जनपद सिद्धार्थ नगर के इटवां क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों में अध्यापकों के अनुपस्थिति से शिक्षा का स्तर गिर रहा है। जिससे सरकार की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा देने की मंशा तार तार हो रही है। अर्द्धवार्षिक परीक्षा के समय अध्यापक अनुपस्थित मिल रहे हैं। जिसका खुलास उपजिला अधिकारी के आकस्मिक निरीक्षण में हुआ।
जानकारी के अनुसार परिषदीय विद्यालय कोटखास में शनिवार को दो अध्यापक अनुपस्थित मिले। उपजिला अधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार ने स्थानीय विकास खण्ड अन्तर्गत कोटखास स्थित प्राथमिक विद्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। जिसमें मौके पर अध्यापक कृष्ण कुमार मिश्र एवं राहुल प्रताप सिंह उपस्थित मिले। जबकि पंकज मणि त्रिपाठी इस माह किसी भी दिन उपस्थित नहीं हुए हैं, अर्थात 17 दिनों से अनुपस्थित हैं। प्रशांत कुमार यादव आज शनिवार के दिन अनुपस्थित मिले। उपजिला अधिकारी ने बताया कि अनुपस्थित अध्यापक पंकज मणि त्रिपाठी का 17 दिन का वेतन काटने के साथ विभागीय कार्रवाई किए जाने की रिपोर्ट की गई। साथ ही अध्यापक प्रशांत कुमार यादव का आज का वेतन रोकने के साथ नोटिस जारी किया गया है। कार्यवाही के लिए रिपोर्ट जिलाधिकारी महोदय को प्रेषित किया गया है।
सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को जूता, मोजा, ड्रेस, कापी, किताब भले ही निशुल्क बांट कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ले रही हो। परन्तु अध्यापकों की कार्यशैली बदलने में असफल साबित हो रही है। विद्यालयों में अनुपस्थित रहने वाले अध्यापकों पर ठोस विभागीय कार्यवाही न होने से इनकी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। जिसमें खण्ड शिक्षा अधिकारी के साथ सेटिंग की बात बतायी जाती है। इसी प्रकार विगत वर्ष भाकियू के इटवा तहसील अध्यक्ष राकेश कुमार श्रीवास्तव ने इसी विकास खण्ड के कुछ परिषदीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया था। श्री श्रीवास्तव के अनुसार इसमें कई अध्यापक अनुपस्थित मिले थे। शिकायत के बाद खण्ड शिक्षा अधिकारी से सेटिंग गेटिंग कर दूध के धुले साबित हो गए। अब यह तो समय के गर्भ में है कि उपजिला अधिकारी के औचक निरीक्षण में अनुपस्थित मिलने वाले अध्यापकों पर जिला अधिकारी कार्यवाही करते हैं या नोटिस के जवाब में दूध का धुला साबित करते हैं।

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