स्वतंत्र भारत के "भारत रत्न प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद "जी की 133 वी जयंती, प्राथमिक विद्यालय बोकनार विकासखंड- शोहरतगढ़ ,जनपद सिद्धार्थनगर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध कुमार मौर्य ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर उनके प्रति श्रद्धांजलि प्रकट की.सहायक अध्यापिका कुमारी सुनीता सिंह, कुमारी श्रुति शर्मा ने भी पुष्पार्चन किया,,,,, प्रधानाध्यापक ने बाबू राजेंद्र प्रसाद द्वारा राष्ट्रहित में किए गए उनके योगदान के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला ,साथ ही उनके द्वारा निर्माण किए गए संविधान के आधार पर राष्ट्रहित में चलने हेतु बच्चों को प्रेरित किया. बाबू राजेंद्र प्रसाद का जन्म बिहार के जिला सारन के जीरादेई गांव में हुआ थ, वह अपने भाई बहनों में सबसे छोटे थे इसलिए परिवार में सबसे प्यारे थे, बचपन में राजेंद्र बाबू जल्दी सो जाते थे और सुबह जल्दी उठ जाते ,उनकी मां प्रतिदिन उन्हें रामायण महाभारत की कहानियां और भजन कीर्तन सुनाया करती थी ,उन्होंने बचपन में एक मौलवी साहब से फारसी में पढ़ना शुरू किया और 1915 में स्वर्ण पदक के साथ विधि परास्नातक तक की परीक्षा पास की ,उन्हें अंग्रेजी और फारसी के साथ ही हिंदी ,उर्दू ,संस्कृत और गुजराती भाषा का भी अच्छा ज्ञान था, देश के स्वतंत्रता आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया ,और देश के आजाद होने पर देश के प्रथम राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया, देश के सर्वोच्च पुरस्कार भारत रत्न से अलंकृत हुए और इस महान व्यक्तित्व का 28 फरवरी 1963 को पटना में देहावसान हुआ राजेंद्र बाबू ने अपनी आत्मकथा बापू के कदमों में ,इंडिया डिवाइडेड, सत्याग्रह ऐट चंपारण, भारतीय संस्कृति व खादी का अर्थशास्त्र ,इत्यादि उल्लेखनीय है।
Monday, December 3, 2018
3 दिसंबर 2018 को, स्वतंत्र भारत के "भारत रत्न प्रथम राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद "जी की 133 वी जयंती, धूम धाम से मनाया गया
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