MeToo में अब एक और महिला पत्रकार ने एमजे अकबर पर लगाया आरोप
एमजे अकबर ने भले ही पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ क्रिमिनल डिफमेशन केस कर दिया हो लेकिन महिला पत्रकार अभी हार मानने वाली नहीं हैं। इस मामले में अब एक और महिला पत्रकार ने आवाज उठाई है। ये हैं तुषिता पटेल। पटेल ने स्क्रॉल में छपी अपनी कहानी के बारे में बताया है कि 1992 में मैं 'टेलीग्राफ' में ट्रेनी थी। फिर आपने राजनीति के लिए पत्रकारिता छोड़ दी और कभी कभी कोलकाता आते थे।'
उस वक्त मुझसे पूछा गया कि क्या तुम एमजे अकबर से मिलना चाहोगी। कौन नहीं मिलना चाहेगा। मैं तैयार हो गई। अपने सीनियर के साथ मैं भी गई और वो शाम बहुत अच्छी थी। मेरे घर का फोन नंबर एमजे अकबर को मिल गया। उन्होंने मुझे काम के बहाने होटल बुलाया।
कई बार सोचने के बाद मैं जाने के लिए तैयार हो गई। मैं घंटी बजाई और दरवाजा खुला। सामने अंडरवियर पहने एमजे अकबर खड़े थे। मैं हैरान दरवाजे पर खड़ी थी। मेरे सामने एक वीआईपी खड़ा था, जो मेरे डर से खुश था। क्या 22 साल कि किसी लड़की को वेलकम करने का ये नैतिक तरीका था। क्या यह कुछ ना करना था?
एमजे अकबर ने भले ही पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ क्रिमिनल डिफमेशन केस कर दिया हो लेकिन महिला पत्रकार अभी हार मानने वाली नहीं हैं। इस मामले में अब एक और महिला पत्रकार ने आवाज उठाई है। ये हैं तुषिता पटेल। पटेल ने स्क्रॉल में छपी अपनी कहानी के बारे में बताया है कि 1992 में मैं 'टेलीग्राफ' में ट्रेनी थी। फिर आपने राजनीति के लिए पत्रकारिता छोड़ दी और कभी कभी कोलकाता आते थे।'
उस वक्त मुझसे पूछा गया कि क्या तुम एमजे अकबर से मिलना चाहोगी। कौन नहीं मिलना चाहेगा। मैं तैयार हो गई। अपने सीनियर के साथ मैं भी गई और वो शाम बहुत अच्छी थी। मेरे घर का फोन नंबर एमजे अकबर को मिल गया। उन्होंने मुझे काम के बहाने होटल बुलाया।
कई बार सोचने के बाद मैं जाने के लिए तैयार हो गई। मैं घंटी बजाई और दरवाजा खुला। सामने अंडरवियर पहने एमजे अकबर खड़े थे। मैं हैरान दरवाजे पर खड़ी थी। मेरे सामने एक वीआईपी खड़ा था, जो मेरे डर से खुश था। क्या 22 साल कि किसी लड़की को वेलकम करने का ये नैतिक तरीका था। क्या यह कुछ ना करना था?

