सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर – जहाॅ केन्द्र से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर परेशान है हर चैराहों पर हर गांव में और शहरों में स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं वही जनपद सिद्धार्थनगर के कलेक्ट्रेट में वह नजारा देखने को मिल रहा है जो यदि कहीं किसी ग्राम में दिखाई देता तो शायद उस गांव के सिकरेटरी और ग्राम पंचायत की शामत आ जाती लेकिन क्या करें यह जिले के सर्वे-सर्वा जिला अधिकारी का कैंपस कलेक्ट्र है जहां उपजिलाधिकारी की कोर्ट के सामने ही बने शौचालय से निकलकर पानी और पेशाब दोनों ही बाहर फर्श पर फैलता रहता है
यह आज का ही नहीं लगभग प्रतिदिन का काम हो रखा है कलेक्ट्रेट में बने लगभग सभी शौचालयों की हालत यही है टूटे हुए पानी की टोटी, गंन्ंदगी से भी हुई शौचालय शीट ,और कीड़ों से भरी हुई बाथरूम और शौचालय दोनों ही कलेक्ट्रेट में चार चांद लगा रहे हैं इसकी तरफ ना तो किसी प्रशासन के आला अधिकारियों का नजर पड़ रहा है ना ही स्वच्छता अभियान में लगे कर्मचारियों का, यह हाल कलेक्टेª के नीचे सूचना विभाग के बगल मे बाथरूम हो या उपर बने कोर्ट के बगल मे सब की हालत यही है आखिर इस को दूर करने के लिए कौन आएगा यह समझ पाना किसी के बस मे नही है। जब भी कोई व्यक्ति कोर्ट के किसी काम से या जिलाधिकारी के कैंपस में किसी कार्य से आता है और बाथरूम जाने की सोचता है तो वह हजार बार सोचने पर मजबूर हो जाता है आखिर वह कहां जाए शौचालय में जहां पैर रखना भी मुश्किल है आखिर क्या दिखाना चाहता है प्रशासन की यही स्वच्छता अभियान है अगर यही स्वच्छता अभियान है तो इससे अच्छा तो गांव है जहां कम से कम लोग खुले में शौच तो जाते हैं यहां कैंपस के अंदर बाथरूम में ही पेशाब करने से लेकर शौच की बात सोचना ही जुल्म है यदि कही उपजिलाधिकारी की कोर्ट में महीला की पेशी हो और उसे शौचालय जाना हो तो मामला और गंभीर हो जाता है।
सिद्धार्थनगर – जहाॅ केन्द्र से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार स्वच्छता अभियान को लेकर परेशान है हर चैराहों पर हर गांव में और शहरों में स्वच्छता अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं वही जनपद सिद्धार्थनगर के कलेक्ट्रेट में वह नजारा देखने को मिल रहा है जो यदि कहीं किसी ग्राम में दिखाई देता तो शायद उस गांव के सिकरेटरी और ग्राम पंचायत की शामत आ जाती लेकिन क्या करें यह जिले के सर्वे-सर्वा जिला अधिकारी का कैंपस कलेक्ट्र है जहां उपजिलाधिकारी की कोर्ट के सामने ही बने शौचालय से निकलकर पानी और पेशाब दोनों ही बाहर फर्श पर फैलता रहता है
यह आज का ही नहीं लगभग प्रतिदिन का काम हो रखा है कलेक्ट्रेट में बने लगभग सभी शौचालयों की हालत यही है टूटे हुए पानी की टोटी, गंन्ंदगी से भी हुई शौचालय शीट ,और कीड़ों से भरी हुई बाथरूम और शौचालय दोनों ही कलेक्ट्रेट में चार चांद लगा रहे हैं इसकी तरफ ना तो किसी प्रशासन के आला अधिकारियों का नजर पड़ रहा है ना ही स्वच्छता अभियान में लगे कर्मचारियों का, यह हाल कलेक्टेª के नीचे सूचना विभाग के बगल मे बाथरूम हो या उपर बने कोर्ट के बगल मे सब की हालत यही है आखिर इस को दूर करने के लिए कौन आएगा यह समझ पाना किसी के बस मे नही है। जब भी कोई व्यक्ति कोर्ट के किसी काम से या जिलाधिकारी के कैंपस में किसी कार्य से आता है और बाथरूम जाने की सोचता है तो वह हजार बार सोचने पर मजबूर हो जाता है आखिर वह कहां जाए शौचालय में जहां पैर रखना भी मुश्किल है आखिर क्या दिखाना चाहता है प्रशासन की यही स्वच्छता अभियान है अगर यही स्वच्छता अभियान है तो इससे अच्छा तो गांव है जहां कम से कम लोग खुले में शौच तो जाते हैं यहां कैंपस के अंदर बाथरूम में ही पेशाब करने से लेकर शौच की बात सोचना ही जुल्म है यदि कही उपजिलाधिकारी की कोर्ट में महीला की पेशी हो और उसे शौचालय जाना हो तो मामला और गंभीर हो जाता है।


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