चौधरी विद्या देवी इण्टर कालेज मोहाना चौक नेउरा कोठी रोड जनपद सिद्धार्थनगर में सोमवार को हाई स्कूल के छात्र छात्राओं के विदाई समारोह का आयोजन किया गया । जिसमें छात्र छात्राओं को कालेज के प्रधानाचार्य द्वारा उपहार भेंट किया गया । जिसमें मुख्य अतिथि मौलाना हफीजुर्रहमान एवं विशिष्ट अतिथि बृजेश सिंह जी रहें । कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्यातिथि ने कहा कि आज जो भी छात्र छात्राएं इस कालेज से जा रही हैं हम उनके उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं और विश्वास रखते हैं की कालेज में दी गयी दीक्षा को हमेशा अपनाए रखेंगे ।
प्रधानाचार्य नूर मोहम्मद ने कहा कि स्कूल में लगभग 4 साल व्यतीत करने के बाद विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए हैं। आप सभी ने, यहाँ से बाहर जाकर कॉलेज से जुड़ने और देखने के लिए वर्षों का इंतजार किया है, आखिरकार, इतने लम्बे इंतजार के बाद वो दिन आ ही गया जब आप इस स्कूल को छोड़कर अपने भविष्य को नया रुप देने के लिए कॉलेज में प्रवेश लोगे।
10वीं कक्षा के छात्रों का प्रधानाचार्य होने के नाते, मैं आप सभी के बारे में, इन 4 सालों के साथ में मैंने जो कुछ भी महसूस किया है, उसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ। आप सभी वास्तव में, अपनी सज्जनता के कारण मुझसे अपनी प्रशंसा सुनने के पात्र हो।
मेरे प्यारे विद्यार्थियों, हमें आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करने और आकार देने में 4 साल का लम्बा समय लगा। समय के साथ अध्यापकों ने भी विद्यार्थियों के साथ में बहुत कुछ सीखा। इसलिए मैंने भी यही किया, मैंने आप में अपना बचपन बढ़ते हुए देखा है। आगे बढ़ने और छात्रों को आकार देने के लिए, छात्रों और अध्यापकों को साथ में मिलकर प्रयास करने पड़ते हैं और अच्छे परिणामों के लिए साथ मिलकर एक ताकत के रुप में कार्य करना पड़ता है।
विद्यार्थी, अध्यापकों के कार्यों का विषय, अध्यापकों के विचारों का लक्ष्य और अध्यापकों के प्रयासों प्रतिबिम्ब होते हैं। यह सत्य है कि, हमने आप सभी को शिक्षित किया है हालांकि, यह भी सत्य है कि, हमने भी आप सभी से बहुत कुछ सीखा है। यह बहुत लम्बा सफर था हालांकि, आप सभी की भविष्य में कुछ बेहतर करने की दृढ़इच्छा के कारण बहुत जल्दी बीत गया। इस स्कूल ने आपके बचपन और किशोरावस्था को देखा है, और अब आप सभी जीवन की युवा अवस्था में प्रवेश करने के लिए अग्रसर हो। बाल अवस्था में आपको अध्ययन का कार्य कराना बहुत मुश्किल कार्य था हालांकि, यह युवा अवस्था में थोड़ा आसान जरुर हो गया। हमने जो कुछ भी किया (चाहे अच्छा या बुरा), वो आप सभी को देश के भविष्य के लिए अच्छे मनुष्य के रुप में आकार देने की एक प्रक्रिया थी।
यह सभी हमारी जिम्मेदारी थी: कभी-कभी हमने तुम्हें प्यार किया और देखभाल की और कभी-कभी तुम्हें कठिन कार्यों को पूरा करने के लिए दिया। मेरे प्यारे छात्रों, आप सभी को मेरी यह सलाह है कि, इस स्कूल की दहलीज पर खड़े होकर पीछे की ओर मुड़कर मत देखना। आगे की ओर देखते हुए और आगे बढ़ते हुए संसार को देखना, हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं। मेरे बच्चों संसार को आप जैसे अधिक बुद्धिमान युवाओं की आवश्यकता है। सफलता आपके रास्ते में होगी। बस अपने दिमाग में यही रखना कि, आप अपने सभी कार्यों में सही हो और यह भी मत भूलना कि, सच की हमेशा जीत होती है। दूसरों को खुश करने की अपनी शक्ति का प्रयोग सभी को खुश करने में करना न कि दुखी करने में। किसी भी बुरी स्थिति में कभी भी आत्मसमर्पण मत करना और खुद में विश्वास रखना। जाओ और अपना नाम, धन, प्रसिद्धि कमाओ और हमारे पास अपनी सफलता की कहानी सुनाने के लिए वापस आओ। इस दौरान रामप्रकाश पाण्डेय , घुरहू प्रसाद , अरमान अली , राजेश कन्नौजिया , आमिर मोईन , समेत जूनियर कक्षा की छात्र छात्राएं एवं सहायक अध्यापक /अध्यापिकाये मौजूद रही ।
प्रधानाचार्य नूर मोहम्मद ने कहा कि स्कूल में लगभग 4 साल व्यतीत करने के बाद विदाई देने के लिए इकट्ठा हुए हैं। आप सभी ने, यहाँ से बाहर जाकर कॉलेज से जुड़ने और देखने के लिए वर्षों का इंतजार किया है, आखिरकार, इतने लम्बे इंतजार के बाद वो दिन आ ही गया जब आप इस स्कूल को छोड़कर अपने भविष्य को नया रुप देने के लिए कॉलेज में प्रवेश लोगे।
10वीं कक्षा के छात्रों का प्रधानाचार्य होने के नाते, मैं आप सभी के बारे में, इन 4 सालों के साथ में मैंने जो कुछ भी महसूस किया है, उसके बारे में कुछ कहना चाहता हूँ। आप सभी वास्तव में, अपनी सज्जनता के कारण मुझसे अपनी प्रशंसा सुनने के पात्र हो।
मेरे प्यारे विद्यार्थियों, हमें आप सभी को उज्ज्वल भविष्य के लिए तैयार करने और आकार देने में 4 साल का लम्बा समय लगा। समय के साथ अध्यापकों ने भी विद्यार्थियों के साथ में बहुत कुछ सीखा। इसलिए मैंने भी यही किया, मैंने आप में अपना बचपन बढ़ते हुए देखा है। आगे बढ़ने और छात्रों को आकार देने के लिए, छात्रों और अध्यापकों को साथ में मिलकर प्रयास करने पड़ते हैं और अच्छे परिणामों के लिए साथ मिलकर एक ताकत के रुप में कार्य करना पड़ता है।
विद्यार्थी, अध्यापकों के कार्यों का विषय, अध्यापकों के विचारों का लक्ष्य और अध्यापकों के प्रयासों प्रतिबिम्ब होते हैं। यह सत्य है कि, हमने आप सभी को शिक्षित किया है हालांकि, यह भी सत्य है कि, हमने भी आप सभी से बहुत कुछ सीखा है। यह बहुत लम्बा सफर था हालांकि, आप सभी की भविष्य में कुछ बेहतर करने की दृढ़इच्छा के कारण बहुत जल्दी बीत गया। इस स्कूल ने आपके बचपन और किशोरावस्था को देखा है, और अब आप सभी जीवन की युवा अवस्था में प्रवेश करने के लिए अग्रसर हो। बाल अवस्था में आपको अध्ययन का कार्य कराना बहुत मुश्किल कार्य था हालांकि, यह युवा अवस्था में थोड़ा आसान जरुर हो गया। हमने जो कुछ भी किया (चाहे अच्छा या बुरा), वो आप सभी को देश के भविष्य के लिए अच्छे मनुष्य के रुप में आकार देने की एक प्रक्रिया थी।
यह सभी हमारी जिम्मेदारी थी: कभी-कभी हमने तुम्हें प्यार किया और देखभाल की और कभी-कभी तुम्हें कठिन कार्यों को पूरा करने के लिए दिया। मेरे प्यारे छात्रों, आप सभी को मेरी यह सलाह है कि, इस स्कूल की दहलीज पर खड़े होकर पीछे की ओर मुड़कर मत देखना। आगे की ओर देखते हुए और आगे बढ़ते हुए संसार को देखना, हमारी शुभकामनाएं सदैव आपके साथ हैं। मेरे बच्चों संसार को आप जैसे अधिक बुद्धिमान युवाओं की आवश्यकता है। सफलता आपके रास्ते में होगी। बस अपने दिमाग में यही रखना कि, आप अपने सभी कार्यों में सही हो और यह भी मत भूलना कि, सच की हमेशा जीत होती है। दूसरों को खुश करने की अपनी शक्ति का प्रयोग सभी को खुश करने में करना न कि दुखी करने में। किसी भी बुरी स्थिति में कभी भी आत्मसमर्पण मत करना और खुद में विश्वास रखना। जाओ और अपना नाम, धन, प्रसिद्धि कमाओ और हमारे पास अपनी सफलता की कहानी सुनाने के लिए वापस आओ। इस दौरान रामप्रकाश पाण्डेय , घुरहू प्रसाद , अरमान अली , राजेश कन्नौजिया , आमिर मोईन , समेत जूनियर कक्षा की छात्र छात्राएं एवं सहायक अध्यापक /अध्यापिकाये मौजूद रही ।




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