शैलेष सोनकर की रिपोर्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'फिटनेस वीडियो' वायरल होकर पुराना हो चुका है पर इस पर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. विवाद भी आमने सामने नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसे पूरा देश देख रहा है. यह विवाद है कांग्रेस नेता शशि थरूर और सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के बीच.
दरअसल थरूर ने एक खबर का हवाला देते हुए वीडियो पर 35 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया तो राठौड़ ने कहा कि इस पर कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है.कांग्रेस सांसद ने ट्वीट किया, 'योग दिवस के मौके पर विज्ञापनों पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए, प्रधानमंत्री के फिटनेस वीडियो पर 35 लाख रुपये खर्च हुआ. इस सरकार में उम्मीद की जगह हव्वा तैयार किया जाता है. उम्मीदों को इन्होंने बर्बाद कर दिया है.'
इस पर राठौड़ ने कहा, 'श्री थरूर, झूठ आपके लिए तथ्यों का विकल्प बन गया है. प्रधानमंत्री के वीडियो पर कोई पैसा खर्च नहीं किया गया. यह प्रधानमंत्री कार्यालय के वीडियोग्राफर द्वारा रिकॉर्ड किया गया. इस पर थरूर ने कहा कि यह सुनकर उन्हें खुशी हुई कि वीडियो पर पैसा खर्च नहीं किया गया, लेकिन इस सरकार ने उपलब्धि के नाम पर दिए गए विज्ञापनों के लिए करदाताओं के 20 करोड़ रुपये खर्च कर दिए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'फिटनेस वीडियो' वायरल होकर पुराना हो चुका है पर इस पर विवादों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. विवाद भी आमने सामने नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर चल रहा है, जिसे पूरा देश देख रहा है. यह विवाद है कांग्रेस नेता शशि थरूर और सूचना एवं प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के बीच.
दरअसल थरूर ने एक खबर का हवाला देते हुए वीडियो पर 35 लाख रुपये खर्च होने का दावा किया तो राठौड़ ने कहा कि इस पर कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है.कांग्रेस सांसद ने ट्वीट किया, 'योग दिवस के मौके पर विज्ञापनों पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए, प्रधानमंत्री के फिटनेस वीडियो पर 35 लाख रुपये खर्च हुआ. इस सरकार में उम्मीद की जगह हव्वा तैयार किया जाता है. उम्मीदों को इन्होंने बर्बाद कर दिया है.'
इस पर राठौड़ ने कहा, 'श्री थरूर, झूठ आपके लिए तथ्यों का विकल्प बन गया है. प्रधानमंत्री के वीडियो पर कोई पैसा खर्च नहीं किया गया. यह प्रधानमंत्री कार्यालय के वीडियोग्राफर द्वारा रिकॉर्ड किया गया. इस पर थरूर ने कहा कि यह सुनकर उन्हें खुशी हुई कि वीडियो पर पैसा खर्च नहीं किया गया, लेकिन इस सरकार ने उपलब्धि के नाम पर दिए गए विज्ञापनों के लिए करदाताओं के 20 करोड़ रुपये खर्च कर दिए.


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