा अस्पताल स्वीपर रामहित ही चलते हैं। मरीजों को देखने से लेकर मर्ज पहचान करना दवाई देना सब ये करते है। अस्पताल के बाहर कोई साइन बोर्ड भी नहीं लगा है। फिर भी यह पर करीब 20 से 30 मरीजों की ओपीडी होती है। हालांकि मौके पर मिले स्वीपर रामहित ने मरीजों को देखने की बात से इनकार किया है। मरीजों के पुराने पर्चे पर दवाई देने तक कि बात स्वीकारा है। डॉक्टरों की कमी है। जितनी व्यवस्था है उसमें मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने का प्रयास किया जाता है।
आयुर्वेदिक अस्पताल अरिया बाजार विभागीय उपेक्षा का शिकार है। आलम है एक डॉक्टर तीन अस्पताल का कार्यभार देख रहा है। मरीजों की चिकित्सकीय सेवा यहां पर तैनात स्वीपर के हवाले रहता है। दवा की किल्लत भी बनी रहती है। वैसे तो आयुर्वेदिक पद्धति से मरीजों का इलाज सुरक्षित माना जाता है, लेकिन डॉक्टर के बजाय स्वीपर इलाज करें तो कहां तक सुरक्षित इलाज है। अरिया बाजार के किराये के भवन में चल रहे आयुर्वेदिक अस्पताल पर वैसे तो चार स्वास्थ्य कर्मी नियुक्त है। जिनमे चिकित्साधिकारी हरिश्चंद्र पांडेय, फार्मासिस्ट रामकुमार, स्वीपर रामहित व वार्डब्वॉय भी हैं। डाक्टर बरियावन और टांडा के अतिरिक्त चार्ज की भी जिम्मेदारी है। इस वजह से अक्सर अस्पताल पर नहीं रहते हैं। फार्मासिस्ट को भी बस अस्पताल नहीं आने का बहाना चाहिए। लिहाजा अस्पताल स्वीपर रामहित ही चलते हैं। मरीजों को देखने से लेकर मर्ज पहचान करना दवाई देना सब ये करते है। अस्पताल के बाहर कोई साइन बोर्ड भी नहीं लगा है। फिर भी यह पर करीब 20 से 30 मरीजों की ओपीडी होती है। हालांकि मौके पर मिले स्वीपर रामहित ने मरीजों को देखने की बात से इनकार किया है। मरीजों के पुराने पर्चे पर दवाई देने तक कि बात स्वीकारा है। डॉक्टरों की कमी है। जितनी व्यवस्था है उसमें मरीजों को अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने का प्रयास किया जाता है।

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