कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर -सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के एमकाम प्रथम समेस्टर के छात्र एवं छात्र नेता शाह मोहम्मद खान ने रविवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी कि 22 अगस्त 2019 को कुलसचिव को छात्रावास के लिए ज्ञापन दिया गया था तथा यह भी ज्ञापन में अवगत कराया गया था कि यदि 2 सितम्बर तक उनको छात्रावास नही उपलब्ध कराया जाता है तो उनके द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसके क्रम में 2 सितम्बर 2019 को धरना दे रहे एवं नारे बाजी कर रहे उनके एवं उनके साथियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी। शाह मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि जब हम लोगो ने छात्र हित के लिये आवाज उठाई तो विश्वविद्यालय सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के एमकाम प्रथम समेस्टर के छात्र एवं छात्र नेता शाह मोहम्मद खान ने रविवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी कि 22 अगस्त 2019 को कुलसचिव को छात्रावास के लिए ज्ञापन दिया गया था तथा यह भी ज्ञापन में अवगत कराया गया था कि यदि 2 सितम्बर तक उनको छात्रावास नही उपलब्ध कराया जाता है तो को उनके द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसके क्रम में 2 सितम्बर 2019 को धरना दे रहे एवं नारे बाजी कर रहे उनके एवं उनके साथियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी। शाह मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि जब हम लोगो ने छात्र हित के लिये आवाज उठाई तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यवाही कर दिया और अब जब बाहरी एबीवीपी के कार्यकर्ता जो विश्वविद्यालय के छात्र भी नही है वो लोग 11 जनवरी को भारी संख्या में आकर विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन करते हैं। जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि इस संगठन को विश्वविद्यालय में बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति प्राप्त है। ऐसे में यदि यही हाल विश्वविद्यालय प्रशासन का रहा तो वह दिन दूर नही की जब यह विश्वविद्यालय जेएनयू न बन जाये। विश्वविद्यालय प्रशासन इस विश्वविद्यालय को जेएनयू के आग के तरफ धकेलने में लगी है जिससे हम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है यदि ऐसे बाहरी तत्वों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन यदि कोई कार्यवाही नही करता है तो हम अपने सहयोगी छात्रों के साथ विश्वविद्यालय में पुनः धरने पर बैठेंगे जिससे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय को जेएनयू की आग से बचाया जा सके। ने कार्यवाही कर दिया और अब जब बाहरी एबीवीपी के कार्यकर्ता जो विश्वविद्यालय के छात्र भी नही है वो लोग 11 जनवरी को भारी संख्या में आकर विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन करते हैं। जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि इस संगठन को विश्वविद्यालय में बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति प्राप्त है। ऐसे में यदि यही हाल विश्वविद्यालय प्रशासन का रहा तो वह दिन दूर नही की जब यह विश्वविद्यालय जेएनयू न बन जाये। विश्वविद्यालय प्रशासन इस विश्वविद्यालय को जेएनयू के आग के तरफ धकेलने में लगी है जिससे हम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है यदि ऐसे बाहरी तत्वों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन यदि कोई कार्यवाही नही करता है तो हम अपने सहयोगी छात्रों के साथ विश्वविद्यालय में पुनः धरने पर बैठेंगे जिससे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय को जेएनयू की आग से बचाया जा सके।
कपिलवस्तु, सिद्धार्थनगर -सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के एमकाम प्रथम समेस्टर के छात्र एवं छात्र नेता शाह मोहम्मद खान ने रविवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी कि 22 अगस्त 2019 को कुलसचिव को छात्रावास के लिए ज्ञापन दिया गया था तथा यह भी ज्ञापन में अवगत कराया गया था कि यदि 2 सितम्बर तक उनको छात्रावास नही उपलब्ध कराया जाता है तो उनके द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसके क्रम में 2 सितम्बर 2019 को धरना दे रहे एवं नारे बाजी कर रहे उनके एवं उनके साथियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी। शाह मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि जब हम लोगो ने छात्र हित के लिये आवाज उठाई तो विश्वविद्यालय सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के एमकाम प्रथम समेस्टर के छात्र एवं छात्र नेता शाह मोहम्मद खान ने रविवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस कर जानकारी दी कि 22 अगस्त 2019 को कुलसचिव को छात्रावास के लिए ज्ञापन दिया गया था तथा यह भी ज्ञापन में अवगत कराया गया था कि यदि 2 सितम्बर तक उनको छात्रावास नही उपलब्ध कराया जाता है तो को उनके द्वारा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसके क्रम में 2 सितम्बर 2019 को धरना दे रहे एवं नारे बाजी कर रहे उनके एवं उनके साथियों के विरुद्ध कार्यवाही की गई थी। शाह मोहम्मद ने आरोप लगाया है कि जब हम लोगो ने छात्र हित के लिये आवाज उठाई तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने कार्यवाही कर दिया और अब जब बाहरी एबीवीपी के कार्यकर्ता जो विश्वविद्यालय के छात्र भी नही है वो लोग 11 जनवरी को भारी संख्या में आकर विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन करते हैं। जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि इस संगठन को विश्वविद्यालय में बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति प्राप्त है। ऐसे में यदि यही हाल विश्वविद्यालय प्रशासन का रहा तो वह दिन दूर नही की जब यह विश्वविद्यालय जेएनयू न बन जाये। विश्वविद्यालय प्रशासन इस विश्वविद्यालय को जेएनयू के आग के तरफ धकेलने में लगी है जिससे हम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है यदि ऐसे बाहरी तत्वों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन यदि कोई कार्यवाही नही करता है तो हम अपने सहयोगी छात्रों के साथ विश्वविद्यालय में पुनः धरने पर बैठेंगे जिससे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय को जेएनयू की आग से बचाया जा सके। ने कार्यवाही कर दिया और अब जब बाहरी एबीवीपी के कार्यकर्ता जो विश्वविद्यालय के छात्र भी नही है वो लोग 11 जनवरी को भारी संख्या में आकर विश्वविद्यालय परिसर में धरना प्रदर्शन करते हैं। जिसके खिलाफ विश्वविद्यालय द्वारा कोई कार्यवाही नही किया जा रहा है, जिससे यह प्रतीत होता है कि इस संगठन को विश्वविद्यालय में बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति प्राप्त है। ऐसे में यदि यही हाल विश्वविद्यालय प्रशासन का रहा तो वह दिन दूर नही की जब यह विश्वविद्यालय जेएनयू न बन जाये। विश्वविद्यालय प्रशासन इस विश्वविद्यालय को जेएनयू के आग के तरफ धकेलने में लगी है जिससे हम छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है यदि ऐसे बाहरी तत्वों के खिलाफ विश्वविद्यालय प्रशासन यदि कोई कार्यवाही नही करता है तो हम अपने सहयोगी छात्रों के साथ विश्वविद्यालय में पुनः धरने पर बैठेंगे जिससे सिद्धार्थ विश्वविद्यालय को जेएनयू की आग से बचाया जा सके।


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