योगी जी! किसान कर रहे जूता पालिश
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले मे किसानो के ऐसे बुरे दिन आ गये हैं कि उन्हे अपने ही हक को लिये सडको पर उतरकर जुता पालिस करना पड रहा, जब स्थानीय अफसर और सरकार ने इन किसानो की मांग को अनसुना कर दिया तो मजबूरी मे किसान और मिल के कर्मचारी अनोखा प्रदर्शन कर सीएम का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने के लिये विकास भवन के गेट पर पहुंच गये और मोची की दुकान सजा ली, जो अफसर विकास भवन की तरफ आता वे उससे कहते साहब फ्री मे जुता पालिस करा लिजिये.. ये तस्वीरे देखकर हर किसी का सिर शर्म से झुक गया, भारत कृषि प्रधान देश है और यहां किसानो के हालात इस कदर बदतर हो गये हैं, एक किसान ने तो यह तक बताया कि वह पीएम मोदी से भी मिल चुकी है ताकि उनकी मांग पुरी हो सके मगर बावजूद नतीजा सिफर ही रहा,
गोविंदनगर सुगर मिल के कर्मचारियों ने मिल चालू करने, वेतन और बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की मांग को लेकर विकास भवन गेट पर जूता पालिश कर विरोध जताते हुए धरना दिया। इस दौरान मौके पर पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिशोर ने भी कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए अपना समर्थन दिया और कहा कि उनसे जो भी बन पड़ेगा वह करेंगे। कर्मचारियों के साथ वह कुछ देर तक धरने में शामिल भी हुए। सुबह 10 बजे के करीब सुगर मिल कर्मी विकास भवन गेट पर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। वह विकास भवन में आने वाले अधिकारियों और आगंतुकों से जूता पालिश कराने की गुजारिश करते रहे। कई लोग कुछ समझ नहीं पाए और जूता पालिश करवा लिए, उन्हे जब पता चला कि पालिश करने वाले मिल मजदूर हैं जिन्हे मिल न चलने से वेतन नहीं मिला है तो वह शर्मिंदा भी हुए। धरना के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वाल्टरगंज चीनी मिल के श्रमिक, किसान पिछले 45 दिनों से मिल चलाए जाने, बकाया वेतन और गन्ना मूल्य के भुगतान को लेकर आंदोलित हैं। प्रदेश की सभी मिलों का पेराई सत्र चालू हो गया है, मगर वाल्टरगंज मिल को चलाए जाने की पहल नहीं हुई। 11 माह से कर्मियों का वेतन बाकी है, वे घर गृहस्थी चलाने में असमर्थ हो गए हैं, या तो मिल चलवाया जाए या फिर इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए। धरना के अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया गया।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले मे किसानो के ऐसे बुरे दिन आ गये हैं कि उन्हे अपने ही हक को लिये सडको पर उतरकर जुता पालिस करना पड रहा, जब स्थानीय अफसर और सरकार ने इन किसानो की मांग को अनसुना कर दिया तो मजबूरी मे किसान और मिल के कर्मचारी अनोखा प्रदर्शन कर सीएम का ध्यान अपनी ओर आकृष्ट करने के लिये विकास भवन के गेट पर पहुंच गये और मोची की दुकान सजा ली, जो अफसर विकास भवन की तरफ आता वे उससे कहते साहब फ्री मे जुता पालिस करा लिजिये.. ये तस्वीरे देखकर हर किसी का सिर शर्म से झुक गया, भारत कृषि प्रधान देश है और यहां किसानो के हालात इस कदर बदतर हो गये हैं, एक किसान ने तो यह तक बताया कि वह पीएम मोदी से भी मिल चुकी है ताकि उनकी मांग पुरी हो सके मगर बावजूद नतीजा सिफर ही रहा,
गोविंदनगर सुगर मिल के कर्मचारियों ने मिल चालू करने, वेतन और बकाया गन्ना मूल्य भुगतान की मांग को लेकर विकास भवन गेट पर जूता पालिश कर विरोध जताते हुए धरना दिया। इस दौरान मौके पर पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकिशोर ने भी कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए अपना समर्थन दिया और कहा कि उनसे जो भी बन पड़ेगा वह करेंगे। कर्मचारियों के साथ वह कुछ देर तक धरने में शामिल भी हुए। सुबह 10 बजे के करीब सुगर मिल कर्मी विकास भवन गेट पर बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। वह विकास भवन में आने वाले अधिकारियों और आगंतुकों से जूता पालिश कराने की गुजारिश करते रहे। कई लोग कुछ समझ नहीं पाए और जूता पालिश करवा लिए, उन्हे जब पता चला कि पालिश करने वाले मिल मजदूर हैं जिन्हे मिल न चलने से वेतन नहीं मिला है तो वह शर्मिंदा भी हुए। धरना के दौरान कर्मचारियों ने कहा कि वाल्टरगंज चीनी मिल के श्रमिक, किसान पिछले 45 दिनों से मिल चलाए जाने, बकाया वेतन और गन्ना मूल्य के भुगतान को लेकर आंदोलित हैं। प्रदेश की सभी मिलों का पेराई सत्र चालू हो गया है, मगर वाल्टरगंज मिल को चलाए जाने की पहल नहीं हुई। 11 माह से कर्मियों का वेतन बाकी है, वे घर गृहस्थी चलाने में असमर्थ हो गए हैं, या तो मिल चलवाया जाए या फिर इच्छा मृत्यु की इजाजत दी जाए। धरना के अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को दिया गया।

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