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Saturday, December 29, 2018

मौत का खेल : बदहाल सड़कों पर भी फर्राटा भर रहे बुलेट सवार नाबालिग

मेराज़ मुस्तफा/सत्येन्द्र उपाध्याय

इटवा - सिद्धार्थनगर : सड़कों की दुर्दशा से तो हर कोई वाकिफ ही होगा लेकिन अब यह बदहाल सड़कें और भी खतरनाक होती जा रहीं जिसकी वजह है नाबालिग बच्चों द्वारा इन टूटी सड़कों पर बुलेट लेकर फर्राटा भरना जिस वजह से यह नाबालिग बुलेट राइडर खुद की जान जोखिम में डाल ही रहे साथ ही सबसे ज्यादा खतरा राहगीरों पर मंडराता है क्योंकि एक जरा सी चूक होते ही यह नाबालिग बुलेट राइडर खुद तो दुर्घटना का शिकार होंगे ही साथ ही अगल बगल से गुजरने वाले लोगों को भी अपनी चपेट में लेकर उनकी जिंदगी को भी दांव पर लगाने में कोई कोर कसर नही छोड़ेंगे । बताते चले कि सिद्धार्थनगर में पिछले दो - तीन वर्षों से रॉयल इनफील्ड कम्पनी द्वारा निर्मित बुलेट की डिमांड अत्यधिक बढ़ गयी है एवं हर कोई अपना स्टेटस दिखाने की खातिर बुलेट लेकर चलना शान समझते हैं लेकिन यह दिखावे की शान में दांव पर लग रहे नाबालिगों के प्राण । अपनी शान - ओ - शौकत दिखाने के चलते परिणामस्वरूप आज जनपद में चल रहे दोपहिया वाहनों में बुलेट बाइक की संख्या अकेले ही चालीस फीसदी है । इटवा तहसील क्षेत्र के बढ़या , खड़सरी , बेलवा , मिठौवां आदि चौराहों पर प्रतिदिन बुलेट सवार नाबालिगों को धडल्ले से भीड़ के मध्य तेज रफ्तार से चलना किसी राजशाही शान से कम नही समझते और बुलेट में ऐसे साइलेंसर का प्रयोग किया जा रहा जो रॉयल इनफील्ड कम्पनी द्वारा लगाकर दिए गए साइलेंसर की तुलना में चार गुना अधिक आवाज निकालता है जबकि इस तरह का साइलेंसर लगाना प्रतिबंधित है परन्तु जब बिना लाइसेंस के नाबालिग फर्राटा भर सकते हैं तो इस पर जिम्मेदार क्या ध्यान देंगे कि क्या सही है क्या गलत। इस विषय मे क्षेत्र के करौंदा खालसा निवासी
महबूब अली मनिहार का कहना है कि नौजवानों द्वारा जिस तरह से दोपहिया वाहनों को चलाया जा रहा वह देखकर ही रूह सिहर जाती है जबकि बुलेट बाइक की बात की जाए तो उसपर सवार नाबालिग बच्चों की तुलना में बुलेट का वजन ही इतना अधिक होता है कि जरा सी चूक पर ही सम्भलने की कोई सम्भावना नही। क्षेत्र के भगवतपुर निवासी सपा के इटवा विधानसभा अध्यक्ष
कमरूज्जमां खां का कहना है कि बुलेट ही नही कोई भी बाइक नाबालिगों को देकर अभिभावक स्वयं गलती कर रहे क्योंकि नाबालिगों के हाथ में बाइक के हैन्डल या चारपहिया वाहनों की स्टेयरिंग आते ही वह लोग रफ्तार के साथ मौत का खेल खेलने लग जाते हैं जो उनके जीवन के साथ अन्य लोगों के लिए भी घातक सिद्ध हो रहा और आए दिन हो रहे सड़क दुर्घटनाओं के बारे में सभी लोग समाचार पत्रों के माध्यम से वाकिफ ही हैं। बढ़या कस्बा निवासी वरिष्ठ पत्रकार
व शिक्षक परवेज अहमद ने इस विषय में जर्नलिस्ट मेराज़ मुस्तफा से बात करते हुए कहा कि सर्वप्रथम नाबालिग बच्चों को बुलेट जैसी या कोई भी दोपहिया वाहन देकर अभिभावक भारी गलती कर रहे ऐसे में यदि कोई घटना घटित होती है तो नाबालिग बच्चों से ज्यादा उनके अभिभावक जिम्मेदार होंगे एवं इस विषय को स्थानीय सम्भागीय परिवहन अधिकारी द्वारा गम्भीरता से लेने की जरूरत है। बढ़या निवासी शिक्षक व वरिष्ठ पत्रकार परवेज अहमद जर्नलिस्ट मेराज़ मुस्तफा को बताया कि नाबालिग बच्चों को बिना लाइसेंस जारी हुए बुलेट अथवा कोई भी दोपहिया या चारपहिया वाहन देकर उनके परिजन ही उनको नाबालिगों को मौत की सवारी दे रहे और सामान्य साइलेंसर की तुलना में बदलकर लगाए जाने वाले साइलेंसर की ध्वनि क्षमता मानव कर्ण के लिए निर्धारित अधिकतम डेसिबल की तुलना में आठ गुना अधिक डेसिबल आवाज निकालने वाले साइलेंसर लगा बुलेट यदि बगल से गुजर जाता है तो ह्रदय गति उस समय सामान्य रहने की तुलना में तीन गुना बढ़ जाती है तो ऐसे इस साइलेंसर से निकलने वाली ध्वनि भी ह्रदय रोगियों के साथ सभी के लिए घातक हैं। कमरूज्जमां खां , परवेज अहमद , महबूब अली मनिहार ,अरशद अहमद , महबूब अहमद , कैशराम, रामअचल गौतम सहित इटवा क्षेत्र के निवासियों में नब्बे फीसदी लोग इस बात से सहमत हैं कि नाबालिगों द्वारा फर्राटा भरकर बुलेट चलाना किसी मौत की सवारी से कम नही है परन्तु सम्बंधित नाबालिगों के परिजनों को यह बात क्यों नही समझ आ रही बड़ा सवाल है और क्षेत्रीय सम्भागीय परिवहन विभाग के अधिकारियों व जिम्मेदारों के साथ पुलिस महकमें के लोग भी चुप्पी साधे बैठें हैं जिसके परिणामस्वरूप प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं में इजाफा होता जा रहा जिसके लिए अभिभावकों के साथ सम्बंधित विभाग भी जिम्मेदार हैं।

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