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Saturday, January 12, 2019

शब्दों को पिरोकर साहित्यिक माले में परिवर्तित करने वाले जादूगर के खिताब से नवाजे गए मेराज़ मुस्तफा

उत्तर  प्रदेश का वह जिला जो भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली है उसी पवित्र भूमि पर जन्में एक युवा जिसे सब मेराज़ मुस्तफा के नाम से जानते हैं अपने कलम की बदौलत हर दिन एक नई इबारत लिख रहे।
वेसे देखा जाए तो मेराज़ मुस्तफा कई क्षेत्रों में कार्य कर रहे परन्तु जिस कार्य ने उन्हें सारे देश के साहित्य प्रेमियों के दिलों में बसा दिया वो है उनके कलम से निकलने वाले लेख व रचनाएं । मेराज़ मुस्तफा द्वारा लिखित अब सैकड़ों रचनाओं ने लोगों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी कि लोग उनके प्रशंसक बन गए और बुद्धभूमि के इस कलमकार से सम्पर्क करने के लिए उन समाचार पत्रों जिनमें मेराज़ मुस्तफा के लेख व रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं उन समाचार पत्रों के ब्यूरो चीफ व संवाददाताओं को फोन कर सम्पर्क का जरिया तलाश रहे। मेराज़ मुस्तफा द्वारा साहित्यिक व पत्रकारिता जगत में मिली यह सफलता कोई संयोग नही है न ही आसान रही है । सिद्धार्थनगर के इस युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा ने साहित्य व पत्रकारिता को पेशा नही बनाया बल्कि शौकिया तौर पर वक्त गुजारी के लिए कलम को जब थामा तो स्वयं भी नही सोचा था कि यही कलम उन्हें उनके पहले की पहचान को बदलकर सारे देश में एक नई पहचान दिलाएगा परन्तु जो सोचा नही जाता वह अक्सर सत्य बनकर सामने आ जाता है ऐसा ही कुछ मेराज़ मुस्तफा के साथ भी हुआ । सिद्धार्थनगर के एक युवा ग्राम प्रधान के रूप में मिली पहचान से मेराज़ मुस्तफा आज सारे देश में एक ऐसे कलमकार के रूप में जाने पहचाने जाते हैं जिन्हें लोगों ने शब्दों का जादूगर के खिताब से नवाज दिया । मेराज़ मुस्तफा द्वारा लिखित लेख व रचनाओं को पढ़ने के बाद आप भी यही कहेंगे कि वाकई यह युवा शब्दों का जादूगर ही है किस शब्द को कहा और कैसे प्रयोग करना है यह मेराज़ मुस्तफा के लिए एक कला बन गई है और छोटे से छोटे विषय पर भी अपने जादुई शब्दों से एक ऐसी रचना को कागज पर उतार देते हैं कि पढ़ने वाला भी हैरत में पड़ जाए।
मेराज़ मुस्तफा द्वारा सर्वाधिक लेख पत्रकारिता के ऊपर ही लिखे गए हैं जो कि एक ऐसे कलमकार के लिए अत्यंत ही कठिन है कि वह जिस क्षेत्र में स्वयं कार्य कर रहा हो उसी क्षेत्र की कमियों को बेझिझक लिख दे लेकिन मेराज़ मुस्तफा में यह हुनर बाखूबी भरा हुआ है कि उन कमियों को लोगों तक पहुंचाने के लिए अपने ही नाम का उदाहरण देते हैं जो कि और भी मुश्किल कार्य है। पत्रकारिता क्षेत्र में व्याप्त कमियों को जिस बखूबी से उन्होंने शब्दों द्वारा लेख रूपी माला बनाया वह काबिल - ए - तारीफ है। मेराज़ मुस्तफा के कलम से अब तक सैकड़ों लेख ऐसे भी निकले जो लिखने की हिम्मत कोई भी पत्रकार नही करता और शायद यही वो चीज है जिसने देश भर के पाठकों का दिल जीत लिया । बेहद कम वक्त में सम्पूर्ण देश में अपने लेखों व रचनाओं के जरिए वरिष्ठ साहित्यकारों से लेकर हिन्दी - उर्दू अदब के कलमकारों के साथ प्रदेश व देश के उच्चकोटि के वरिष्ठ पत्रकारों द्वारा सराहना प्राप्त करने वाले सिद्धार्थनगर के युवा ग्राम प्रधान व प्रवक्ता प्रधान संघ के अतिरिक्त पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करने वाले युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा को जिस तरह लोगों का स्नेह व प्यार मिल रहा वह हर किसी का सपना होता है लेकिन सपने हकीकत में तभी बदलते हैं जब उसको अंजाम देने की हिम्मत हो। सिद्धार्थनगर के युवा रचनाकार मेराज़ मुस्तफा के लिए उन्हीं के द्वारा लिखी गई यह पंक्तियां बिल्कुल सटीक बैठती हैं -

जरूरत नही कोई परों की ऊंची परवाज के लिए ।
हौसलाअफजाई करते रहो काफी है 'मेराज़'  के लिए ।।

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