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Friday, August 17, 2018

राजनीति के फलक से टूट गया चमकता सितारा, पूरे देश में दी जा रही श्रधांजलि

SCI24NEWS समीक्षा क्राईम इण्डिया24न्यूज़ परिवार की तरफ से पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी भाजपेयी जी को भावपूर्ण श्रधांजलि
राजनीति के फलक से टूट गया चमकता सितारा
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी ऐसा व्यक्तित्व था, जिनके साथ बिताए कुछ पलों कोई भुला नहीं पा रहा। उन्हें हर वो लम्हा याद आ रहा है जब उन्होंने इस महान विभूति का सान्निध्य प्राप्त हुआ। फिर चाहे पक्ष हो विपक्ष या फिर उनके विरोधी। उनके निधन के बाद हर कोई अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से नहीं रोक पा रहा।
भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने वाजपेयी को देश के सबसे बड़े राजनेताओं में एक बताया और कहा कि 65 वर्षों के अपने घनिष्ठतम मित्र की बहुत याद आएगी। वाजपेयी के शानदार नेतृत्व कौशल, वाक कला, देशभक्ति और इन सबसे ऊपर दया, मानवीयता जैसे उनके गुण और विचारधारा में मतभेद के बावजूद विरोधियों का दिल जीतने की कला का मेरे ऊपर गहरा असर रहा।
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने कहा कि वाजपेयी जीवन भर लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खड़े रहे और यह प्रतिबद्धता उनके हर काम में परिलक्षित होती थी। अटल बिहारी वाजपेयी जी निधन से बहुत दुखी हूं। वह हमारे राष्ट्रीय जीवन में एक विशाल व्यक्तित्व थे। वह पूरा जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खड़े रहे और एक सांसद, कैबिनेट मंत्री और प्रधानमंत्री के तौर पर उनके हर काम में लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता परिलक्षित हुई।
आरएसएस के मोहन भागवत ने ट्वीट किया कि वाजपेयी एक प्रखर दृढ एवं सर्व स्वीकृत नेता और महान व्यक्तित्व थे जिन्होंने भारतीय संस्कृति एवं मूल्यों को राष्ट्र जीवन में प्रतिष्ठित किया। वाजपेयी के निधन से पैदा हुई शून्यता हमेशा बनी रहेगी। दिवंगत नेता को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करने में हम राष्ट्र के साथ हैं।
उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू ने वाजपेयी को आजाद भारत का सबसे बड़ा नेता बताते हुए कहा कि देश में शासन व्यवस्था को बेहतर बनाने और लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने में उनका योगदान अविस्मरणीय है। लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें भारतीय राजनीतिक फलक का चमकता सितारा बताया। उनके निधन से हुई क्षति की भरपाई नहीं की जा सकती है।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि गैर-भाजपा समर्थक भी वाजपेयी से वाक शैली सीखने के लिए उनकी रैलियों में जाते थे। केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि उन्होंने अपने ‘गुरु और मार्गदर्शक’ को खो दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय वैज्ञानिक जगत वाजपेयी का शुक्रगुजार है, जिन्होंने पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद ‘जय जवान, जय किसान’ के नारे में ‘जय विज्ञान’ जोड़ा। लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुक रामविलास पासवान ने कहा कि कई लोग पद के कारण जाने जाते हैं लेकिन वाजपेयी के सामने प्रधानमंत्री का पद भी बहुत छोटा लगता था।

अटल बिहारी का थ्री डी फॉमूर्लाजिसे फॉलो करते हैं पीएम मोदी

अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है. ​उनके सम्मान में तिरंगा भी सात दिनों तक झुका रहेगा. पर यदि इस खबर ने सबसे ज्यादा किसी को तकलीफ पहुंचाई है तो वे हैं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी. मोदी अटल जी के नक्शेकदम पर चलने वाले नेता रहे हैं. उन्होंने अपनी कई योजनाओं को अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों के अनुसार ही तैयार किया. जब वाजपेयी के निधन की खबर आई तो मोदी स्तब्ध रह गए।

16 जुलाई 2016 को पीएम नरेंद्र मोदी ने जब 11वीं अंतरराज्यीय परिषद की बैठक में अटल बिहारी के 3डी फार्मूले का जिक्र किया तो उपस्थित सभी केंद्रीय मंत्री अौर मुख्यमंत्री अवाक रह गए. यह कोई अकेली एक घटना नहीं है, बल्कि ऐसे कई उदाहरण मौजूद हैं।

मोदी ने कहा कि पूर्व पीएम वाजपेयीजी के अनुसार भारत जैसे लोकतंत्र में डीबेट, डेलीब्रेशन अौर डिस्कशन से ही नीतियां बन सकती हैं जो जमीनी सच्चाई का ध्यान रखती हों. मतलब साफ है कि पीएम मोदी ने वाजपेयी जी का हवाला देते हुए संकेत दिया था कि राज्य अौर केंद्र के बीच सामंजस्य केवल चर्चा, परिचर्चा अौर विचार-विमर्श से हो सकता है।

बता दें कि वाजपेयी के फार्मूले के अनुरूप ही पीएम मोदी ने तब अपने राजनीतिक विरोधी बिहार के सीएम नीतीश कुमार अौर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल का गर्मजोशी से स्वागत किया था।

 वाजपेयी की यादों को संजोएगी यूपी सरकार 

अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद उनके सम्मान में उत्तरप्रदेश सरकार ने भी उनसे जुड़ी पुरानी यादों को संजोने का एलान किया है। यही नहीं उनकी अस्थियों को भी जनपद की नदियों में विसर्जित किया जाएगा।

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया कि अटल जी के पैतृक स्थान बटेश्वर, शिक्षा क्षेत्र कानपुर, प्रथम संसदीय क्षेत्र बलरामपुर व कर्मभूमि लखनऊ में स्मृतियों को जीवित रखने के लिए विशेष कार्य किए जाएंगे। उनकी अस्थियां हर जनपद की पवित्र नदियों में प्रवाहित की जाएंगी।

यहां पढ़ें- sci24news.blogspot.in

गौरतलब है कि उनका यूपी से लगाव खास था। वैसे तो उनका जन्म 24 दिसम्बर 1924 को ग्वालियर में हुआ था, लेकिन उनका पैतृक घर आगरा के बटेश्वर में है। 1942 में कानपुर से राजनीति शास्त्र में एमए की डिग्री हासिल की और यहीं से संघ के संपर्क में आए। 1947 में वह लखनऊ और यूपी के होकर रह गए। 1957 में बलरामपुर से लोकसभा का चुनाव लड़ा और पहली बार संसद पहुंचे।


घर से बीजेपी मुख्यालयले जायी जा रही वाजपेयी की पार्थिव देह

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी की पार्थिव देह को अंतिम दर्शनों के बाद अब भाजपा मुख्यालय ले जाया जा रहा है। उनकी पार्थिव देह को भाजपा मुख्यालय तक पहुंचाने का पूरा जिम्मा भारतीय सेना के जवानों ने लिया है।

वाजपेयी का पार्थिव शरीर भारतीय जनता पार्टी के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग स्थित नव-निर्मित मुख्यालय पर ले जाया जाएगा। पीएम मोदी भी मुख्यालय पहुंच गए हैं। 'राष्ट्रीय स्मृति' स्थल के लिए उनकी अंतिम यात्रा दोपहर एक बजे शुरू होगी। पुलिस और यातायात पुलिस के साथ-साथ अर्द्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई है।

इस दौरान कृष्ण मेनन मार्ग, सुनहरी बाग रोड, तुगलक रोड, अकबर रोड, तीस जनवरी मार्ग, मान सिंह रोड, भगवान दास रोड, शाहजहां रोड एवं सिकंदरा रोड आम लोगों के यातायात के लिए बंद रहेंगे। यातायात पुलिस ने कहा कि डीडीयू मार्ग, आईपी मार्ग, बीएसजी मार्ग (तिलक ब्रिज से दिल्ली गेट), जेएलएन मार्ग (राजघाट से दिल्ली गेट) भी बंद रहेंगे।

इससे पहले प्रिय नेता के अंतिम दर्शन के लिए सुबह से ही सैकड़ों की संख्या में लोग वाजपेयी के आवास पर पहुंच थे। नयी दिल्ली के लुटियंस जोन में कृष्णा मेनन मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 6-ए के आसपास सुरक्षा का भारी बंदोबस्तथे किए गए थे। सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, वाजपेयी के अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास के दरवाजे सुबह करीब साढ़े सात बजे खोले गये
बीजेपी कार्यालय में पहुंचा वाजपेयी का पार्थिव शरीरपीएम मोदी की आंखें हुई नम
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का अंतिम संस्‍कार आज यानी शुक्रवार को नई दिल्‍ली के स्‍मृति स्‍थल में किया जाएगा. उनका पार्थिव शरीर उनके सरकारी आवास 6ए, कृष्‍ण्‍ाा मेनन मार्ग सेे बीजेपी मुख्‍यालय पहुंच चुका है. जहां बीजेपी के तमाम नेताओं के साथ पीएम मोदी भी मौजूद हैं॥

जैसे ही मोदी ने अटल जी के पार्थिव शरीर को देखा तो उनकी आंखें नम हो गई. उन्होंने दोनों हाथ जोडकर प्रणाम किया. इस दौरान उनकी आंख से गिर रहे आंसुओं को साफ देखा जा सकता था. पीएम मोदी को उनके साथी नेताओं ने ढांढस बंधाया. बता दें कि अंतिम दर्शन के बाद उनकी अंतिम यात्रा दोपहर एक बजे बीजेपी मुख्‍यालय से ही निकाली जाएगी।

अटल जी का उनका अंतिम संस्‍कार शाम चार बजे दिल्‍ली के स्‍मृति स्‍थल में किया जाएगा. अटली जी के निधन पर सरकार ने सात दिन राष्‍ट्रीय शोक का ऐलान किया गया  है।

पीएम मोदी ने लिखा ब्लॉग

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन से दुखी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खुद को सम्हाल नहीं पा रहे हैं. उनकी आंखें बार बार आंसूओं से भीग रही हैं और खामोशी चेहरे पर साफ देखी जा सकती है. उनका मौन बता रहा है कि वे अंदर से कितना टूटा हुआ महसूस कर रहे हैं. भले ही मोदी अपने मुख से कुछ न कह पा रहे हों पर आज उनकी लेखनी ने सारा दर्द बयां कर दिया।

पीएम मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की याद में स्पेशल ब्लॉग लिखा है. जिसमें उन्होंने कहा कि अटल जी अब नहीं रहे. मन नहीं मानता. अटल जी, मेरी आंखों के सामने हैं, स्थिर हैं. जो हाथ मेरी पीठ पर धौल जमाते थे, जो स्नेह से, मुस्कराते हुए मुझे अंकवार में भर लेते थे, वे स्थिर हैं. अटल जी की ये स्थिरता मुझे झकझोर रही है, अस्थिर कर रही है. एक जलन सी है आंखों में, कुछ कहना है, बहुत कुछ कहना है लेकिन कह नहीं पा रहा. मैं खुद को बार-बार यकीन दिला रहा हूं कि अटल जी अब नहीं हैं, लेकिन ये विचार आते ही खुद को इस विचार से दूर कर रहा हूं. क्या अटल जी वाकई नहीं हैं? नहीं. मैं उनकी आवाज अपने भीतर गूंजते हुए महसूस कर रहा हूं, कैसे कह दूं, कैसे मान लूं, वे अब नहीं हैं।

मोदी ने आगे लिखा कि कभी सोचा नहीं था, कि अटल जी के बारे में ऐसा लिखने के लिए कलम उठानी पड़ेगी. देश और दुनिया अटल जी को एक स्टेट्समैन, धारा प्रवाह वक्ता, संवेदनशील कवि, विचारवान लेखक, धारदार पत्रकार और विजनरी जननेता के तौर पर जानती है. लेकिन मेरे लिए उनका स्थान इससे भी ऊपर का था. सिर्फ इसलिए नहीं कि मुझे उनके साथ बरसों तक काम करने का@  अवसर मिला, बल्कि मेरे जीवन, मेरी सोच, मेरे आदर्शों-मूल्यों पर जो छाप उन्होंने छोड़ी, जो विश्वास उन्होंने मुझ पर किया, उसने मुझे गढ़ा है, हर स्थिति में अटल रहना सिखाया है।

न्यायलयों ⚖️ में आधे दिन का अवकाश, कांग्रेस  की बैठक स्थगित*

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते दिल्ली उच्च न्यायालय और सभी जिला न्यायालय में आधे दिन का अवकाश रखा गया है। न्यायलयों में आज केवल एक बजे तक ही काम होगा। वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी आज होने वाली एक अहम बैठक को स्थगित कर दिया है।

न्यायालय के सक्षम प्राधिकारी ने बताया कि अधिकारियों और कर्मचारियों को स्मृति प्रधान में पूर्व प्रधान मंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के अंतिम संस्कार में भाग लेने की अनुमति देने के लिए आधे दिन की छुट्टी रखी गई है।
उधर सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रभारियों, कांग्रेस के विधानसभा प्रतिनिधियों, महासचिवों और के साथ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बैठक कल के लिए स्थगित कर दी गई है। राहुल गांधी राफले मुद्दे पर आज शाम 3.30 बजे बैठक लेने वाले थे।


👉 मौत से ठन गई!, जूझने का मेरा इरादा न था..., कविताओं📖 में वाजपेयी  की यादें रहेंगी जिंदा

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भले ही आज हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा लिखी कविताएं सदैव समाज को नई दिशा और चेतना प्रदान करता रहेगा। वाजपेयी राजनेता और ओजस्‍वी वक्‍ता ही नहीं बल्‍कि कलम के जादूगर भी थे। उनकी कविताएं महज चंद पंक्तियां नहीं बल्‍कि जीवन का नजरिया हैं, उन्‍होंने कई ऐसी कविताएं लिखीं, जिन्हें पढ़कर नई साहित्यकारों को दिशा मिली। वाजपेयी इन कविताओं का इस्‍तेमाल अपने भाषणों में भी खूब करते थे। वाजपेयी की ऐसी कुछ खास कविताओं की चंद लाइनें-

कल कहार में, बीच धार में,
घोर घृणा में, पूत प्यार में,
क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में,
जीवन के शत-शत आकर्षक,
अरमानों को ढलना होगा.
कदम मिलाकर चलना होगा...

हरी हरी दूब पर 
ओस की बूंदे 
अभी थी, 
अभी नहीं हैं| 
ऐसी खुशियां 
जो हमेशा हमारा साथ दें 
कभी नहीं थी, 
कहीं नहीं हैं|...

खून क्यों सफेद हो गया?
भेद में अभेद खो गया.
बंट गये शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार दड़ गई.
दूध में दरार पड़ गई...

क्षमा करो बापू! तुम हमको,
बचन भंग के हम अपराधी,
राजघाट को किया अपावन,
मंज़िल भूले, यात्रा आधी।...

कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है|
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है|...

ठन गई! 
मौत से ठन गई! 
जूझने का मेरा इरादा न था, 
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था, 
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई, 
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।...

भाजपा🌷 मुख्यालय में श्रद्धांजलि देने उमड़े चाहने वाले, वाजपेयी  के अंतिम दर्शनों को पहुंचे विदेशी राजनेता 

पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के अंतिम दर्शनों के लिए भाजपा मुख्यालय पर हर तबके के लोगों का तांता लगा हुआ है। राजनीति, उद्योग जगत और फिल्मी हस्तियों सहित पड़ौसी देशों के राजनेता भी वाजपेयी के अंतिम दर्शनों को पहुंच रहे हैं।

भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामयेल वांगचुक भी वाजपेयी के अंतिम दर्शन के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। नेपाल के विदेश मामलों के मंत्री प्रदीप कुमार ग्यावली दिल्ली पहुंचे हैं। वे अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और उनकी बेटी प्रतिभा आडवाणी ने वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और छत्तीगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि दी।






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