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Tuesday, November 13, 2018

पूर्ण मनोयोग से कर्तव्य निर्वहन देषभक्ति: डाॅ. बेगराज

समाज के प्रत्येक व्यक्ति का विकास किसी आम आदमी का सोंच नहीं हो सकता। अपने त्त्व्यिों का निर्वहन कम ही लोग सही ढ़ंग से कर पाते हैं। ग्रामीण अंचलों में रहकर समाज के निर्माण के लिए सतत प्रयासरत रहना अकल्पनीय है। 
उक्त बातें यूनाइटेड किंगडम आॅंफ टोंगा के कांमनवेल्थ वोकेषनल विष्वविद्यालय के डीन डाॅ बेगराज सिंह ने कही। डाॅ बेगराज जनपद के इटवा में सिद्धार्थ तथागत कला साहित्य संस्थान कें तत्वावधान में आयोजित ‘विष्व पटल पर हिन्दी’ विषयक संगोष्ठी तथा तथागत सृजन समारोह में उद्घाटनकर्ता के रूप में पधारे थे। रेडियन से कैंसर का इलाज के खोजकर्ता विष्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डाॅं सिंह ने अपने उद्घाटन सम्बोधन में कहीं। विष्व के एकमात्र होम्योपैथिक चिकित्सक डाॅ. भास्कर शर्मा जिनका नाम गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज है, अपने चिकित्सीय सेवा के साथ ही साथ हिन्दी सेवा के लिए जिस षिद्दत से लगे हैं वह उदाहरणीय है। एडीएम नोयडा डाॅ. शैलेन्द्र भाटिया ने भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विष्व में हिन्दी की वर्तमान स्थिति पर विस्तार से प्रकाष डाला। रूड़की के पूर्व प्राचार्य डाॅ. यागेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरूण’ ने भास्कर शर्मा के हिन्दी सेवा को उल्लेखनीय बताते हुए कहा कि यदि आम आदमी भी हिन्दी को इतनी ही सहजता और सरलता से अंगीकृत किया तो निष्चय ही हिन्दी का सूर्य चमकता रहेगा। शैली साहित्य समाज काठमाण्डू की अध्यक्ष डाॅ. मंजु श्री केसी प्रधान ने अपनी मातृभाषा नेपाली में बोलते हुए भी हिन्दी भाषा को महिमा मण्डित किया जो हिन्दी के प्रचार-प्रसार और विकास को बताने के लिए काफी है। केन्द्रीय विष्वविद्यालय हिमाचल प्रदेष के अतिथि प्रवक्ता हिन्दी डाॅ. रवि कुमार गौड़ ने विष्व पटल पर हिन्दी विषय पर चर्चा करते हुए बताया कि वर्तमान में अमेरिका, जापान, मांरीषस, फिजी, बंग्लादेष, नेपाल तथा न्यूजीलैण्ड आदि देषो से हिन्दी भाषा में पत्रिका का प्रकाषन हमारी मातृभाषा के लिए गौरव की बात है डाॅ. गौड़ ने डाॅ. भास्कर शर्मा पर दो विष्वविद्यालयों में शोध कराने की घोषणा भी कार्यक्रम में की। पूर्व ओ.एस.डी. मुख्यमंत्री उत्तराखंड डाॅ. गोपाल नारसन ने अपनी कवितामयी व्याख्यान से डाॅ. भास्कर शर्मा के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाष डाला। आसाम की साहित्यकार व अभिनेत्री सुश्री कमला तामाङ़ ने अपने हिन्दी प्रेम और डाॅ. शर्मा के समर्पण की चर्चा करते हुए कहा कि भविष्य में मै अहिन्दी आसाम में हिन्दी के दूत का कार्य करूॅगी जिसकी सीख मैंने विष्व में हिन्दी सेवा के राजदूत डाॅ. भास्कर शर्मा से ली है। जनपद के युवा लेखक व साहित्यकार डाॅ. चन्देष्वर यादव ने कहा कि डाॅ. भास्कर शर्मा ने एक ओर जहाॅ अपने चिकित्सीय सेवा से आमजन मानस को निरोगी बनाने का संकल्प लेकर स्वस्थ समाज की स्थापना में नया आयाम रचा है वहीं मातृभाषा हिन्दी के प्रति अपनी आस्था से भी विष्व पटल पर साहित्य के क्षेत्र में नई क्रान्ति ला दी है। इनके होम्योपैथिक चिकित्सा पद्धति एवं हिन्दी भाषा के प्रति असीम लगन का ही परिणाम है विष्व रिकार्ड का शतक और गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड। डाॅ. शर्मा को यदि भारत का सूर्य कहा जाय तो अतिष्योक्ति नहीं होगा। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में सुश्री कमला तामाङ़ के पुस्तक ‘अक्षर यात्रा’, डाॅ. भास्कर शर्मा की संपादित पुस्तक ‘डाॅ. राजेन्द्र परदेषी की चुनी हुयी कहानियाॅं’ सहित डाॅ. शर्मा की सोलह अन्य पुस्तकों का भी लोकार्पण हुआ। कार्यक्रम के तीसरे सत्र में विष्व प्रसिद्ध वैज्ञानिक डाॅ. बेगराज सिंह तथा पूर्व प्राचार्य रूड़की डाॅ. यागेन्द्र नाथ शर्मा ‘अरूण’ को अन्तर्राष्ट्रीय तथागत षिखर सम्मान दिया गया। डाॅ. अमरजीत कौके पटियाला, श्री केवल कुमार केवल जम्मू, श्री मुरलीधर पाण्डेय मुम्बई, श्री जनार्दन मिश्रा बिहार, डाॅ. गोपाल नारसन हरिद्वार, इंजी. षिवेन्द्र शर्मा इन्दौर म.प्र., डाॅ. चन्द्र सिंह तोमर मयंक देहरादून, सुश्री अनुराधा चंदेल ओस मिर्जापुर, सुश्री कुसुम भट्ट देहरादून, श्री कालीपद दास कोलकत्ता, सुश्री ललिता राव तमिलनाडु, रामकुमार पंडित क्षत्री, सुश्री ऋचा लुइटेल, विष्णु लाल कुमाल, सुश्री देवकी निरौला, सुश्री खगिन्द्रा खुसी तथा सुश्री आरति पोखेल नेपाल, श्रीमती धमबरी गुरूड़ तथा सप्तराज गुरूड़ भूटान, सुश्री कविता कर्मकार तथा सुश्री तुलिका चेतियासेन आसाम, सुश्री ममता अरसीकेरे कर्नाटक, सुश्री कमला तामाङ़ तथा सुभद्रा बन्जन सावाली दार्जीलिंग, अरूणा शुक्ला नादेड़ तथा राजेन्द्र सीताराम जी शुक्ला महाराष्ट्र, वर्षा सोलंकी गुजरात, डाॅ. इन्द्र सिंह ठाकुर तथा डाॅ. रवि कुमार गौड़ हिमाचल प्रदेष, श्रभ्मती चेतना उपाध्याय, एडवोकेट रेवतीरमण शर्मा तथा डाॅ0 राम अवतार शर्मा राजस्थान, प्रो. विनोद कुमार शर्मा, डाॅ. अरविन्द कुमार, डाॅ. सुरेन्द्र महतो तथा नीतू कुमारी नई दिल्ली, डाॅ. गयासुद्दीन बंग्लादेष, डाॅ. सुरेन्द्र गिरी, डाॅ. नाजरेथ सिंह तथा नजमुल हुसेन केरल, डाॅ. रेवती शुक्ला त्रिपुरा, प्रो. नीरज मिश्रा तथा डाॅ. सम्सुल्लाह नागालैण्ड, डाॅ. रेषमा पंजाब, डाॅ. देसाई जी तथा प्रो. चन्द्रमणि त्रिपाठी हरियाणा, प्रो. नरेष अग्रवाल गोवा, डाॅ. अजमल हुसेन पणजी, डाॅ. सुषील शर्मा झारखंड, डाॅ. रमेष सिंह लक्षदीप, डाॅ. सोनपा छत्तीसगढ़, डाॅ. सोम्या शुक्ला इंफाल आदि कुल 28 प्रदेष के 71 साहित्यकारों को अन्तर्राष्ट्रीय तथागत सृजन सम्मान 2018 से नवाजा गया। डाॅ. रमेष कुमार चैधरी दिल्ली, पं0 विभूतिधर द्विवेदी सिद्धार्थनगर तथा षिवानन्द तिवारी दिल्ली सहित कुल 18 साहित्यकारों को अन्तर्राष्ट्रीय तथागत विषिष्ट सृजन सम्मान 2018 दिया गया। गणेष प्रसाद सिंह, अनिरूद्ध मौर्य, सौरभ शुक्ला, संतोष सिंहानिया, राधेष्याम दूवे, सच्चिदानन्द मिश्र, राम सजीवन, तथा डाॅ. चन्द्रेष्वर यादव सहित कुल 11 साहित्यकारों को तथागत गौरव सम्मान दिया गया। मो. अयूब तथा मो. नसीम बलरामपुर, डाॅ. बखूराम चंदौली, रमेष चन्द्र निषाद, मनोज सिद्धार्थ (दलित चिंतक), अनिल सोनी, राम सुभग उपाध्याय, जमाल कुद्दूषी, इसरार अहमद तथा सत्येन्द्र शुक्ला सहित 14 लोगों को तथागत गौरव सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ डाॅ. बेगराज सिंह ने माॅ सरस्वती की प्रतिमा के सामने दीप प्रज्ज्वलन करके किया। हिन्दी एवं संस्कृति अधिकारी राजदूतावास काठमाण्डू नेपाल के डाॅ. रघुवीर शर्मा ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया।

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