शैलेष सोनकर की रिपोर्ट
न जांच की व्यवस्था न ऑपरेशन की, जिम्मेदारी आधा सैकड़ा गांवों की
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमोली चार-पांच दर्जन गांवों के हजारों मरीजों की एकमात्र उम्मीद पर पानी फेर रखा है इलाज के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाई जा रही है । चारों ओर अव्यवस्था का आलम है मरीजों को छोटी-छोटी जांचों व दवाइयों के लिए बाहर भटकना पड़ता है । बाहर की दवाइयां लिखना आम बात है जबकि अस्पताल में अस्पताल की दवाइयों को इस्तेमाल ना करने के कारण जला दिया जाता है एवं मरीजों को दी जा सकने वाली दवाइयां द्वितीय तल में बरामदे में धूल खा रही हैं।
गंदगी का आलम यह है चारों तरफ गुटखा मसाला पान की पीक से रंगीन दीवालें मिल जाएंगी। आवारा कुत्ते निर्भीक होकर इधर उधर विचरण करते हुए एवं जगह-जगह झुंड में सोते हुए मिल जाएंगे। जिन से बचते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान जाना पड़ता है। कभी-कभी तो मरीजों से ज्यादा कुत्ते नजर आते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 बेड की व्यवस्था है एवं सात डॉक्टर परमानेंट एवं छह संविदा कर्मचारी हैं । तीस बेड में ज्यादातर में चादरें नदारत मिलती हैं ।चारों तरफ गंदगी फैली हुई दिखती है। नए रजिस्टर जरूरी कागजात बरामदे में लापरवाह पड़े धूल खाते हुए स्वच्छ भारत मिशन पर अपने आंसू बहा रहे होते हैं और अंदर भी रजिस्टरों पर धूल की मोटी परत जमी रहती है। जगह-जगह जाले लगे हुए है। इमरजेंसी वार्ड में बिना गद्दे का स्टेचर एवं जहां गद्दे हैं वह भी गंदे एवं बदबूदार हैं। गर्मियों के दिनों में भी जनरेटर का इस्तेमाल नहीं होता है जबकि डॉक्टर सहित अस्पताल के कर्मचारी अपनी अपनी जगह पर इनवर्टर द्वारा पंखे का मजा लेते हैं। डॉ0 विमल चौरसिया के संरक्षण में यह सारी अव्यवस्थाएं फल-फूल रही हैं ।
किसी कर्मचारी को किसी भी प्रकार का सरकारी या प्रशासनिक भय नहीं है। मरीजों के प्रति लापरवाही एवं दुर्व्यवहार आम बात है। अस्पताल में जो सुविधाएं या मशीनें हैं उनका उपयोग नहीं किया जाता है। ज्यादातर जंग खा रही हैं। सामान्य खून की जांच सहित विभिन्न जांचें एक्स-रे आदि प्राइवेट बाहर से मरीज कराने को मजबूर होते हैं । डॉक्टरों का भी इंटरेस्ट मरीजों को बाहर रिफर करने में रहता है ताकि प्राइवेट सेंटरों से कमीशन द्वारा कमाई की जा सके।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूताओं के परिवारीजनों का भरपूर शोषण होता है मनमाने ढंग से पैसा वसूला जाता है ना मिलने पर प्रताड़ित किया जाता है और बहाने बनाते हुए बाहर रेफर कर दिया जाता है जिससे जच्चा बच्चे की जान खतरे में पड़ जाती है अक्सर जच्चा की जान खतरे में व हाल के दिनों में नवजात शिशुओं की मौत इन्हीं अव्यवस्थाओं के चलते हो रही है । अभी रविवार की रात चांदपुर के पास रेंगना गांव निवासी लीलावती पत्नी हरिश्चंद्र प्रसव पीड़ा के उपरांत सीएचसी अमौली आई वहां उपस्थित स्टाफ नर्स सारिका ने 1000रुपए सुविधा शुल्क मांगे ना देने पर जिला अस्पताल चले जाने को कहा जिससे उक्त महिला का अस्पताल गेट पर ही प्रसव हो गया। एंबुलेंस वाले मरीज को लाने और ले जाने पर सुविधा शुल्क वसूल करते हैं।वहां उपस्थित स्टाफ से इस बारे में जानकारी ले जाने पर वह केंद्र प्रभारी के बिना कोई जानकारी ना देने के लिए कहती है जो यह साबित करता है कि यह सारी अव्यवस्थाएं मरीजों के शोषण का धंधा डॉ विमल चौरसिया की देखरेख में ही फल-फूल रहा हैं ।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किसी भी प्रकार के छोटे-मोटे ऑपरेशन की सुविधा ऑपरेशन थिएटर होने के बावजूद भी मरीजों को नहीं मिल पाती है क्योंकि ऑपरेशन थिएटर का उपयोग ही नहीं किया जाता है । यहां डॉक्टर ना तो कभी भी समय से आते हैं और ना ही सभी डॉक्टर एक साथ उपस्थित मिलते हैं इसका कारण समस्त डॉक्टर स्टाफ का नगरों और महानगरों से प्रतिदिन आना जाना करने के कारण है।कानपुर में इन डॉक्टरों के निजी क्लीनिक में वहां पर बने नर्सिंग होमो मैं निजी प्रैक्टिस करने की वजह से यह डॉक्टर प्रतिदिन कानपुर से आते जाते हैं जिसके कारण मरीजों को हमीरपुर कानपुर जाकर इलाज कराना पड़ता है।यमुना व नोन नदी के किनारे पर बसे लगभग चार दर्जन से अधिक गांव की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यह सीएचसी बनाई गई है किंतु नकारा साबित हो कर यहां के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मात्र ठगा जा रहा है।
इन सारी वास्तविकताओं से इतर डॉक्टर विमल चौरसिया ने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर जिले में अपने अस्पताल को एक नंबर का साबित करके इनाम भी ले रखा है । जबकि सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि यहां गंदगी और अव्यवस्थाओं का बोलबाला है ग्रामीण एवं तिरहर की भोली-भाली जनता जो इसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आश्रित है उसे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है एवं इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों की लापरवाही व उदासीनता के चलते यहां के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा गरीबों को सस्ती व सहजता से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए जाने का जो ढिंढोरा पीटा जा रहा है वह अमौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पूरी तरह से नकारा साबित हो कर मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा कर अपनी जिंदगी जोखिम में डालना पड़ रहा है। इस संबंध में 29 जून को उपरोक्त सारी पड़ताल की गई तो यह समस्त कमियां उजागर हुई । जब प्रभारी डॉक्टर विमल चौरसिया सी0एच0सी0 में मौके में न मिलने से फ़ोन से बात करने का प्रयास किया गया तो दसियों बार फोन करने के बावजूद उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। सीएससी के निर्माण के समय से आसपास के दर्जनों गांव के मरीजों की उम्मीद बड़ी थी कि अब स्वास्थ्य सेवाएं सही और समय पर उपलब्ध होंगी पर धीरे-धीरे उनकी उम्मीदें धराशाई होती गई । सीएससी अमोली का आदर्श वाक्य "सुविधा शुल्क लाओ इलाज कराओ वरना अपने घर जाओ।" सीएससी अमोली स्वास्थ विभाग के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।
न जांच की व्यवस्था न ऑपरेशन की, जिम्मेदारी आधा सैकड़ा गांवों की
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमोली चार-पांच दर्जन गांवों के हजारों मरीजों की एकमात्र उम्मीद पर पानी फेर रखा है इलाज के नाम पर मात्र औपचारिकता निभाई जा रही है । चारों ओर अव्यवस्था का आलम है मरीजों को छोटी-छोटी जांचों व दवाइयों के लिए बाहर भटकना पड़ता है । बाहर की दवाइयां लिखना आम बात है जबकि अस्पताल में अस्पताल की दवाइयों को इस्तेमाल ना करने के कारण जला दिया जाता है एवं मरीजों को दी जा सकने वाली दवाइयां द्वितीय तल में बरामदे में धूल खा रही हैं।
गंदगी का आलम यह है चारों तरफ गुटखा मसाला पान की पीक से रंगीन दीवालें मिल जाएंगी। आवारा कुत्ते निर्भीक होकर इधर उधर विचरण करते हुए एवं जगह-जगह झुंड में सोते हुए मिल जाएंगे। जिन से बचते हुए एक स्थान से दूसरे स्थान जाना पड़ता है। कभी-कभी तो मरीजों से ज्यादा कुत्ते नजर आते हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 30 बेड की व्यवस्था है एवं सात डॉक्टर परमानेंट एवं छह संविदा कर्मचारी हैं । तीस बेड में ज्यादातर में चादरें नदारत मिलती हैं ।चारों तरफ गंदगी फैली हुई दिखती है। नए रजिस्टर जरूरी कागजात बरामदे में लापरवाह पड़े धूल खाते हुए स्वच्छ भारत मिशन पर अपने आंसू बहा रहे होते हैं और अंदर भी रजिस्टरों पर धूल की मोटी परत जमी रहती है। जगह-जगह जाले लगे हुए है। इमरजेंसी वार्ड में बिना गद्दे का स्टेचर एवं जहां गद्दे हैं वह भी गंदे एवं बदबूदार हैं। गर्मियों के दिनों में भी जनरेटर का इस्तेमाल नहीं होता है जबकि डॉक्टर सहित अस्पताल के कर्मचारी अपनी अपनी जगह पर इनवर्टर द्वारा पंखे का मजा लेते हैं। डॉ0 विमल चौरसिया के संरक्षण में यह सारी अव्यवस्थाएं फल-फूल रही हैं ।
किसी कर्मचारी को किसी भी प्रकार का सरकारी या प्रशासनिक भय नहीं है। मरीजों के प्रति लापरवाही एवं दुर्व्यवहार आम बात है। अस्पताल में जो सुविधाएं या मशीनें हैं उनका उपयोग नहीं किया जाता है। ज्यादातर जंग खा रही हैं। सामान्य खून की जांच सहित विभिन्न जांचें एक्स-रे आदि प्राइवेट बाहर से मरीज कराने को मजबूर होते हैं । डॉक्टरों का भी इंटरेस्ट मरीजों को बाहर रिफर करने में रहता है ताकि प्राइवेट सेंटरों से कमीशन द्वारा कमाई की जा सके।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसूताओं के परिवारीजनों का भरपूर शोषण होता है मनमाने ढंग से पैसा वसूला जाता है ना मिलने पर प्रताड़ित किया जाता है और बहाने बनाते हुए बाहर रेफर कर दिया जाता है जिससे जच्चा बच्चे की जान खतरे में पड़ जाती है अक्सर जच्चा की जान खतरे में व हाल के दिनों में नवजात शिशुओं की मौत इन्हीं अव्यवस्थाओं के चलते हो रही है । अभी रविवार की रात चांदपुर के पास रेंगना गांव निवासी लीलावती पत्नी हरिश्चंद्र प्रसव पीड़ा के उपरांत सीएचसी अमौली आई वहां उपस्थित स्टाफ नर्स सारिका ने 1000रुपए सुविधा शुल्क मांगे ना देने पर जिला अस्पताल चले जाने को कहा जिससे उक्त महिला का अस्पताल गेट पर ही प्रसव हो गया। एंबुलेंस वाले मरीज को लाने और ले जाने पर सुविधा शुल्क वसूल करते हैं।वहां उपस्थित स्टाफ से इस बारे में जानकारी ले जाने पर वह केंद्र प्रभारी के बिना कोई जानकारी ना देने के लिए कहती है जो यह साबित करता है कि यह सारी अव्यवस्थाएं मरीजों के शोषण का धंधा डॉ विमल चौरसिया की देखरेख में ही फल-फूल रहा हैं ।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किसी भी प्रकार के छोटे-मोटे ऑपरेशन की सुविधा ऑपरेशन थिएटर होने के बावजूद भी मरीजों को नहीं मिल पाती है क्योंकि ऑपरेशन थिएटर का उपयोग ही नहीं किया जाता है । यहां डॉक्टर ना तो कभी भी समय से आते हैं और ना ही सभी डॉक्टर एक साथ उपस्थित मिलते हैं इसका कारण समस्त डॉक्टर स्टाफ का नगरों और महानगरों से प्रतिदिन आना जाना करने के कारण है।कानपुर में इन डॉक्टरों के निजी क्लीनिक में वहां पर बने नर्सिंग होमो मैं निजी प्रैक्टिस करने की वजह से यह डॉक्टर प्रतिदिन कानपुर से आते जाते हैं जिसके कारण मरीजों को हमीरपुर कानपुर जाकर इलाज कराना पड़ता है।यमुना व नोन नदी के किनारे पर बसे लगभग चार दर्जन से अधिक गांव की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए यह सीएचसी बनाई गई है किंतु नकारा साबित हो कर यहां के लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर मात्र ठगा जा रहा है।
इन सारी वास्तविकताओं से इतर डॉक्टर विमल चौरसिया ने अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर जिले में अपने अस्पताल को एक नंबर का साबित करके इनाम भी ले रखा है । जबकि सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि यहां गंदगी और अव्यवस्थाओं का बोलबाला है ग्रामीण एवं तिरहर की भोली-भाली जनता जो इसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आश्रित है उसे भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है एवं इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टरों की लापरवाही व उदासीनता के चलते यहां के मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा गरीबों को सस्ती व सहजता से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराए जाने का जो ढिंढोरा पीटा जा रहा है वह अमौली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पूरी तरह से नकारा साबित हो कर मरीजों को झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज करा कर अपनी जिंदगी जोखिम में डालना पड़ रहा है। इस संबंध में 29 जून को उपरोक्त सारी पड़ताल की गई तो यह समस्त कमियां उजागर हुई । जब प्रभारी डॉक्टर विमल चौरसिया सी0एच0सी0 में मौके में न मिलने से फ़ोन से बात करने का प्रयास किया गया तो दसियों बार फोन करने के बावजूद उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। सीएससी के निर्माण के समय से आसपास के दर्जनों गांव के मरीजों की उम्मीद बड़ी थी कि अब स्वास्थ्य सेवाएं सही और समय पर उपलब्ध होंगी पर धीरे-धीरे उनकी उम्मीदें धराशाई होती गई । सीएससी अमोली का आदर्श वाक्य "सुविधा शुल्क लाओ इलाज कराओ वरना अपने घर जाओ।" सीएससी अमोली स्वास्थ विभाग के लिए सफेद हाथी साबित हो रहा है।




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