सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
शोहरतगढ़ /सिद्धार्थनगर-कोटिया बाजार चौराहे के समीप वर्षो से लग रहे मछली मंडी से उठ रही गंदगी से नागरिक परेशान हैं। उनका कहना है कि मार्किट के बाहर मछली मंडी की व्यवस्था किए जाने के बाद भी मुख्य मार्ग पर मनमानी तरीके से मछली मंडी बना दिया गया है जिससे आवागमन प्रभावित होता है। समीप में कूड़े का ढेर लगा हुआ है, जिसकी कभी सफाई नहीं की जाती।
बाजार के सर्वाधिक व्यस्त चौराहे के समीप मछली मंडी से उठ रही दुर्गंध से नागरिक परेशान हैं। यही हाल गणेशपुर चौराहा, का भी है। यहां दोपहर के बाद से ही सड़क की पटरियों पर मछली व मांस की दुकानें सज जाती है। इसके शौकीन खरीदारी कर चलते बनते हैं। जबकि गंदगी सड़क के किनारे छोड़कर कारोबारी भी घर रास्ता नाप लेते हैं। एक तरफ आने जाने वाले लोगों को इनकी सड़क व बदबू के चलते उन्हें नाक दाब कर जाना पड़ता है। इसके बावजूद विभाग को कोई जिम्मेदार आगे नहीं आता। नागरिकों ने इस समस्या को लेकर दर्जनों बार तहसील दिवस से लेकर ग्राम प्रधान से इसकी शिकायत की गई। फिर भी जिम्मेदारों ने समस्या का समाधान कर पाने में किसी प्रकार रुचि नहीं दिखायी। जबकि सबसे अहम समस्या यहां पर मछली बाजार की है। इनका निश्चित स्थानं होने के बाउजूद ये बीच चौराहे पर अपनी मीट मछली की दुकाने सजाते है। नागरिक दीनानाथ अशोक भूज, राकेश मोदनवाल, राकेश मौर्या, सीताराम चौरसिया आदि ने बताया कि मछली और मीट के खुले स्थान पर बिक्री से सड़क पर पसरी गंदगी के चलते इन रास्तों से गुजरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
शोहरतगढ़ /सिद्धार्थनगर-कोटिया बाजार चौराहे के समीप वर्षो से लग रहे मछली मंडी से उठ रही गंदगी से नागरिक परेशान हैं। उनका कहना है कि मार्किट के बाहर मछली मंडी की व्यवस्था किए जाने के बाद भी मुख्य मार्ग पर मनमानी तरीके से मछली मंडी बना दिया गया है जिससे आवागमन प्रभावित होता है। समीप में कूड़े का ढेर लगा हुआ है, जिसकी कभी सफाई नहीं की जाती।
बाजार के सर्वाधिक व्यस्त चौराहे के समीप मछली मंडी से उठ रही दुर्गंध से नागरिक परेशान हैं। यही हाल गणेशपुर चौराहा, का भी है। यहां दोपहर के बाद से ही सड़क की पटरियों पर मछली व मांस की दुकानें सज जाती है। इसके शौकीन खरीदारी कर चलते बनते हैं। जबकि गंदगी सड़क के किनारे छोड़कर कारोबारी भी घर रास्ता नाप लेते हैं। एक तरफ आने जाने वाले लोगों को इनकी सड़क व बदबू के चलते उन्हें नाक दाब कर जाना पड़ता है। इसके बावजूद विभाग को कोई जिम्मेदार आगे नहीं आता। नागरिकों ने इस समस्या को लेकर दर्जनों बार तहसील दिवस से लेकर ग्राम प्रधान से इसकी शिकायत की गई। फिर भी जिम्मेदारों ने समस्या का समाधान कर पाने में किसी प्रकार रुचि नहीं दिखायी। जबकि सबसे अहम समस्या यहां पर मछली बाजार की है। इनका निश्चित स्थानं होने के बाउजूद ये बीच चौराहे पर अपनी मीट मछली की दुकाने सजाते है। नागरिक दीनानाथ अशोक भूज, राकेश मोदनवाल, राकेश मौर्या, सीताराम चौरसिया आदि ने बताया कि मछली और मीट के खुले स्थान पर बिक्री से सड़क पर पसरी गंदगी के चलते इन रास्तों से गुजरने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।


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