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Tuesday, December 25, 2018

महज दो वर्ष ग्यारह माह की उम्र में नन्ही सृष्टि बनी फेस ऑफ फरीदाबाद , चित्रकला से लेकर रैंपवॉक के लिए प्राप्त कर चुकी हैं दर्जनों अवॉर्ड

मेराज़ मुस्तफा की विशेष रिपोर्ट 

कहते हैं बेटियां ईश्वर का वरदान होती हैं जिन घरों में बेटियां न हों वहां ईश्वर की कृपादृष्टि नही पड़ती फिर भी इस सभ्य समाज में उन्हीं बेटियों को कुछ लोग अभिशाप मानते हैं बिना इस बात की कल्पना किए कि बेटी के बगैर सृष्टि का अस्तित्व कभी हो ही नही सकता और ऐसी मनोवृत्ति वाले लोगों के लिए एक मिसाल बनी हैं फरीदाबाद हरियाणा की रहने वाली नन्ही सृष्टि गुलाटी ने जिसने महज दो वर्ष ग्यारह माह की अल्पायु में ही अपनी प्रतिभा को सबके सामने प्रदर्शित किया तो लोग हैरतअंगेज रह गए। हरियाणा का नाम आते ही सर्वप्रथम जेहन में एक ही विचार आता है कि यह वो जगह है जहां बेटियों को किसी अभिशाप से कम नही समझा जाता लेकिन फरीदाबाद के रहने वाले श्री प्रवीण गुलाटी व श्रीमती प्रिया गुलाटी के अनुसार उनके लिए उनकी बेटी सृष्टि किसी ईश्वरीय वरदान से कम नही है। ऐसी सकारात्मक सोच यदि सभी के अंदर आ जाए तो हमें बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ जैसे नारे भी नही देने पड़ेंगे लेकिन अफसोस कि जिस बेटी में देवी का रूप देखा जाता है उसी बेटी को कपितय लोग अभिशाप मानते हैं बिना यह सोचे कि उन्होंने जिस कोख से  जन्म लिया वह भी एक बेटी ही थी जिसने बेटी से पत्नी और पत्नी से माँ तक का सफर तय करते हुए उन्हें इस दुनियां में आँख खोलने का मौका दिया।
फरीदाबाद के श्री प्रवीण गुलाटी व श्रीमती प्रिया गुलाटी की इकलौती सन्तान नन्ही सृष्टि ही है लेकिन अपने नाम के अनरूप वह अपने माता-पिता के लिए सम्पूर्ण सृष्टि के समान है और हो भी क्यों न जब माँ सरस्वती के रूप में स्वयं सभी देवियों का वास इस नन्ही बच्ची में समाहित है।
मात्र दो वर्ष ग्यारह माह की छोटी सी उम्र में सृष्टि गुलाटी ने नृत्यकला में ऐसे पारंगत तरीके से अपने कदमों को थिरकाती है जैसे कोई वर्षों का प्रशिक्षण प्राप्त अनुभवी नृत्यांगना हो तो वहीं जब सृष्टि के हाथों में पेंटिंग का ब्रश आ जाता है तो किसी माहिर चित्रकार की तरह अपने हाथों से बनाई तस्वीरों में प्राण फूंक देती है। सृष्टि गुलाटी ने महज इतनी कम उम्र में ही रैंपवॉक , परिधान कला प्रदर्शन , नृत्यकला , चित्रकारी के जरिए दर्जनों अवॉर्ड जीतकर सार्टिफिकेट प्राप्त किया। इस विषय में सृष्टि के पिता श्री प्रवीण गुलाटी ने जर्नलिस्ट मेराज़ मुस्तफा से बात करते हुए बताया कि सृष्टि में यह सारी खूबियां ईश्वरीय देन ही है वरना इतनी कम आयु में विभिन्न कला क्षेत्रों में अपनी उत्कृष्टता का परिचय देना हर किसी के बस की बात नही। श्री प्रवीण गुलाटी ने आगे बात करते हुए कहा कि सृष्टि के रूप में ईश्वर ने उन्हें व उनकी पत्नी श्रीमती प्रिया गुलाटी को संसार का सबसे अनमोल तोहफा दिया है। सृष्टि गुलाटी के नन्हे कदम यहीं नही रुके और विद्यालय स्तर पर आयोजित ओलम्पिक में सभी प्रतिस्पर्धाओं में भाग लेते हुए सभी प्रतियोगिताओं में रनरअप रहते हुए एक अद्भुत रिकॉर्ड बनाया जो कि तीन वर्ष से भी कम उम्र के बच्चों के लिए लगभग असम्भव ही होता है। सृष्टि गुलाटी द्वारा प्रतिभाग किए गए अब तक सभी प्रतियोगिताओं में सबसे कम उम्र की प्रतिभागी होने का अद्भुत रिकॉर्ड भी फरीदाबाद की इस नन्ही बच्ची के नाम है। सृष्टि को बीते नवम्बर माह में कैलाश धाम सेवा ट्रस्ट द्वारा बेस्ट टू बेस्ट अवॉर्ड से नवाजा गया जिसपर सृष्टि के पिता प्रवीण गुलाटी ने जर्नलिस्ट मेराज़ मुस्तफा से फोन पर बात करते हुए बताया कि उनकी बेटी किसी प्रतिस्पर्धा में विनर रही हो या रनरअप उससे कोई फर्क नही पड़ता मुझे खुशी इस बात की है कि ईश्वर ने सृष्टि के रूप में हमारे परिवार को जो अनमोल वरदान दिया है उसको शब्दों में बयान नही किया जा सकता। सृष्टि द्वारा हासिल किए गए उपलब्धियों के बारे में बात की जाए तो बात जल्दी खत्म ही नही होगी बस ईश्वर सृष्टि पर इसी तरह अपनी कृपा बनाए रखें ताकि फरीदाबाद की यह नन्ही परी आगे चलकर सम्पूर्ण विश्व में भारत का नाम रोशन करे।

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