जनपद मुख्यालय पर जहां पिछले दिनों निजी अस्पतालों की जांच फायर सेफ्टी व अन्य सुरक्षा उपकरणों को लेकर पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्साधिकारी ने की वहीं उनमें मौजूद कमियों को शीघ्र दूर करने के लिये उन्हें चेतावनी भी दी।वहीं कुछ तथाकथित अस्पतालों पर उनकी निगाह नहीं पड़ी जिसे पहली नज़र में अस्पताल नहीं घर कहा जायेगा।उन्हीं में उसका रोड पर स्थिति एक अस्पताल ऐसा भी है जिसे अस्पताल का नाम देने का प्रयास किया गया है।हांलाकि इसमे कहीं भी अस्पताल जैसी कोई भी सुविधा नज़र नहीं आती है।जानकारी के मुताबिक यह तथाकथित अस्पताल पिछले कई माह से एक सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी और सर्जन की देख रेख में चल रहा है जहां रोगियों का आपरेशन भी किया जाता है।महीने में केवल पांच छः दिन आने वाले यह सर्जन रोगियों का आपरेशन करने के बाद चले जाते हैं और बाकी दिन रोगी भगवान भरोसे ही रहते हैं।हांलाकि दिखाने के लिये बाहर एक अन्य चिकित्सक का नाम लगा रखा है।प्रश्न यह उठता है जहां पिछले दिनों तमाम निजी अस्पतालों की जांच की गयी वहीं यह तथाकथित अस्पताल क्यों छोड़ दिया गया जबकि यह अस्पताल के मानक को किसी भी दृष्टि से पूरा भी नहीं करता है।चर्चा यह भी है कि चूंकि यहां आपरेशन एक सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी और सर्जन के द्वारा किया जाता है इसी कारण जनपद में आने वाला हर मुख्य चिकित्साधिकारी इस अस्पताल रूपी घर को जांचने की आवश्यकता नहीं समझता और अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखता है।ऐसे में इस तथाकथित अस्पताल पर सम्बंधित अधिकारियों की निगाह न पड़ना उनकी कार्य प्रणाली पर ही प्रश्न चिन्ह लगाता है।
जनपद मुख्यालय पर जहां पिछले दिनों निजी अस्पतालों की जांच फायर सेफ्टी व अन्य सुरक्षा उपकरणों को लेकर पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्साधिकारी ने की वहीं उनमें मौजूद कमियों को शीघ्र दूर करने के लिये उन्हें चेतावनी भी दी।वहीं कुछ तथाकथित अस्पतालों पर उनकी निगाह नहीं पड़ी जिसे पहली नज़र में अस्पताल नहीं घर कहा जायेगा।उन्हीं में उसका रोड पर स्थिति एक अस्पताल ऐसा भी है जिसे अस्पताल का नाम देने का प्रयास किया गया है।हांलाकि इसमे कहीं भी अस्पताल जैसी कोई भी सुविधा नज़र नहीं आती है।जानकारी के मुताबिक यह तथाकथित अस्पताल पिछले कई माह से एक सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी और सर्जन की देख रेख में चल रहा है जहां रोगियों का आपरेशन भी किया जाता है।महीने में केवल पांच छः दिन आने वाले यह सर्जन रोगियों का आपरेशन करने के बाद चले जाते हैं और बाकी दिन रोगी भगवान भरोसे ही रहते हैं।हांलाकि दिखाने के लिये बाहर एक अन्य चिकित्सक का नाम लगा रखा है।प्रश्न यह उठता है जहां पिछले दिनों तमाम निजी अस्पतालों की जांच की गयी वहीं यह तथाकथित अस्पताल क्यों छोड़ दिया गया जबकि यह अस्पताल के मानक को किसी भी दृष्टि से पूरा भी नहीं करता है।चर्चा यह भी है कि चूंकि यहां आपरेशन एक सेवानिवृत्त चिकित्साधिकारी और सर्जन के द्वारा किया जाता है इसी कारण जनपद में आने वाला हर मुख्य चिकित्साधिकारी इस अस्पताल रूपी घर को जांचने की आवश्यकता नहीं समझता और अपनी कृपा दृष्टि बनाये रखता है।ऐसे में इस तथाकथित अस्पताल पर सम्बंधित अधिकारियों की निगाह न पड़ना उनकी कार्य प्रणाली पर ही प्रश्न चिन्ह लगाता है।


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