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Thursday, June 21, 2018

समीक्षा क्राईम इण्डिया 24न्यूज़

सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट 
उत्तर प्रदेश सरकार को न्याय पंचायत के गठन पर ध्यान देना चाहिये 
अगर उत्तर प्रदेश सरकार 'न्याय पंचायत' के गठन पर ध्यान दे, तो यह पंचायत के विकास के लिए एक नया अध्याय शुरू होगा। 'न्याय पंचायत' के गठन से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को थाने, कोर्ट, कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बिहार में ग्रामीणों को सुलभ और सस्ता न्याय प्रदान करने के लिए पंचायत स्तर पर आजादी के समय से 'ग्राम कचहरी' सुचारू रूप से चल रही है। जबकि उत्तर प्रदेश में 1972 में अंतिम बार न्याय पंचायत का गठन हुआ था, इसके बाद यह प्रक्रिया रुक गई। बिहार में ग्राम कचहरी अभी भी सक्रिय रूप से चलने की वजह से यहाँ के लोग आपसी मामले थाने लेकर नहीं जाते हैं। इस ग्राम कचहरी का मुख्य उद्देश्य है कि ग्रामीण बिना किसी उलझन और परेशानी के, बिना किसी अनावश्यक खर्च के आपसी विवाद पंचायत स्तर पर खुद सुलझा सकें। अगर यूपी की सरकार भी इस ग्राम कचहरी को शुरू करा पाए तो यहां भी ग्रामीणों को थाने और कोर्ट कचहरी के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले वर्ष 150 वें स्थापना दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री सहित, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस, सीएम योगी आदित्यनाथ सभी मौजूद थे। इस मौके पर न्याय व्यवस्था पर पीड़ा व्यक्त करते हुए चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा था कि जजों की कमी के चलते भारत की न्याय व्यवस्था विकलांग हो गई है। चीफ जस्टिस की यह पीड़ा थोड़ी कम होती यदि देश के हर राज्य में ग्राम कचहरी की शुरुआत की गई होती। 

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