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Tuesday, November 20, 2018

सिद्धार्थनगरजिले में तो ऐसे होगी सुरक्षित यातयात की कल्पना।


गिरधारी पाण्डेय की कलम से
सिद्दार्थनगर। 19 नवम्बर। यातायात माह में यातायात नियमों लेकर जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन द्वारा लोगों को जागरूक किया जा रहा है, तो वही कुछ चालक "हम तो डूबेंग सनम तुम को भी ले डूबेंग" की तर्ज पर नियमों को दरकिनार कर सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। जिससे वह खुद अपनी जान जोखिम में डालने के साथ ही दूसरों की जान के साथ खिलवाड़ करते हैं।हालांकि लोगों की लापरवाही के साथ साथ प्रशासन भी कम जिम्मेदार नही है।
       प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस सत्र में दुर्घटनाओं में लगभग सात दर्जन लोग काल के गाल में समा गए। इसके पीछे कही न कही जर्जर वाहन, बिना हेलमेट, ओवरलोडिंग, जर्जर सड़कों के साथ नियमों को ताक पर रखकर वाहनो का फर्राटे भरना माना जा सकता है। नवम्बर माह छोड़ दे तो वाहन चेकिंग अभियान पूरे साल ठंडे बस्ते में चला जाता है। इसके पीछे विभाग की संलिप्तता पर प्रश्न उठना लाजिमी है, अन्यथा सड़कों पर अनफिट और खटारा वाहन कैसे फर्राटा भरते? जबकि कई बार ऐसा हुआ है कि जर्जर वाहनों की वजह से यात्री दुर्घटना की चपेट में आ गये।
   सूत्रों की माने तो इसके एवज विभाग तय शुदा मोटी रकम वसूल करता है। खटारा सवारी वाहन की स्थिति पर गौर किया जाए तो दूसरों प्रदेश से अनफिट कर दिए गए वाहनों की संख्या अधिक मिलेगी, जो मुख्यालय से बाँसी, इटवा डुमरियागंज,बाँसी इटवा  रूट पर खटारा पर फर्राटे भरती हैं। इतना ही नही यहाँ मासूमों की जान के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूल वाहनों के फिटनेस की बात की जाए तो अधिकांश वाहन बिना परमिट और फिटनेस प्रमाण पत्र के फर्राटा भरते नौनिहालों के जान के साथ खिलवाड़ करना आम बात हो गई है। जल्द ही स्टेयरिंग फेल होने से एक स्कूल बस पलट गई थी, गनीमत रही कि सभी बच्चे सुरक्षित रहे। परिवहन विभाग एक तरफ जागरूकता अभियान चला रहा है तो दूसरी तरफ नियम को ताक पर रखने वालों को संरक्षण! ऐसे में तो यातायात नियमों का पालन करा पाना मुमकिन नहीं है। केवल जागरूकता अभियान से यातायात नियमों का पालन कराया जायेगा, या अनफिट, खटारा और बिना परमिट दौड़ रहे वाहनों पर नकेल भी कसा जायेगा। हा जागरूकता अभियान से दुर्घटनाओं को कुछ हद तक रोका जा सकता है, इसके अलावा खटारा वाहनों पर नकेल की आवश्यकता है, जिससे सुरक्षित यातयात की कल्पना की जा सके।

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