शैलेष सोनकर (एम.डी.)
लगातार रायबरेली में स्वच्छ भारत मिशन की उड़ रही धज्जियां
जिला पंचायत राज अधिकारी के संरक्षण में स्वच्छ भारत मिशन को नाकाम करने में लगे हैं अधिकारी व कर्मचारी
आज ग्राम पंचायत बिनौहरा व राजापुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के निरीक्षण में पाया गया कि पिछले कई माह से सफाई कर्मी सफाई करने नहीं आ रहा है ग्राम प्रधान भी सफाई के बाबत बात करने पर टालमटोल कर देते हैं विद्यालय में बने शौचालय जोकि लगता है कई महीनों से बंद है क्योंकि शौचालय के बाहर ताला लगा हुआ है वह दरवाजे के ठीक सामने मल मूत्र आदि पड़ा हुआ है जिससे साफ होता है कि यहां कभी सफाई नहीं होती है ना की शौचालय का प्रयोग किया जाता है विद्यालय परिसर के आस पास भी भारी गंदगी का अंबार रहता है आखिर स्वच्छ भारत मिशन योजना कैसे रायबरेली में अपना प्रभाव दिखाएगी जब अधिकारी व कर्मचारी ही इस में ढिलाई बरत रहे हैं जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा स्वच्छता अभियान की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं जो वास्तविकता से कोसों दूर हैं।यही नहीं बालक और बालिकाएं शौचालय में जाएं तो जाएं कैसे शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में है शौचालय के दरवाजे के बाहर मल-मूत्र पड़ा हुआ घास कूड़े का ढेर एवं अन्य कई ऐसी चीजें हैं जिससे शौचालय में छात्र-छात्राएं जाना भी पसंद नहीं करते हैं आखिर जब शिक्षा का मंदिर ही गंदा रहेगा तो स्वच्छ भारत मिशन कहां तक कामयाब हो पाएगा जहां जिला पंचायत राज अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन में अपनी खूबी गिनाते हुए फिरते हैं वहीं शिक्षा के मंदिर गंदा होने पर भी कोई कार्यवाही नहीं करते हैं ऐसा क्यों है क्या इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक सब मिलीभगत का इशारा करता है।यह जानकारी जब जिला पंचायत राज अधिकारी चंद्र किशोर वर्मा से ली गई तो उन्होंने बताया की पूर्व में यह आदेश था की विद्यालयों की सफाई सफाई कर्मी के द्वारा कराई जाएगी वर्तमान में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है तो क्या अब विद्यालयों की सफाई विद्यालय में तैनात शिक्षक या पढ़ने आने वाले विद्यार्थी करेंगे। विद्यालय परिसर के बाहर व अंदर भी गंदगी का अंबार है अगर डीपीआरओ साहब का कहना है कि विद्यालय की जिम्मेदारी जिला पंचायत राज अधिकारी की नहीं है तो क्या गांवों की भी जिम्मेदारी भी नहीं है स्वच्छ भारत मिशन का पूर्णतया मजाक बनाकर रख रहे हैं यहां के अधिकारी कर्मचारी व प्रधान जिला पंचायत राज अधिकारी जहां एक और स्वच्छता की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं वहीं दूसरी ओर केवल स्वच्छता के नाम पर खानापूर्ति ही करवाते हैं हकीकत जानने हो तो गांव में जाकर देखें वहां पर इतनी गंदगी का अंबार है यहां पर शौचालय मानक के विहीन ठेके पर देकर बनवाए जाते हैं लाभार्थियों से सारे पैसे ले लिए जाते हैं वह शौचालय अप्रशिक्षित कारीगरों द्वारा बनवाए जा रहे हैं शासन से स्पष्ट आदेश है कि जो भी कारीगर शौचालय निर्माण करेंगे उनको उसकी पूरी ट्रेनिंग जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से दी जाएगी पर ऐसा नही है।
लगातार रायबरेली में स्वच्छ भारत मिशन की उड़ रही धज्जियां
जिला पंचायत राज अधिकारी के संरक्षण में स्वच्छ भारत मिशन को नाकाम करने में लगे हैं अधिकारी व कर्मचारी
आज ग्राम पंचायत बिनौहरा व राजापुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय के निरीक्षण में पाया गया कि पिछले कई माह से सफाई कर्मी सफाई करने नहीं आ रहा है ग्राम प्रधान भी सफाई के बाबत बात करने पर टालमटोल कर देते हैं विद्यालय में बने शौचालय जोकि लगता है कई महीनों से बंद है क्योंकि शौचालय के बाहर ताला लगा हुआ है वह दरवाजे के ठीक सामने मल मूत्र आदि पड़ा हुआ है जिससे साफ होता है कि यहां कभी सफाई नहीं होती है ना की शौचालय का प्रयोग किया जाता है विद्यालय परिसर के आस पास भी भारी गंदगी का अंबार रहता है आखिर स्वच्छ भारत मिशन योजना कैसे रायबरेली में अपना प्रभाव दिखाएगी जब अधिकारी व कर्मचारी ही इस में ढिलाई बरत रहे हैं जिला पंचायत राज अधिकारी द्वारा स्वच्छता अभियान की बड़ी-बड़ी बातें की जाती हैं जो वास्तविकता से कोसों दूर हैं।यही नहीं बालक और बालिकाएं शौचालय में जाएं तो जाएं कैसे शौचालय जीर्ण-शीर्ण हालत में है शौचालय के दरवाजे के बाहर मल-मूत्र पड़ा हुआ घास कूड़े का ढेर एवं अन्य कई ऐसी चीजें हैं जिससे शौचालय में छात्र-छात्राएं जाना भी पसंद नहीं करते हैं आखिर जब शिक्षा का मंदिर ही गंदा रहेगा तो स्वच्छ भारत मिशन कहां तक कामयाब हो पाएगा जहां जिला पंचायत राज अधिकारी स्वच्छ भारत मिशन में अपनी खूबी गिनाते हुए फिरते हैं वहीं शिक्षा के मंदिर गंदा होने पर भी कोई कार्यवाही नहीं करते हैं ऐसा क्यों है क्या इसमें नीचे से लेकर ऊपर तक सब मिलीभगत का इशारा करता है।यह जानकारी जब जिला पंचायत राज अधिकारी चंद्र किशोर वर्मा से ली गई तो उन्होंने बताया की पूर्व में यह आदेश था की विद्यालयों की सफाई सफाई कर्मी के द्वारा कराई जाएगी वर्तमान में ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है तो क्या अब विद्यालयों की सफाई विद्यालय में तैनात शिक्षक या पढ़ने आने वाले विद्यार्थी करेंगे। विद्यालय परिसर के बाहर व अंदर भी गंदगी का अंबार है अगर डीपीआरओ साहब का कहना है कि विद्यालय की जिम्मेदारी जिला पंचायत राज अधिकारी की नहीं है तो क्या गांवों की भी जिम्मेदारी भी नहीं है स्वच्छ भारत मिशन का पूर्णतया मजाक बनाकर रख रहे हैं यहां के अधिकारी कर्मचारी व प्रधान जिला पंचायत राज अधिकारी जहां एक और स्वच्छता की बड़ी-बड़ी बातें करते हैं वहीं दूसरी ओर केवल स्वच्छता के नाम पर खानापूर्ति ही करवाते हैं हकीकत जानने हो तो गांव में जाकर देखें वहां पर इतनी गंदगी का अंबार है यहां पर शौचालय मानक के विहीन ठेके पर देकर बनवाए जाते हैं लाभार्थियों से सारे पैसे ले लिए जाते हैं वह शौचालय अप्रशिक्षित कारीगरों द्वारा बनवाए जा रहे हैं शासन से स्पष्ट आदेश है कि जो भी कारीगर शौचालय निर्माण करेंगे उनको उसकी पूरी ट्रेनिंग जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से दी जाएगी पर ऐसा नही है।

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