प्रभुनाथ बाबा के दर्शन को भारत से नेपाल में प्रतिदिन भारी संख्या में रवाना हो रहे श्रद्धालु
पवन कुमार यादव की रिपोर्ट
बढ़नी (सिद्धार्थनगर ) जब भारत देश से नेपाल राष्ट् पहुचेंगे तब नेपाल के किसी भी बॉर्डर से चाहे बढ़नी , नेपालगंज, खुनुआ ,सौनोली पहुँच जाने बाद उस स्थान से बस द्वारा घोराही बाजार अथवा दांग जिला नेपाल का रमणीय स्थान है यहां आप को दर्शन लायक तीन अधभुत अलौकिक रमणीय धार्मिक स्थान है । पहला घोराही के पूर्ब में स्थित रतननाथ बाबा का मन्दिर है दूसरा घोराही के उत्तर में माँ अम्बीकेशरी माता का मन्दिर है तथा तीसरा घोराही के पश्चिम दिशा में स्थित बाबा ब्रहोदेव का मन्दिर है यहाँ दर्शन करने के बाद देवालय में रुकने का भी व्यवस्था भी है उसके बाद यदि आप पैदल आप जाना चाहते है तो आप को दो दिन भी लग सकता है रास्ते में खाने पीने एंव धर्मशाले की भी व्यवस्था है ।
अगर आप शाधन द्वारा जाना चाहते है तो घोराही बाजार से बस स्टेशन पहूँचने पर वहा सुबह सात बजे पहला बस तथा दूसरा बस नो बजे बजे मिलेगा परन्तु उसके बाद कोई बस बाबा प्रभुनाथ स्वर्गद्वारी तक जाने का नही मिलेगा फिर आप को दूसरे दिन का इंतज़ार करना पड़ेगा बस का मार्ग नेपाल सरकार ने बहुत कोशिशो के बाद डायर करने का वादा किया था वर्तमान समय में कच्ची है ।
प्रभुनाथ बाबा के यहां वर्ष् में पांच बार मेला लगता है पहला मेला वैशाख माह में बुद्ध पूर्णिमा को दिन में आषाढ़ पूर्णिमा तक दो महीना मेला लगता है जिसमे विभिन्न देशो के कोने कोने से श्रदालुगण एव् भक्तजन बाबा प्रभुनाथ दर्शन के लिये आते है साल का दूसरा मेला सावन माह में पड़ने वाला पुत्रदा एकादशी के दिन प्रारम्भ होकर भाद्र महीना की पूर्णिमा तक चलता है इस समय मेले में जाने वाले श्रद्धालु अधिकांशत : गोरखपुर ,देवरिया ,महाराजगंज ,पडरौना ,सिद्धार्थनगर ,गोंडा,बस्ती ,श्रावस्ती , अयोध्या एव सम्पूर्ण भारत से पूरी आस्था के साथ पहुचते है साल का तीसरा मेला दीपावली के दिन भैया दूज तक होता है यहा पर भारत के भक्तजनो की अपेछा नेपाल के भक्तजन एव् श्रद्धालुओ की संख्या अधिक होती है । साल का चौथा मेला पौष महीने से शूरू होता है ।जिसमे ज्यादातर भक्तगण श्रावस्ती ,भिन्गा ,बहराइच ,नानपारा ,सीतापुर , लखनऊ ,बाराबंकी ,रूपईडीह ,आदि जगहों से आते है साल का पाँचवा मेला तेरस महाशिवरात्रि के दिन लगता है ।
कहा जाता है की महाभारत काल में पांडवो द्वारा इसी पावन भूमि पर यज्ञ करने के बाद प्रस्थान किया था स्वर्ग का द्वार यानी स्वर्गद्वारा बाबा प्रभुनाथ का दर्शन करने के बाद स्वर्ग में जगह मिलने का विस्वास किया जाता है शायद इसीलिए श्रद्धालु पूरी आस्था और विस्वास के साथ मंदिर की तरफ खिंचे चले जाते है ।
पवन कुमार यादव की रिपोर्ट
बढ़नी (सिद्धार्थनगर ) जब भारत देश से नेपाल राष्ट् पहुचेंगे तब नेपाल के किसी भी बॉर्डर से चाहे बढ़नी , नेपालगंज, खुनुआ ,सौनोली पहुँच जाने बाद उस स्थान से बस द्वारा घोराही बाजार अथवा दांग जिला नेपाल का रमणीय स्थान है यहां आप को दर्शन लायक तीन अधभुत अलौकिक रमणीय धार्मिक स्थान है । पहला घोराही के पूर्ब में स्थित रतननाथ बाबा का मन्दिर है दूसरा घोराही के उत्तर में माँ अम्बीकेशरी माता का मन्दिर है तथा तीसरा घोराही के पश्चिम दिशा में स्थित बाबा ब्रहोदेव का मन्दिर है यहाँ दर्शन करने के बाद देवालय में रुकने का भी व्यवस्था भी है उसके बाद यदि आप पैदल आप जाना चाहते है तो आप को दो दिन भी लग सकता है रास्ते में खाने पीने एंव धर्मशाले की भी व्यवस्था है ।
अगर आप शाधन द्वारा जाना चाहते है तो घोराही बाजार से बस स्टेशन पहूँचने पर वहा सुबह सात बजे पहला बस तथा दूसरा बस नो बजे बजे मिलेगा परन्तु उसके बाद कोई बस बाबा प्रभुनाथ स्वर्गद्वारी तक जाने का नही मिलेगा फिर आप को दूसरे दिन का इंतज़ार करना पड़ेगा बस का मार्ग नेपाल सरकार ने बहुत कोशिशो के बाद डायर करने का वादा किया था वर्तमान समय में कच्ची है ।
प्रभुनाथ बाबा के यहां वर्ष् में पांच बार मेला लगता है पहला मेला वैशाख माह में बुद्ध पूर्णिमा को दिन में आषाढ़ पूर्णिमा तक दो महीना मेला लगता है जिसमे विभिन्न देशो के कोने कोने से श्रदालुगण एव् भक्तजन बाबा प्रभुनाथ दर्शन के लिये आते है साल का दूसरा मेला सावन माह में पड़ने वाला पुत्रदा एकादशी के दिन प्रारम्भ होकर भाद्र महीना की पूर्णिमा तक चलता है इस समय मेले में जाने वाले श्रद्धालु अधिकांशत : गोरखपुर ,देवरिया ,महाराजगंज ,पडरौना ,सिद्धार्थनगर ,गोंडा,बस्ती ,श्रावस्ती , अयोध्या एव सम्पूर्ण भारत से पूरी आस्था के साथ पहुचते है साल का तीसरा मेला दीपावली के दिन भैया दूज तक होता है यहा पर भारत के भक्तजनो की अपेछा नेपाल के भक्तजन एव् श्रद्धालुओ की संख्या अधिक होती है । साल का चौथा मेला पौष महीने से शूरू होता है ।जिसमे ज्यादातर भक्तगण श्रावस्ती ,भिन्गा ,बहराइच ,नानपारा ,सीतापुर , लखनऊ ,बाराबंकी ,रूपईडीह ,आदि जगहों से आते है साल का पाँचवा मेला तेरस महाशिवरात्रि के दिन लगता है ।
कहा जाता है की महाभारत काल में पांडवो द्वारा इसी पावन भूमि पर यज्ञ करने के बाद प्रस्थान किया था स्वर्ग का द्वार यानी स्वर्गद्वारा बाबा प्रभुनाथ का दर्शन करने के बाद स्वर्ग में जगह मिलने का विस्वास किया जाता है शायद इसीलिए श्रद्धालु पूरी आस्था और विस्वास के साथ मंदिर की तरफ खिंचे चले जाते है ।


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