मेराज़ मुस्तफा की विशेष रिपोर्ट
इटवा - सिद्धार्थनगर : जब भी प्रशासनिक अमले की बात जेहन में आती है लोगों के दिलों दिमाग में इनके प्रति एक नाकारात्मक छवि बन जाती है कि भ्रष्टाचार के जन्मदाता यही लोग हैं परन्तु सत्यता यह है कि किसी भी एक ऐसे तथाकथित प्रशासनिक अफसर के वजह से पूरे प्रशासनिक अमले को उसी श्रेणी में रखना कतई उचित नही है यदि आप किसी एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी को रात्रि के ग्यारह बजे भी जनता के हित में लंबित पड़े कार्यों को करते देखें तो शायद आपकी सोच तत्काल बदल जाए।
गुरुवार को इटवा तहसील सभागार में निर्वाचक नामावलियों को लोकसभा चुनावों के पूर्व त्रुटिरहित करने के लिए बीएलओ एवं नामित पर्यवेक्षकों के साथ ही सभी राजनीतिक दलों के बूथ प्रभारियों की बैठक में उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार ने जो सख्ती दिखाई उससे साफ प्रतीत हो रहा कि निर्वाचन कार्यों में शिथिलता बरतने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नही जाएगा। ज्ञात हो कि उपजिलाधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार विगत माह से ही सरकारी कार्यों में अनियमितता बरतने वालों व सरकारी मानकों के विपरीत कार्य करने वालों पर कठोर कार्यवाई करते आ रहे हैं। उपजिलाधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार ने जब से कार्यभार ग्रहण किया तब से अब तक की स्थिति देखी जाए तो इटवा तहसील क्षेत्र में सरकारी कार्यों में तेजी आई है जो उनके द्वारा लिए गए कठोर निर्णयों के कारण ही सम्भव हो सका है।
आज यदि सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्र के कार्यों पारदर्शिता बरती जा रही तो वह केवल उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार द्वारा पूर्व में की गई कार्यवाइयों के चलते ही है। उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार ने आगे बढ़कर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की कमान स्वयं तो संभाली ही साथ में इटवा तहसील प्रशासन में जिस तरह नवीन उर्जा का संचार किया वह भी काबिले तारीफ है। उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार के नक्शेकदम पर कदम से कदम मिलाकर चलने वालों में तहसीलदार इटवा राजेश अग्रवाल का नाम सबसे ऊपर है। इटवा तहसील के कप्तान त्रिभुवन कुमार व उपकप्तान राजेश अग्रवाल के बीच बन चुके समन्वय के कारण आज जनपद में इटवा तहसील क्षेत्र भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में अव्वल नम्बर पर है। उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम की सराहना करते तहसील क्षेत्रवासियों द्वारा तारीफ़ों के पुल बांधा जा रहा तो दूसरी तरफ अराजक तत्वों व अवैध कार्यों में लिप्त लोगों के होश फाख्ता है।
इटवा - सिद्धार्थनगर : जब भी प्रशासनिक अमले की बात जेहन में आती है लोगों के दिलों दिमाग में इनके प्रति एक नाकारात्मक छवि बन जाती है कि भ्रष्टाचार के जन्मदाता यही लोग हैं परन्तु सत्यता यह है कि किसी भी एक ऐसे तथाकथित प्रशासनिक अफसर के वजह से पूरे प्रशासनिक अमले को उसी श्रेणी में रखना कतई उचित नही है यदि आप किसी एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी को रात्रि के ग्यारह बजे भी जनता के हित में लंबित पड़े कार्यों को करते देखें तो शायद आपकी सोच तत्काल बदल जाए।
गुरुवार को इटवा तहसील सभागार में निर्वाचक नामावलियों को लोकसभा चुनावों के पूर्व त्रुटिरहित करने के लिए बीएलओ एवं नामित पर्यवेक्षकों के साथ ही सभी राजनीतिक दलों के बूथ प्रभारियों की बैठक में उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार ने जो सख्ती दिखाई उससे साफ प्रतीत हो रहा कि निर्वाचन कार्यों में शिथिलता बरतने वालों को किसी भी दशा में बख्शा नही जाएगा। ज्ञात हो कि उपजिलाधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार विगत माह से ही सरकारी कार्यों में अनियमितता बरतने वालों व सरकारी मानकों के विपरीत कार्य करने वालों पर कठोर कार्यवाई करते आ रहे हैं। उपजिलाधिकारी इटवा त्रिभुवन कुमार ने जब से कार्यभार ग्रहण किया तब से अब तक की स्थिति देखी जाए तो इटवा तहसील क्षेत्र में सरकारी कार्यों में तेजी आई है जो उनके द्वारा लिए गए कठोर निर्णयों के कारण ही सम्भव हो सका है।
आज यदि सरकारी व गैर सरकारी क्षेत्र के कार्यों पारदर्शिता बरती जा रही तो वह केवल उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार द्वारा पूर्व में की गई कार्यवाइयों के चलते ही है। उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार ने आगे बढ़कर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की कमान स्वयं तो संभाली ही साथ में इटवा तहसील प्रशासन में जिस तरह नवीन उर्जा का संचार किया वह भी काबिले तारीफ है। उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार के नक्शेकदम पर कदम से कदम मिलाकर चलने वालों में तहसीलदार इटवा राजेश अग्रवाल का नाम सबसे ऊपर है। इटवा तहसील के कप्तान त्रिभुवन कुमार व उपकप्तान राजेश अग्रवाल के बीच बन चुके समन्वय के कारण आज जनपद में इटवा तहसील क्षेत्र भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम में अव्वल नम्बर पर है। उपजिलाधिकारी त्रिभुवन कुमार द्वारा भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम की सराहना करते तहसील क्षेत्रवासियों द्वारा तारीफ़ों के पुल बांधा जा रहा तो दूसरी तरफ अराजक तत्वों व अवैध कार्यों में लिप्त लोगों के होश फाख्ता है।


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