बोर्ड परीक्षा में कम अंक लाने वाले छात्रों पर परिवार व समाज का दबाव बनता है। माता पिता को उनका साथ देना होगा
बोर्ड परीक्षा में कम अंक लाने वाले छात्रों पर परिवार व समाज का दबाव बनता है। माता-पिता व अभिभावकों को इस बात को समझना चाहिए की अंक से ज्यादा प्यारे उनके बेटे व बेटियां हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को हतोत्साहित करने के बजाए उनका उत्साह वर्धन कर उन्हें रुचि व क्षमता के मुताबिक कॅरियर चुनने की छूट देन चाहिए। इसी पर जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने अपना अनुभव व संदेश साझा किया है।
विद्यार्थी जीवन में हमने भी उतार-चढ़ाव देखे हैं। कम अंक पाने वाले सहपाठियों की हौसला अफजाई कर उनकी सहायता करते थे। मेरे दो सहपाठी कम अंक पाने के बावजूद भी अपनी मेहनत से आज अच्छे मुकाम पर पहुंच गए हैं। उनमें से एक आज सेना में मेजर व दूसरा कैलीफोर्निया में प्रोफेसर के पद पर है। इसलिए कम अंक पाने वाले छात्रों को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। सभी छात्र एक समान नहीं होते हैं लेकिन, उनमें कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। कम अंक पाने वाले छात्र खेल, संगीत, नृत्य व गायन समेत अन्य क्षेत्रों में भी अपना मुकाम हासिल कर नाम रोशन कर सकते हैं। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों से जरूर पूछना चाहिए की वह भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। और पढ़ाई में उन्हें क्या समस्याएं आ रही हैं। दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए। ध्यान रहे कि कोई भी ऐसा नहीं है जो कभी विफल न हुआ हो। बहुत से माता-पिता अपने अधूरे सपने बच्चों से पूरा करने की अभिलाषा रखते हैं। जरूरत इस बात की है कि बच्चों पर अपने सपने व महत्वाकांक्षाएं न थोपें। क्योंकि हर बच्चे में कोई न कोई काबिलियत होती है। बस उसे पहचानने की जरूरत है।
बोर्ड परीक्षा में कम अंक लाने वाले छात्रों पर परिवार व समाज का दबाव बनता है। माता-पिता व अभिभावकों को इस बात को समझना चाहिए की अंक से ज्यादा प्यारे उनके बेटे व बेटियां हैं। इसलिए अभिभावकों को बच्चों को हतोत्साहित करने के बजाए उनका उत्साह वर्धन कर उन्हें रुचि व क्षमता के मुताबिक कॅरियर चुनने की छूट देन चाहिए। इसी पर जिलाधिकारी कृष्णा करुणेश ने अपना अनुभव व संदेश साझा किया है।
विद्यार्थी जीवन में हमने भी उतार-चढ़ाव देखे हैं। कम अंक पाने वाले सहपाठियों की हौसला अफजाई कर उनकी सहायता करते थे। मेरे दो सहपाठी कम अंक पाने के बावजूद भी अपनी मेहनत से आज अच्छे मुकाम पर पहुंच गए हैं। उनमें से एक आज सेना में मेजर व दूसरा कैलीफोर्निया में प्रोफेसर के पद पर है। इसलिए कम अंक पाने वाले छात्रों को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। सभी छात्र एक समान नहीं होते हैं लेकिन, उनमें कोई न कोई प्रतिभा छिपी होती है। कम अंक पाने वाले छात्र खेल, संगीत, नृत्य व गायन समेत अन्य क्षेत्रों में भी अपना मुकाम हासिल कर नाम रोशन कर सकते हैं। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चों से जरूर पूछना चाहिए की वह भविष्य में क्या बनना चाहते हैं। और पढ़ाई में उन्हें क्या समस्याएं आ रही हैं। दूसरे बच्चों से तुलना नहीं करनी चाहिए। ध्यान रहे कि कोई भी ऐसा नहीं है जो कभी विफल न हुआ हो। बहुत से माता-पिता अपने अधूरे सपने बच्चों से पूरा करने की अभिलाषा रखते हैं। जरूरत इस बात की है कि बच्चों पर अपने सपने व महत्वाकांक्षाएं न थोपें। क्योंकि हर बच्चे में कोई न कोई काबिलियत होती है। बस उसे पहचानने की जरूरत है।


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