सत्येंद्र उपाध्याय की रिपोर्ट
शोहरतगढ़ /सिद्धार्थनगर- जिले का भारत नेपाल बार्डर खुनुवा चौकी जिला सबसे कमाऊ और व्यस्त चौकी के तौर पर जाना जाता है। इस चौकी की खास बात ये है कि यहां से हर रोज सैंकड़ों की संख्या में ओवरलोड वाहन निकलते हैं। यही वजह है कि यहां पुलिस विभाग की तैनाती लगी पड़ी रहती है। प्रदेश में भाजपा सरकार के बनते ही कई सख्त नियम बने थे, जिनमें ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने का निर्देश भी दिया गया था। शुरूआत के कुछ दिनों तक तो इसका पालन किया गया। लेकिन बाद में आरामतलबी दिखाई गयी। इन वाहनों से आने वाली वसूली इतनी हो जाती है कि कुछ बवाल हो, तो लेनदेन आसानी से किया जा सकता है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं भारत से नेपाल को जाने वाले मार्ग पर रात दस बजे के बाद खड़े होना मुश्किल हो जाता है। यहां के सुबह 8 बजे से ही ओवरलोड वाहनों का निकलना शुरू हो जाता है। इसी के साथ शुरू होता है वसूली का खेल भी। वसूली सिर्फ पुलिस ही नहीं बल्कि हर उस विभाग के लोग करते हैं, जो इस काम के बदले इन पर कार्रवाई कर सकते हैं। हर कोई अपने-अपने हिस्से की वसूली करता है। लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जो बिना हिस्से में साझेदारी किए ही वसूली कर लेते हैं। इस बात को लेकर अक्सर शिकायत की जाती है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। प्रदेश सरकार ने ओवरलोड वाहनों की चेकिंग रोकने के लिए और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हर जिले में कमेटी गठित करने का निर्देश दिया। पुलिस कर्मियों को ओवरलोड वाहनों की चेकिंग के खिलाफ साफ निर्द्श दिए गए थे। लेकिन जनपद में पुलिस कर्मी ही सबकुछ कर रहे हैं। ओवरलोड वाहनों की चेकिंग रोकने के लिए मई में अभियान भी चलाया गया था। लेकिन कोई फायदा नहीं मिला।
शोहरतगढ़ /सिद्धार्थनगर- जिले का भारत नेपाल बार्डर खुनुवा चौकी जिला सबसे कमाऊ और व्यस्त चौकी के तौर पर जाना जाता है। इस चौकी की खास बात ये है कि यहां से हर रोज सैंकड़ों की संख्या में ओवरलोड वाहन निकलते हैं। यही वजह है कि यहां पुलिस विभाग की तैनाती लगी पड़ी रहती है। प्रदेश में भाजपा सरकार के बनते ही कई सख्त नियम बने थे, जिनमें ओवरलोड वाहनों पर रोक लगाने का निर्देश भी दिया गया था। शुरूआत के कुछ दिनों तक तो इसका पालन किया गया। लेकिन बाद में आरामतलबी दिखाई गयी। इन वाहनों से आने वाली वसूली इतनी हो जाती है कि कुछ बवाल हो, तो लेनदेन आसानी से किया जा सकता है। शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं भारत से नेपाल को जाने वाले मार्ग पर रात दस बजे के बाद खड़े होना मुश्किल हो जाता है। यहां के सुबह 8 बजे से ही ओवरलोड वाहनों का निकलना शुरू हो जाता है। इसी के साथ शुरू होता है वसूली का खेल भी। वसूली सिर्फ पुलिस ही नहीं बल्कि हर उस विभाग के लोग करते हैं, जो इस काम के बदले इन पर कार्रवाई कर सकते हैं। हर कोई अपने-अपने हिस्से की वसूली करता है। लेकिन कुछ अधिकारी ऐसे भी हैं, जो बिना हिस्से में साझेदारी किए ही वसूली कर लेते हैं। इस बात को लेकर अक्सर शिकायत की जाती है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। प्रदेश सरकार ने ओवरलोड वाहनों की चेकिंग रोकने के लिए और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हर जिले में कमेटी गठित करने का निर्देश दिया। पुलिस कर्मियों को ओवरलोड वाहनों की चेकिंग के खिलाफ साफ निर्द्श दिए गए थे। लेकिन जनपद में पुलिस कर्मी ही सबकुछ कर रहे हैं। ओवरलोड वाहनों की चेकिंग रोकने के लिए मई में अभियान भी चलाया गया था। लेकिन कोई फायदा नहीं मिला।

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