सिद्धार्थनगर -
इस महामारी में तमाम शैक्षिक संस्थाएं इस समय बच्चों को ऑनलाइन क्लास करने की व्यवस्था दे रहे हैं। ऐसे मे बच्चों में आंखो से जुड़ी शोर्ट-साइटिडनेस की बीमारी 'मायोपिया' इतनी तेजी से बढ़ रही है कि विशेषज्ञों ने इसका नाम 'स्कूल मायोपिया' रखा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मायोपिया के कारण आपके बच्चों के आंखों की रोशनी हमेशा के लिए भी जा सकती है। आइए हम...
बच्चों के जरूरी है कि वह पढ़ाई और खेल-कूद में एक संतुलन बनाए रखें। ऐसे में अगर आपके बच्चे लगातार पढ़ाई कर रहे हैं या इंडोर गेम्स खेल रहे हैं, तो उनके आंखों की रोशनी जा सकती है। ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि हाल ही में हुई एक स्टडी बता रही है। इस स्टडी की मानें तो रोजाना दो घंटे घर के बाहर, नेचुरल लाइट में नहीं रहने वाले बच्चे दृष्टिहीन हो सकते हैं। दरअसल लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने और किताबों से चिपके रहने के कारण बच्चों में 'स्कूल-मायोपिया' नाम की आंखों से जुड़ी बीमारी फैल रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, बच्चों और युवाओं में यह 'स्कूल मायोपिया' एक महामारी की तरह फैल रही है। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वह बचपन से ही एक गलत जीवनशैली के आदि हो गए हैं। शोधकर्ताओं की मानें तो बच्चों में कम उम्र में दृष्टिहीनता की परेशानी बढ़ रही है और जैसे-जैसे वह बड़े होंगे, परेशानी बढ़ेगी और वे पूर्ण रूप से अंधे हो सकते हैं।वहीं कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 2050 तक लगभग 50 प्रतिशत लोग इस मायोपिया के शिकार हो सकते हैं।
इस महामारी में तमाम शैक्षिक संस्थाएं इस समय बच्चों को ऑनलाइन क्लास करने की व्यवस्था दे रहे हैं। ऐसे मे बच्चों में आंखो से जुड़ी शोर्ट-साइटिडनेस की बीमारी 'मायोपिया' इतनी तेजी से बढ़ रही है कि विशेषज्ञों ने इसका नाम 'स्कूल मायोपिया' रखा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि मायोपिया के कारण आपके बच्चों के आंखों की रोशनी हमेशा के लिए भी जा सकती है। आइए हम...
बच्चों के जरूरी है कि वह पढ़ाई और खेल-कूद में एक संतुलन बनाए रखें। ऐसे में अगर आपके बच्चे लगातार पढ़ाई कर रहे हैं या इंडोर गेम्स खेल रहे हैं, तो उनके आंखों की रोशनी जा सकती है। ये बात हम नहीं कह रहे बल्कि हाल ही में हुई एक स्टडी बता रही है। इस स्टडी की मानें तो रोजाना दो घंटे घर के बाहर, नेचुरल लाइट में नहीं रहने वाले बच्चे दृष्टिहीन हो सकते हैं। दरअसल लगातार स्क्रीन के सामने बैठे रहने और किताबों से चिपके रहने के कारण बच्चों में 'स्कूल-मायोपिया' नाम की आंखों से जुड़ी बीमारी फैल रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, बच्चों और युवाओं में यह 'स्कूल मायोपिया' एक महामारी की तरह फैल रही है। ऐसा सिर्फ इसलिए हो रहा है क्योंकि वह बचपन से ही एक गलत जीवनशैली के आदि हो गए हैं। शोधकर्ताओं की मानें तो बच्चों में कम उम्र में दृष्टिहीनता की परेशानी बढ़ रही है और जैसे-जैसे वह बड़े होंगे, परेशानी बढ़ेगी और वे पूर्ण रूप से अंधे हो सकते हैं।वहीं कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, लगभग 2050 तक लगभग 50 प्रतिशत लोग इस मायोपिया के शिकार हो सकते हैं।


No comments:
Post a Comment