सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने वाले किसानों को बीमा कम्पनी से अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं मिला है। ऐसे में किसानों का आय दो गुना करने का दावा खोखला साबित हो रहा है।
उक्त बातें अर्जक संघ के पूर्व जिला संयोजक रवि प्रताप चैधरी ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने आगे कहा कि जिले में वर्ष 2017 में भीषण बाढ़ आयी थी। मेरूण्ड गांव में किसानों को बीमा कंपनियों द्वारा क्षतिपूर्ति न देना यह साबित करता है कि सरकार किसानों के प्रति कितना जागरुक है। सरकार का यह दावा खोखला साबित हो रहा है। एक तरफ जहां केन्द्र और प्रदेश सरकार किसानों की आय दो गुनी करने की बात कह रही है। वहीं पर जिला प्रशासन द्वारा बीमा कंपनियों की जो लिस्ट जारी की गई है। उसमें पीड़ित किसानों के सापेक्ष बीस प्रतिशत किसानों को बीमा का लाभ मिला है। जबकि पूरे जिले में 421 गांव मेरूण्ड हुए थे और लगभग 700 गांव प्रभावित हुए थे। इसके सापेक्ष बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को क्षतिपूर्ति न देना शासन व प्रशासन की घोर लापरवाही का परिचायक है।
उन्होंने आगे कहा कि मेरूण्ड गांव में शासकीय बाढ़ सहायता के नाम पर जिला प्रशासन एवं तहसील प्रशासन द्वारा उदासीनता की गयी है। शासन का प्राविधान है कि प्रत्येक किसान को दो हेक्टेयर फसल की क्षतिपूर्ति दी जाय। चाहे उसका दो हेक्टेयर से अधिक फसल नुकसान हुआ हो। परन्तु लगभग सत्तर प्रतिशत किसानों को एक हेक्टेयर खेत पर तेरह हजार पांच सौ रू. दिया गया है। लगभग तीस प्रतिशत किसानों को दो हेक्टेयर फसल की क्षतिपूर्ति मिला है। यह भी एक जांच का विषय है।
केन्द्र एवं प्रदेश सरकार किसानों का हितैषी होने का दावा करती है। परंतु जमीनी हकीकत कुछ और है। क्या इसी प्रकार किसानों का आय दो गुना होगा। यह एक सपने जैसा है। इससे यह साबित होता है कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। परंतु किसानों की हालत इससे परे है। किसानों की आय दो गुना करने के नाम पर जगह-जगह चैपाल लगाया जा रहा है। वह केवल दिखाया है।
गत वर्ष 2017 में बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड पर किसानों से बीमा करने के लिए धनराशि लिया गया था। परंतु मेरूण्ड गांव के किसानों को क्षतिपूर्ति नहीं दिया गया। इसका उदाहरण हरिबंधनपुर के गंगोत्री प्रसाद, शुभकरन चैधरी, आरती देवी, राधिका देवी, लड्डू चैधरी, मुड़िलिया के सुशील तिवारी, पतीला के विशम्भर चैधरी, जैसे अनेक किसान हैं जिनको अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं मिला।
इस सम्बंध में बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एरिया मैनेजर विपिन मिश्रा ने बताया कि शासन द्वारा जो लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। उसका लगभग तेरह हजार पांच सौ करोड रुपया बैंक को दे दिया गया है। यह पैसा मई माह के अन्तिम तथा जून माह के पहले सप्ताह तक बैंको को भेजा गया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराने वाले किसानों को बीमा कम्पनी से अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं मिला है। ऐसे में किसानों का आय दो गुना करने का दावा खोखला साबित हो रहा है।
उक्त बातें अर्जक संघ के पूर्व जिला संयोजक रवि प्रताप चैधरी ने शनिवार को पत्रकार वार्ता में कही। उन्होंने आगे कहा कि जिले में वर्ष 2017 में भीषण बाढ़ आयी थी। मेरूण्ड गांव में किसानों को बीमा कंपनियों द्वारा क्षतिपूर्ति न देना यह साबित करता है कि सरकार किसानों के प्रति कितना जागरुक है। सरकार का यह दावा खोखला साबित हो रहा है। एक तरफ जहां केन्द्र और प्रदेश सरकार किसानों की आय दो गुनी करने की बात कह रही है। वहीं पर जिला प्रशासन द्वारा बीमा कंपनियों की जो लिस्ट जारी की गई है। उसमें पीड़ित किसानों के सापेक्ष बीस प्रतिशत किसानों को बीमा का लाभ मिला है। जबकि पूरे जिले में 421 गांव मेरूण्ड हुए थे और लगभग 700 गांव प्रभावित हुए थे। इसके सापेक्ष बीमा कंपनियों द्वारा किसानों को क्षतिपूर्ति न देना शासन व प्रशासन की घोर लापरवाही का परिचायक है।
उन्होंने आगे कहा कि मेरूण्ड गांव में शासकीय बाढ़ सहायता के नाम पर जिला प्रशासन एवं तहसील प्रशासन द्वारा उदासीनता की गयी है। शासन का प्राविधान है कि प्रत्येक किसान को दो हेक्टेयर फसल की क्षतिपूर्ति दी जाय। चाहे उसका दो हेक्टेयर से अधिक फसल नुकसान हुआ हो। परन्तु लगभग सत्तर प्रतिशत किसानों को एक हेक्टेयर खेत पर तेरह हजार पांच सौ रू. दिया गया है। लगभग तीस प्रतिशत किसानों को दो हेक्टेयर फसल की क्षतिपूर्ति मिला है। यह भी एक जांच का विषय है।
केन्द्र एवं प्रदेश सरकार किसानों का हितैषी होने का दावा करती है। परंतु जमीनी हकीकत कुछ और है। क्या इसी प्रकार किसानों का आय दो गुना होगा। यह एक सपने जैसा है। इससे यह साबित होता है कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार किसानों को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। परंतु किसानों की हालत इससे परे है। किसानों की आय दो गुना करने के नाम पर जगह-जगह चैपाल लगाया जा रहा है। वह केवल दिखाया है।
गत वर्ष 2017 में बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड पर किसानों से बीमा करने के लिए धनराशि लिया गया था। परंतु मेरूण्ड गांव के किसानों को क्षतिपूर्ति नहीं दिया गया। इसका उदाहरण हरिबंधनपुर के गंगोत्री प्रसाद, शुभकरन चैधरी, आरती देवी, राधिका देवी, लड्डू चैधरी, मुड़िलिया के सुशील तिवारी, पतीला के विशम्भर चैधरी, जैसे अनेक किसान हैं जिनको अभी तक क्षतिपूर्ति नहीं मिला।
इस सम्बंध में बजाज एलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के एरिया मैनेजर विपिन मिश्रा ने बताया कि शासन द्वारा जो लिस्ट उपलब्ध कराई गई है। उसका लगभग तेरह हजार पांच सौ करोड रुपया बैंक को दे दिया गया है। यह पैसा मई माह के अन्तिम तथा जून माह के पहले सप्ताह तक बैंको को भेजा गया है।

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