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Monday, June 4, 2018

समीक्षा क्राइम इण्डिया 24न्यूज़

 जन्मसिद्ध,प्राकृतिक एवं आधारभूत अधिकार के लिए लड़ें - खरेल
 राष्ट्रीय मानवाधिकार प्रतिष्ठान ने जन प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया
मानवाधिकार कर्मी संतोष गुप्ता व बीआर भट्टराई केंद्रीय समिति हेतु चयनित
बढ़नी सिद्धार्थनगर की रिपोर्ट 
     राष्ट्रीय मानव अधिकार प्रतिष्ठान,कपिलवस्तु (नेपाल) द्वारा आयोजित मानव अधिकार विषयक "अभिमुखीकरण कार्यक्रम" में विधायक, मेयर,उप मेयर व सभासदों आदि जनप्रतिनिधियों को ह्यूमन राइट्स के बारे में प्रशिक्षित कर उन्हें सचेत किया गया।
     नेपाल के सीमावर्ती शिवराज नगरपालिका-5 के सभागार में आयोजित उक्त कार्यक्रम के उदघाटन सत्र का शुभारम्भ मुख्यातिथि व केंद्रीय अध्यक्ष भवानी प्रसाद खरेल,विशिष्ट अतिथि विधायक अर्जुन कुमार केसी, पूर्व मंत्री ईश्वरदयाल मिश्र,मेयर नेत्रराज अधिकारी,उप मेयर शिवकुमारी चौधरी द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।अपने संबोधन में मुख्यातिथि भवानी खरेल ने कहा कि मानव अधिकार सभी मनुष्य को पाने का नैसर्गिक अधिकार है, यह मानव को मनुष्य के रूप में स्वतंत्र रहकर मानवीय मर्यादा, यथोचित सम्मान के साथ जीने एवम आत्म सम्मान के साथ समाज मे अस्तित्व बनाये रखने के लिए जरूरी है।ये तो मनुष्य का जन्म सिद्ध,प्राकृतिक एवं आधारभूत अधिकार है, जिसे क्रियान्वित कराने में प्रतिष्ठान पूरी तन्मयता से लगा हुआ है।
     उन्होंने बताया कि वि.सं.2053 में बने मानव अधिकार आयोग कानून तथा उसी अनुसार वर्ष 2057 में गठित हुए रा.मानवाधिकार आयोग द्वारा मानवअधिकार के क्षेत्र में प्रशंसनीय कार्य किया गया।हालिया वर्ष 2053 में बने कानून को खारिज कर मानवअधिकार आयोग कानून-2068 को प्रचलित किया गया है। इसी के साथ ही नेपाल के संविधान-2072 ने रा. मानवअधिकार आयोगको पहली बार संवैधानिक मान्यता दी है।प्रतिष्ठान ने कई सुरक्षाकर्मियों के साथ ही माओवादियो की जान बचाने,किसी भी हिंसा से पीड़ित लोगों को बचाने तथा पुनरावृत्ति न होने देने का सार्थक प्रयास किया है
       विधायक अर्जुन केसी ने कहा कि मानव अधिकार की प्रकृति विश्वव्यापी,अविभाज्य व अहरणीय होती है। मनुष्य का धर्म,जाति, सम्प्रदाय,राष्ट्रीयता,उम्र,लिंग,राजनीतिक आदि जो भी हो मानव अधिकार विश्वव्यापी होने के कारण समस्त मानव जाति को वह मिलना चाहिए। मानव अधिकार मनुष्य के जन्म के साथ प्रारम्भ होकर जीवन पर्यन्त ही नही मृत्यु के बाद भी रहता है, क्योकि मृत्यु के बाद भी मानव के इज्जत,मर्यादा व कृतित्व का अपमान नही किया जा सकता।
     इससे पूर्व जिला उपाध्यक्ष भूमिराज भट्टाराई द्वारा स्वागत उदबोधन तथा अध्यक्ष विष्णु प्रसाद ख़ातिवड़ा द्वारा वर्ष भर में प्रतिष्ठान द्वारा किये गए कार्यो व होने वाले दिक्कतों से उपस्थितों को अवगत कराया गया।शहीदों को मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गयी व राष्ट्र गान गाया गया। सत्र को पूर्व राज्यमंत्री ईश्वरदयाल मिश्र,महादेव पोखरेल, जमशेद अली मिया,संतोषी पांडे आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ मानवाधिकार कर्मी संतोष गुप्ता(दांग) व भूमिराज भट्टराई को केन्द्रीय समिति में शामिल करने का मनोनयन पत्र केंद्रीय अध्यक्ष द्वारा प्रदान किया गया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष राजकुमार अधिकारी,स्वेता गिरी, जग बहादुर,अर्जुन पांडेय,अनूप कुमार, शंकर,शकुंतला,रामेश्वर, शांता,निर्मला सुनार, शुशीला खनाल,टोपलाल पोखरेल,कमला पांडेय तथा संचारकर्मी अजय प्रताप गुप्त, विकास सिंह,दीपक खड़का, कृष्णा गैरे,सनिउल्लाह धोबी,दीपक केसी, माधव वेलबासे,मनीष गुप्ता आदि अतिथियों को भी सम्मानित किया गया।

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