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Monday, December 3, 2018

भारत के प्रथम राष्ट्रपति व भारत रत्न से सम्मनित डा. राजेंद्र प्रसाद का जन्म दिन को अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया

बांसी:-पुरानी तहसील परिसर स्थित सिविल बार भावन में सोमवार को अधिवक्ताओं द्वारा भारत के प्रथम राष्ट्रपति व भारत रत्न से सम्मनित डा. राजेंद्र प्रसाद का जन्म दिन को अधिवक्ता दिवस के रूप में मनाया। इस दौरान लोेगों ने जहां उनके व्यक्तित्व व कृतित्व का बखान कर उनके पद चिन्हों पर चलने का संकल्प लिया वहीं अपने साथ दो वरिष्ठ अधिवक्ताओं को सम्मनित भी किया।
मां सरस्वती के चित्र पर दीप प्रज्वलित व पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम को दिशा प्रदान की गई। बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे सांसद जगदंबिका पाल ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि अधिवक्ता सही मानें में सच्चे समाजसेवी होते हैँ। कई गरीबों व मजलूमों को न्याय दिला उन्हें उनकी समस्याओं से मुक्त कराने का काम करते हैं। प्रथम राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद जी को दो -दो बार राष्ट्रपति बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ जो पहला व आखिरी ही है। यह कानून की पढ़ाई में डाक्ट्रेट तक की डिग्री प्राप्त किए और अपने पेशों को अधिक से अधिक गरीबों व मजलूमों के हक के लिए इस्तेमाल किए। हमें भी आज उनके पद चिन्हों पर चलने की जरूरत है। कार्यक्रम को विशिष्ट अतिथि पूर्व सांसद डा. चंद्र शेखर त्रिपाठी, चंद्र प्रकाश पांडेय, राम चंद्र मिश्र, नर्वदा तिवारी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान कवि सुशील सागर व वरिष्ठ कवि डा. ज्ञानेन्द्र द्विवेदी दीपक द्वारा रचनाओं के माध्यम से अपनी बात रखी गई। इस दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रेम शंकर लाल श्रीवास्तव व जटा शंकर मिश्र को मुख्य अतिथि द्वारा अंग वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। आदित्य प्रकाश त्रिपाठी, नुरूल हुदा खा, भृगनंदन मिश्र, अशोक पांडेय, कमला धर दूबे, वंशी धर पांडेय, विनोद सिंह, संध्या श्रीवास्तव, तमन्ना हैदर रिजवी, सत्येंद्र सिंह आदि अधिवक्ता मौजूद रहे।

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