सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
बढ़नी /सिद्धार्थनगर -महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में बच्चों से भी काम लिया जा रहा है। अनेक स्थानों पर मनरेगा के काम में बच्चों द्वारा काम करते हुए पाए जाने के बाद भी अधिकारियों द्वारा संज्ञान में नही लिया जा रहा है। जबकि स्पष्ट निर्देश है कि 18 वर्ष से कम उम्र को काम पर नही लगाया जा सकता लेकिन सिद्धार्थनगर में इसका खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है।
बढ़नी ब्लाक के गडरखा गांव मे मनरेगा के अंतर्गत हो रहे काम को नाबालिगों से प्रधान द्वारा लिया जा रहा है। मनरेगा के सभी नियमो को परे रखकर ग्राम प्रधान द्वारा बाल श्रम कानून का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।वही जिम्मेदार ब्लाक के कर्मचारियों की खामोशी प्रधान के इस कृत्य को मौन स्वीकृति प्रतीत हो रही है। तस्वीरो मे आप देख सकते है कि किस तरह से कम उम्र के बच्चे मनरेगा कार्य के अन्तर्गत गांव के पोखरे में बच्चे कार्य करते दिखायी दे रहे है ।गांव के प्रधान नाबालिग बच्चों से कार्य करवाने में कोई कोर-कसर छोड़ नहीं रहा है उनको मनरेगा मे काम के बदले 175 रुपया दिया जाता है। अब सवाल उठता है कि जहां एक तरफ लाखों खर्च कर सरकार बचपन बचाओ की बात कह रही है।वहीं सरकार के ही नुमाइंदों द्वारा नाबालिग बच्चो से कार्य आखिर कैसे लिया जा रहा है।जबकि प्रदेश की सरकार द्वारा कानून के पालन हेतु विशेष ध्यान दिया जा रहा है ।इस सन्दर्भ मे खण्ड विकास अधिकारी से पूछा गया तो उन्होने बताया कि हमे जानकारी नही है पता करवा रहे है।
बढ़नी /सिद्धार्थनगर -महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना में बच्चों से भी काम लिया जा रहा है। अनेक स्थानों पर मनरेगा के काम में बच्चों द्वारा काम करते हुए पाए जाने के बाद भी अधिकारियों द्वारा संज्ञान में नही लिया जा रहा है। जबकि स्पष्ट निर्देश है कि 18 वर्ष से कम उम्र को काम पर नही लगाया जा सकता लेकिन सिद्धार्थनगर में इसका खुलेआम मजाक उड़ाया जा रहा है।
बढ़नी ब्लाक के गडरखा गांव मे मनरेगा के अंतर्गत हो रहे काम को नाबालिगों से प्रधान द्वारा लिया जा रहा है। मनरेगा के सभी नियमो को परे रखकर ग्राम प्रधान द्वारा बाल श्रम कानून का खुला उल्लंघन किया जा रहा है।वही जिम्मेदार ब्लाक के कर्मचारियों की खामोशी प्रधान के इस कृत्य को मौन स्वीकृति प्रतीत हो रही है। तस्वीरो मे आप देख सकते है कि किस तरह से कम उम्र के बच्चे मनरेगा कार्य के अन्तर्गत गांव के पोखरे में बच्चे कार्य करते दिखायी दे रहे है ।गांव के प्रधान नाबालिग बच्चों से कार्य करवाने में कोई कोर-कसर छोड़ नहीं रहा है उनको मनरेगा मे काम के बदले 175 रुपया दिया जाता है। अब सवाल उठता है कि जहां एक तरफ लाखों खर्च कर सरकार बचपन बचाओ की बात कह रही है।वहीं सरकार के ही नुमाइंदों द्वारा नाबालिग बच्चो से कार्य आखिर कैसे लिया जा रहा है।जबकि प्रदेश की सरकार द्वारा कानून के पालन हेतु विशेष ध्यान दिया जा रहा है ।इस सन्दर्भ मे खण्ड विकास अधिकारी से पूछा गया तो उन्होने बताया कि हमे जानकारी नही है पता करवा रहे है।


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