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Tuesday, December 25, 2018

उम्मीद नही थी कि मैं भी कभी कुछ लिख सकता हूं : मेराज़ मुस्तफा

सिद्धार्थनगर : जनपद के सबसे अतिविशिष्ट माने जाने वाले इटवा विधानसभा क्षेत्र के रेहरा उर्फ भैसाही निवासी युवा ग्राम प्रधान व प्रवक्ता प्रधान संघ के अतिरिक्त पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे मेराज़ मुस्तफा पिछले कुछ महीनों से अपने द्वारा विभिन्न विषयों पर लिखे गए लेख व काव्य संग्रह की वजह से चर्चा में हैं और हो भी क्यों न क्योंकि मेराज़ मुस्तफा द्वारा लिखे गए लेख व काव्य संग्रह के लिए रचनाओं के माध्यम से जो छाप छोड़ रहे उसकी सराहना वरिष्ठ साहित्यकारों से लेकर पत्रकारिता जगह व प्रबुद्ध वर्ग के लोग करते नही थक रहे। इटवा तहसील क्षेत्र के खुनियांव विकास खण्ड अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रेहरा उर्फ भैसाही के युवा ग्राम प्रधान मेराज़ मुस्तफा से इस विषय में बात करने के लिए सिद्धार्थनगर ब्यूरो चीफ सत्येन्द्र उपाध्याय ने मंगलवार को मेराज़ मुस्तफा से मुलाकात कर उनके द्वारा लिखे गए लेखों , गजल , कविताओं आदि के बारे में विस्तार से चर्चा की। जिसपर बात करते हुए युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा ने बताया कि किस भी विषयवस्तु पर कुछ भी लिखना आसान नही होता इसीलिए मैंने कभी कल्पना भी नही की थी कि मैं लेख ,गजल या कविता भी लिख सकता हूं मगर ग्राम प्रधान बनने के कुछ समय बाद ही शारिरिक कष्टों की वजह से एकांत में रहने पर विवश होने के कारण यूं ही समय व्यतीत करने के लिए सर्वप्रथम एक गजल की चार पंक्तियां लिखी जिसको तकरीबन दस दिनों बाद दोबारा पढ़ने के लिए यूं ही देखने लगा तो न जाने कहा से जेहन में लफ्ज़ आते गए और मैंने उस गजल को चौबीस पंक्तियों में लिख डाला। आगे बात करते हुए मेराज़ मुस्तफा ने कहा कि पहली बार लिखी गई गजल को लगभग एक महीनों तक पड़ता रहा और उसमें जहां भी कोई गलती दिखाई पड़ती तो उसको संसोधित कर पुनः नए सिरे से लिखता और यह सिलसिला लगभग डेढ़ माह तक चला उसके बाद फिर कलम पकड़ी तो कई विषयों पर छोटे-छोटे लेख इत्यादि लिखा जो बाद में कई समाचार पत्रों में प्रकाशित हुए जिससे काफी हौंसला आफजाई हुई। युवा रचनाकार व ग्राम प्रधान मेराज़ मुस्तफा ने बताया कि सही मायनों में इस वर्ष जून माह में जब दोबारा कलम पकड़ी तो एक-एक करते पांच माह से भी कम अन्तराल में लगभग दो सौ से अधिक गजल , कविता , नज्म व कई विषयों पर सैकड़ों लेख लिख डाले लेकिन यह सब कैसे लिखा मुझे स्वयं नही पता बस जैसे खुदा स्वयं कलम की रोशनाई से लफ़्जों को कागज पर उतारते गए वरना मैं कभी भी सोच नही सकता था कि मैं गजल या कविता भी लिख सकता हूं। मेराज़ मुस्तफा ने बात करते हुए कहा कि उन्होंने जितना कुछ भी लिखा है सब अल्लाह की रजा और अल्लाह की ही इनायत है वह चाहे तो मिट्टी को भी सोना बना दे और सोने को मिट्टी में तब्दील कर दे। मेराज़ मुस्तफा के द्वारा लिखे गए गजलों , कविताओं का प्रकाशन भी शीघ्र ही होने वाला है जिसके लिए मुद्रक व प्रकाशक छह माह का समय दे रहे थे परन्तु मेराज़ मुस्तफा के मित्र दीपक सैनी के सहयोग से प्रकाशक ने शीघ्र ही प्रकाशन का आश्वासन दिया है। मेराज़ मुस्तफा के गजलों व कविताओं का संग्रह एक काव्य संग्रह "अधूरे ख़्वाब भरे किरदार" के रूप में जल्द ही हमारे सामने होगा जिसमें अपनी कलम के जरिए जान फूंकने का काम मेराज़ मुस्तफा ने चंद ही समय में किया है अविश्वसनीय लगता है लेकिन इस अविश्वसनीय को हकीकत का रूप तो मिल ही चुका है जिसपर फिर मेराज़ मुस्तफा वही बात दोहराते हैं कि सब अल्लाह की देन ही है वरना शारिरिक रूप से अस्वस्थ होने के बाद कभी उम्मीद भी नही की थी कि लेख ,गजल अथवा कविता भी लिख सकता हूं। मेराज़ मुस्तफा से बात करने के दौरान जब उनसे उनके द्वारा लिखी गई पसंदीदा रचना की बात की गई तो मुस्कुराहट के साथ मेराज़ मुस्तफा ने जवाब दिया कि जब अल्लाह ने एक कलम के जरिए मुझसे इतना सब लिखवा दिया तो वह सब ही मेरी पसंदीदा रचनाए होंगी। मेराज़ मुस्तफा के द्वारा लिखी गई एक रचना आप सभी के समक्ष पेश है उम्मीद है आप सभी को पसंद आएगी और मेराज़ मुस्तफा को आप सभी का प्यार , स्नेह व सम्मान मिलता रहेगा । ईश्वर मेराज़ मुस्तफा को स्वस्थ रखें ताकि उनके लेख व गजल हम सभी के सामने आते रहे यही कामना है।

देखें हैं कैसे-कैसे अजब रंग इस जहान में,
वरना पहले एक ही रंग था वो भी आसमान में।

गुरूर वह भी हद से ज्यादा लोग करते हैं किस बात पर,
गुजर जाती है उम्र तामीर करते हुए इक छोटे से मकान में।

कुचल कर रिश्तों को दौड़ता है दिन-रात दौलत शोहरत ऐश ओ आराम के लिए,
बेखबर को बता दो जाकर यह खबर कि नही आएगा काम यह सब हश्र के मैदान में,
अश्कों यूं सरेआम सबके सामने छलककर मत कुरेद जख्मों को 'मेराज़' के,
सम्भला हूं बड़ी मुश्किल से ख्वाहिशों को दफन कर दिल के कब्रिस्तान में।

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