सिद्धार्थनगर में स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण खुले में शौच मुक्त ;ओ0डी0एफ0 बनाये जाने की घोषणा कर अभिलेखीय कोरम तो पूरा कर दिया गयाए मग़र धरातल पर शौच मुक्त की हकीकत शासन की घोषणा से अलग ही कहानी बयां कर रही है। जनपद आगमन पर सरकार के मंत्री चेतन चौहान ने विभाग के फर्जी अभिलेखीय आंकड़े पर जनपद को ओडीएफ का दर्जा तो दे दिया मग़र जमीनी हकीकत घोषणा से परे है। शासन को गुमराह कर फर्जी आंकड़े की बाजीगरी में विभाग के जिम्मेदार अपना गला तो बचा लिया मग़र धरातल पर शौच मुक्त जनपद की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खुले में शौच मुक्त कराने के सपने पर विभाग के जिम्म्मेदारों ने पानी फेर दिया। जनपद के हर घर. घर शौचालय निर्माण कराने में भी खेल की शिकायतें सामने आई। हालांकि डीएम कुणाल सिल्कू ने भी शिकायत पर मातहतों को डांट लगाया था। और निर्देश दिया था कि शौचालय निर्माण में कोई शिकायत नही मिलनी चाहिए। बावजूद इसके शौचालय निर्माण का कार्य अपूर्ण रह गया और शासन को हकीकत से परे का आंकड़ा देकर पीठ थपथपा ली।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अन्तर्गत निर्गत इज्जत घरों के सापेक्ष 134976 इज्जत घरों को राज्य स्तर द्वारा अपू्रव किया गया है। जिसके सापेक्ष 109902 इज्जतघरों की जियो टैंकिग फोटो अपलोड किया गया है। इस प्रकार जनपद द्वारा 81ण्42 प्रतिशत इज्जत घरों की फोटो अपलोडिंग का कार्य पूर्ण है। जिला पंचायत राज अधिकारी ने बताया कि शेष छूटे हुए परिवारों का सर्वे का कार्य पूर्ण कर लिया गया है और फीडिंग भी हो गयी है । भारत सरकार को रिपोर्ट भी प्रेषित कर दिया है। वर्ष 2012 को हुए सर्वे के अनुसार कुल 259306 परिवार अंकित है जिन्हें इज्जत घरो से आच्छादित करते हुए जनपद सिद्धार्थनगर को बुधवार को खुले में शौच मुक्त घोषित किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अन्तर्गत 169990 लाभार्थियों को इज्जत घरों के निर्माण हेतु प्रोत्साहन धनराशि निर्गत की गयी है जिसे पूर्ण किया जा चुका है।
यह तो रहा विभागीय आंकड़ा मग़र धरातल पर शौचालय निर्माण की हकीकत आंकड़े से परे है। धरातल पर शौचालय निर्माण की हकीकत देखे तो अधिकांश तो जीर्ण शीर्ण हैं और कुछ शौचालय में भूसा, लकड़ी, बालू, अनुप्रयोग घरेलू सामग्री से पटा मिलेगा और जो शौचालय ठीक ठाक हैं जागरूकता की कमी में प्रयोग नही किये जाते। ऐसे में जनपद को शौच मुक्त की घोषणा केवल कागजी कोरम पूरा करता है। धरातल पर गाँवो के किनारे सड़को पर गन्दगी इस बात का प्रमाण है। उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो सदर विकास खण्ड के ग्राम जगदीशपुर में दर्जनों शौचालय निष्प्रयोज्य हैं। वही विकास खण्ड उस्का बाजार के सोहास दरम्यानी में भी दर्जनों शौचालय खण्डहर के रूप में तब्दील हैं। यह तो उदाहरण मात्र है। यही हाल जनपद के अधिकांश गाँवो का है। ऐसे में यह कहा जाना अनुचित नही होगा कि विभाग के आंकड़ो की बाजीगरी ने जनपद को शौच मुक्त का दर्जा दिला कर खूब वाहवाही बटोरी।
हालांकि भविष्य में शौचालय निर्माण की जांच हुई तो विभाग की पोल खुलने में देर नही लगेगी और वाहवाही बटोरने वाले जिम्मेदार क्या जवाब देंगे। इस बात को दरकिनार करते हुए हकीकत से परे आंकड़े देकर वाहवाही बटोरी और जनपद को शौच मुक्त बना दिया। जागरूक लोगों का कहना है कि भविष्य में जांच और कर्रवाई बाद की बात है। वर्तमान में तो वाहवाही बटोरी है चाहे फ़र्जी ही सही।


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