अमर तिवारी की एक रिपोर्ट
जनपद सिद्धार्थनगर विकास खंड बांसी के अंतर्गत ग्राम सोनफेरवा बुजुर्ग में बनवाये गये लाखों की लागत से ग्राम पंचायत सचिवालय भवनों का पुरसाहाल नहीं है। एक ओर वीरान क्षेत्रों में बनवाये गये भवनों में अराजकतत्वों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। दूसरी ओर इन भवनों को देखकर उनके निर्माण में लगी सामग्री के मानक का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बांसी विकास खंड के अंतर्गत ग्राम सोनफेरवा में बने सचिवालय को 5 वर्ष हो गए है । जब यह बना था तो यहाँ हर एक चीज की व्यवस्था उपलब्ध थी लेकिन उसके बाद आज तक यहां पर न ही कोई सरकारी कर्मचारी आया न ही अन्य लोग । लेकिन वह आज बिल्कुल जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे ही अन्य कई गांवों के सचिवालय भवन किसी के न रहने से खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान ने पंचायत भवन ऐसी जगहों पर बनवाये जहां पर उनकी मनमानी चल सके। भवन निर्माण में मानकों की अनदेखी करके सुनसान आबादी से दूर बनवा दिये गये।
ग्राम सचिवालय तो ग्राम सभा की मीटिंग और सचिव के रहने के लिए बनवाये गये थे परंतु सुनसान क्षेत्र में बने होने के कारण अराजकतत्वों ने यहां आकर अपना डेरा जमा लिया है। इस बारे में ग्रामीणों ने काफी शिकायतें की। इसके बावजूद भी प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया।
फिलहाल शासन की ग्रामों के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
जनपद सिद्धार्थनगर विकास खंड बांसी के अंतर्गत ग्राम सोनफेरवा बुजुर्ग में बनवाये गये लाखों की लागत से ग्राम पंचायत सचिवालय भवनों का पुरसाहाल नहीं है। एक ओर वीरान क्षेत्रों में बनवाये गये भवनों में अराजकतत्वों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है। दूसरी ओर इन भवनों को देखकर उनके निर्माण में लगी सामग्री के मानक का अंदाजा लगाया जा सकता है।
बांसी विकास खंड के अंतर्गत ग्राम सोनफेरवा में बने सचिवालय को 5 वर्ष हो गए है । जब यह बना था तो यहाँ हर एक चीज की व्यवस्था उपलब्ध थी लेकिन उसके बाद आज तक यहां पर न ही कोई सरकारी कर्मचारी आया न ही अन्य लोग । लेकिन वह आज बिल्कुल जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है। ऐसे ही अन्य कई गांवों के सचिवालय भवन किसी के न रहने से खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान ने पंचायत भवन ऐसी जगहों पर बनवाये जहां पर उनकी मनमानी चल सके। भवन निर्माण में मानकों की अनदेखी करके सुनसान आबादी से दूर बनवा दिये गये।
ग्राम सचिवालय तो ग्राम सभा की मीटिंग और सचिव के रहने के लिए बनवाये गये थे परंतु सुनसान क्षेत्र में बने होने के कारण अराजकतत्वों ने यहां आकर अपना डेरा जमा लिया है। इस बारे में ग्रामीणों ने काफी शिकायतें की। इसके बावजूद भी प्रशासन की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया गया।
फिलहाल शासन की ग्रामों के विकास और ग्रामीणों की समस्याओं के निस्तारण की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।



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