सोमनाथ सोनकर/शैलेष कुमार सोनकर क़ी कलम से -
लखनऊ- केन्द्र और राज्यों के खिलाफ सत्ता विरोधी की लहर के बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के लिए संकट मोचक बनकर उभरे हैं। यह हम नहीं, चार राज्यों में स्टार प्रचारक के तौर पर योगी आदित्यनाथ द्वारा 74 विधान सभा में की गई रैलियों में भाजपा को 51 सीटों पर मिली जीत के आंकड़े बयां कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रचार रैलियों में की गई टिप्पणी भी देश और दुनिया में सुर्खियां बनी।
उल्लेखनीय है कि पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलांगाना और मिजोरम में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकारें थी, जनता में नाराजगी भी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता की वजह से अधिकतर भाजपा शासित राज्यों में उनकी सभाओं के लिए भारी मांग थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ में राजनंदगांव, मूंगेली, दंतेवाड़ा, वेल्तारा, जंजगीर चंपा, वैशाली नगर, कुरुद, भटपारा, मध्य प्रदेश में खंडवा, महू, सारंगपुर, हसूद, सुजालपुर, खटेगांव, इक्ष्वर, पंढना, आस्त, बोरडा, नटेरन, इटारसी, इंदौर, उज्जैन दक्षिण, बैरसिया, खुरई और राजस्थान में मकराना, महानगर, नसीराबाद, गोगुंडा, सलुम्बर, झादौल, झलरा पट्टा, लडपुरा, बिवार, शाहपुरा, कपासन, बारी सदरी, सोजात, छोमू, रतनगढ़, आमेर जलासू, पुष्कर आमेर नार्थ, आमेर साउथ, जैतारण, चित्तौडग़ढ़, उदयपुर मौली, रामगंज मंडी, आसीनंद में चुनावी जनसभाएं की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 रैलियां राजस्थान में कीं। इस तरह नतीजापरक रैलियों के मामले में 69 फीसदी कामयाबी मिली। वहां भाजपा 25 सीटें जीतने में कामयाब रही। मुख्यमंत्री ने केवल हिंदुत्व व राम मंदिर का ही मुद्दा नहीं उठाया, उन्होंने विकास के सवाल भी उठाए। यूपी सरकार के काम के बारे में बताया और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने विकास के लिए इन राज्यों की सरकारों के काम की तारीफ की। उनकी रैलियों में खासी भीड़ भी जुटी। योगी की रैलियों में अली-बजरंगबली, हैदराबाद को भाग्य नगर करने, बजरंगबली को दलित बताने के सबसे अधिक भाषणों की देश और विदेश तक चर्चा रही।
वरिष्ठï पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सी. लाल का कहना है कि रैली वाली तमाम सीटें भाजपा जीत नहीं पाई लेकिन पांच राज्यों में योगी आदित्यनाथ के लिए आने व प्रचार करने से भाजपा के पक्ष में माहौल बना। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भाजपा की सरकार चली गई लेकिन वह विपक्ष के रूप में खासी मजबूत रही है। मध्य प्रदेश में तो करीब बराबरी का ही मुकाबला रहा और पांच सीटें कम आईं।
लखनऊ- केन्द्र और राज्यों के खिलाफ सत्ता विरोधी की लहर के बीच यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के लिए संकट मोचक बनकर उभरे हैं। यह हम नहीं, चार राज्यों में स्टार प्रचारक के तौर पर योगी आदित्यनाथ द्वारा 74 विधान सभा में की गई रैलियों में भाजपा को 51 सीटों पर मिली जीत के आंकड़े बयां कर रहे हैं। इसके साथ ही प्रचार रैलियों में की गई टिप्पणी भी देश और दुनिया में सुर्खियां बनी।
उल्लेखनीय है कि पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलांगाना और मिजोरम में हुए विधान सभा चुनाव में भाजपा को पराजय का सामना करना पड़ा है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकारें थी, जनता में नाराजगी भी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता की वजह से अधिकतर भाजपा शासित राज्यों में उनकी सभाओं के लिए भारी मांग थी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छत्तीसगढ़ में राजनंदगांव, मूंगेली, दंतेवाड़ा, वेल्तारा, जंजगीर चंपा, वैशाली नगर, कुरुद, भटपारा, मध्य प्रदेश में खंडवा, महू, सारंगपुर, हसूद, सुजालपुर, खटेगांव, इक्ष्वर, पंढना, आस्त, बोरडा, नटेरन, इटारसी, इंदौर, उज्जैन दक्षिण, बैरसिया, खुरई और राजस्थान में मकराना, महानगर, नसीराबाद, गोगुंडा, सलुम्बर, झादौल, झलरा पट्टा, लडपुरा, बिवार, शाहपुरा, कपासन, बारी सदरी, सोजात, छोमू, रतनगढ़, आमेर जलासू, पुष्कर आमेर नार्थ, आमेर साउथ, जैतारण, चित्तौडग़ढ़, उदयपुर मौली, रामगंज मंडी, आसीनंद में चुनावी जनसभाएं की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 26 रैलियां राजस्थान में कीं। इस तरह नतीजापरक रैलियों के मामले में 69 फीसदी कामयाबी मिली। वहां भाजपा 25 सीटें जीतने में कामयाब रही। मुख्यमंत्री ने केवल हिंदुत्व व राम मंदिर का ही मुद्दा नहीं उठाया, उन्होंने विकास के सवाल भी उठाए। यूपी सरकार के काम के बारे में बताया और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण पर आपत्ति जताई। उन्होंने विकास के लिए इन राज्यों की सरकारों के काम की तारीफ की। उनकी रैलियों में खासी भीड़ भी जुटी। योगी की रैलियों में अली-बजरंगबली, हैदराबाद को भाग्य नगर करने, बजरंगबली को दलित बताने के सबसे अधिक भाषणों की देश और विदेश तक चर्चा रही।
वरिष्ठï पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सी. लाल का कहना है कि रैली वाली तमाम सीटें भाजपा जीत नहीं पाई लेकिन पांच राज्यों में योगी आदित्यनाथ के लिए आने व प्रचार करने से भाजपा के पक्ष में माहौल बना। उन्होंने कहा कि इन राज्यों में भाजपा की सरकार चली गई लेकिन वह विपक्ष के रूप में खासी मजबूत रही है। मध्य प्रदेश में तो करीब बराबरी का ही मुकाबला रहा और पांच सीटें कम आईं।


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