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Thursday, August 9, 2018

सिद्धार्थ नगर जिले के इटवा तहसील के हल्का लेखपाल कमलेश मिश्रा और अल-फ़ारूक़ इंटर कॉलेज अमौना के प्रबंधक शब्बीर अहमद के बीच विवाद थमने का नहीं ले रहा नाम

सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट 
 इटवा तहसील लेखपाल कमलेश मिश्रा ने इसी मामले के संबंध में तहसीलदार इटवा राजेश अग्रवाल के चैम्बर में घुस कर लिपिक से कोई आदेश लिखाने का दबाव बना रहे थे जिसकी शिकायत लिपिक ने तहसीलदार से कर दी। मौके पर पहुंचे तहसीलदार से लेखपाल ने गाली गलौच की।
बात इतनी बढ़ गयी कि फौजदारी पर उतारू हो गए। तेज़ आवाज़ सुनकर मौके पर अन्य कर्मचारी एंव अधिवक्ता-गण पहुंच गए और बीच-बचाव कर मामले को शांत किया। जबकि वहीं मौजूद पुलिस एंव एक सब-इंस्पेक्टर मूक दर्शक बने रहे।
प्रबंधक और लेखपाल के बीच का पूर्व मामला इस प्रकार चल रहा है - 
लेखपाल द्वारा प्रबंधक को जुलाई में नवीन परती पर कब्ज़ा करने संबंधित नोटिस दिया गया था। जिस पर तहसीलदार इटवा ने जांच कर, ऐसी किसी कब्ज़े को निराधार बताया और कॉलेज प्रबंधक के पक्ष में फैसला दिया। तहसीलदार इटवा राजेश अग्रवाल ने अपने 3 पन्नों के आदेश में लेखपाल के आरोपों को निराधार बताते हुये चेतावनी दी कि इस तरह के फ़र्ज़ी नोटिस आगे किसी को न दिया जाए।
तहसीलदार के आदेश से क्षुब्द होकर लेखपाल ने प्रबंधक को फोन पर धमकी भी दी थी और कॉलेज की प्रतिष्ठा को हर स्तर से धूमिल करने की बात कही थी। जिसकी मौखिक शिकायत प्रबंधक द्वारा थानाध्यक्ष इटवा सहित अन्य उच्चाधिकारियों को दी गयी थी। लेकिन हल्का लेखपाल द्वारा
07 अगस्त 2018 को प्रबन्धक  के खिलाफ थाने में FIR दर्ज होने संबंधित फ़र्ज़ी खबर वायरल किया गया। जिसके पश्चात कॉलेज प्रबंधक ने तहसील दिवस में उपजिलाधिकारी को तहरीर देकर लेखपाल द्वारा 06 अगस्त 2018 के चकरोड संबंधित रिपोर्ट अथवा कार्यवाही को व्यक्तिगत द्वेष की भावना से प्रेरित बताया और लेखपाल द्वारा धन उगाही के लिए ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया। जिस पर तहसीलदार इटवा ने अन्य लेखपाल और कानूनगो से जांच करवाकर रिपोर्ट तैयार करने की बात कही।
तहसीलदार इटवा ने कमलेश मिश्रा पर अपने अधिकारों के विपरीत कार्य करने और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया।
विगत दिनों इण्टर कॉलेज के प्रबंधक सहित तीन अन्य जिम्मेदारों को भी धमकी दी थी।
उन्होंने ने कहा कि कमलेश मिश्रा के खिलाफ कार्यवाही के लिए उपजिलाधिकारी इटवा को पत्र भेजा गया है।
लेखपाल कमलेश मिश्रा द्वारा अपने ही तहसीलदार से किये गए दुर्व्यवहार से क्षेत्र की लोग तरह तरह के कयास लगा रहे हैं। अधिवक्ता-गण एंव अन्य कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। सभी का मानना है कि समय रहते इस तरह के दुर्व्यवहार करने वालों को रोका नहीं गया तो अपने उच्च-अधिकारियों की कोई नहीं सुनेगा।
 पूरा मामला चकरोड को लेकर है 
विवादित चकरोड जिस पर प्रारम्भ से ही गड्ढा और जल-जमाव है जिस चकरोड के सम्बंध में लेखपाल द्वारा कार्यवाही करने की बात की जा रही है उस रास्ते पर गड्ढे हैं और उनमें जल-जमाव है। जगह जगह उगी हुई झाड़ियां ये बताती हैं कि उस रास्ते से किसी का आवागमन नहीं हो रहा था। मौके को देखने के बाद ये नहीं लगता कि लेखपाल जांच करने के लिए उसी सरकारी रास्ते (चकरोड) का प्रयोग कर सके होंगे। मौके पर जिस रास्ते का अस्तित्व ना हो उस पर ग्रामवासियों द्वारा लेखपाल से शिकायत करना हास्यपद लगता है। आनन-फानन में लेखपाल द्वारा की जा रही कार्यवाही से लेखपाल की मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

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