बघौचघाट कस्बे में चल रहा राजकीय होमियोपैथिक चिकित्सालय अपने निजी भवन का तलाश में 1972 से कर रहा है। पर विभाग के उदासिनता के चलते व ग्राम पंचायत से स्थाई ज़मीन न मिलने के कारण आज भी यह हॉस्पिटल ग्राम सभा के ग्राम पंचायत भवन में शिफ्ट है।
जिले का सबसे पहला होमियोपैथिक हॉस्पिटल है जो सुविधा विहीन है। बघौचघाट कस्बे में इस हास्पिटल को 1995 से ग्राम पंचायत भवन के मकान में संचालित होता आ रहा है। इस हास्पिटल को आज तक अपना निजी भवन नही मिल सका है। इसका मूल वजह ज़मीन न मिलना, इसलिए दूर आने वाले मरीजो को काफी परेशान होना पड़ता है। इस
हास्पिटल पे जो डॉक्टर मौजूद रहते है वह ग्राम पंचायत के प्रधान से ज़मीन प्रस्ताव की मांग करते है पर उनके बातो को कोई प्रधान सुनता ही नही इसलिए यह निर्माण नही हो पाता है ।
इस हास्पिटल का खास बात यह है इसकी की पहचान दूर तक फैल गया है। बिहार के सटे व पुरानी पहचान से प्रसिद्ध इस केंद्र पर कुशीनगर जिले के दर्जन से अधिक गांव बिहार से मरीज इलाज के लिए आते है।
इस सम्बंध में बर्तमान प्रधान से पूछने पर बताया कि मैं प्रयास में हूं जल्द ही जमीन का प्रस्ताव दे दिया जाएगा।


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