शैलेष सोनकर / सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट -
सुमेरपुर नवीन गल्ला मंडी में कायम है दलालो का वर्चश्व
किसानों का गेहू दलाल बेचते हैं क्रय केन्द्रों मे
अधिकारियों के साठ गांठ से फल फूल रहा है दलालो का धंधा
किसान परेशान दलाल मालामाल
रात के अंधेरे में होती है दो नम्बर गेहूं की तौलाई
भरुआ सुमेरपुर (हमीरपुर)- सुमेरपुर की नवीन गल्ला मंडी में इस समय वो सब कुछ हो रहा है जिसको रोकने की बात भाजपा सरकार ने की थी ,यहां दलाल किसानों का गेहूं 1400-1500 रुपये में खरीद कर क्रय केन्द्रों मे 1745 रुपये में बेचते है,इस अवैध कार्य मे लिप्त व्यापारी व दलाल मंडी में हावी है मंडी समिति के कर्मचारियों की मिलीभगत से रात में ही दलालो और व्यापारियो का गेहू तौल दिया जाता है।जबकि अगर किसान सीधे अपना गेहूं बेचना चाहता है तो उसको कई दिनों तक तौलने के लिये परेसान किया जाता है।आखिर किसान थक हार कर व मायूस होकर दलालो को ही अपना गेहूं दे देता है।सबसे अहम बात यह है कि तमाम फर्जी किसानों के कागज लगाकर गेहू बेचा जाता है जिससे शासन की छवि भी खराब हो रही है।जांच मे स्पष्ट दिख रहा है कि जिस किसान के पास साल भर के खाने के लिए गेहूं पैदा नही हुआ है वह किसान कागजों मे पचासों कुंतल गेहूं बेच रहा है।इसके साथ ही जिस किसान ने गेहू बोया ही नही और अपनी खेती दूसरे को एक साल के लिए बलकट देकर रुपया ले लिया है वह व्यक्ति भी अपने कागज लगाकर गेहू बेच रहा है।इस कारोबार मे किसानों के हित पर डाका डालकर मंडी समिति के कर्मचारी, दलाल व व्यापारी मालामाल हो रहे है,शायद बाद मे शासन के पास भी अपनी पीठ थपथपाने का मौका होगा कि हमने इतनी खराब करवायी जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है,किसान परेशान है और कोई दावा कोई शियासत किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने मे नाकाम दिख रही है।
सुमेरपुर नवीन गल्ला मंडी में कायम है दलालो का वर्चश्व
किसानों का गेहू दलाल बेचते हैं क्रय केन्द्रों मे
अधिकारियों के साठ गांठ से फल फूल रहा है दलालो का धंधा
किसान परेशान दलाल मालामाल
रात के अंधेरे में होती है दो नम्बर गेहूं की तौलाई
भरुआ सुमेरपुर (हमीरपुर)- सुमेरपुर की नवीन गल्ला मंडी में इस समय वो सब कुछ हो रहा है जिसको रोकने की बात भाजपा सरकार ने की थी ,यहां दलाल किसानों का गेहूं 1400-1500 रुपये में खरीद कर क्रय केन्द्रों मे 1745 रुपये में बेचते है,इस अवैध कार्य मे लिप्त व्यापारी व दलाल मंडी में हावी है मंडी समिति के कर्मचारियों की मिलीभगत से रात में ही दलालो और व्यापारियो का गेहू तौल दिया जाता है।जबकि अगर किसान सीधे अपना गेहूं बेचना चाहता है तो उसको कई दिनों तक तौलने के लिये परेसान किया जाता है।आखिर किसान थक हार कर व मायूस होकर दलालो को ही अपना गेहूं दे देता है।सबसे अहम बात यह है कि तमाम फर्जी किसानों के कागज लगाकर गेहू बेचा जाता है जिससे शासन की छवि भी खराब हो रही है।जांच मे स्पष्ट दिख रहा है कि जिस किसान के पास साल भर के खाने के लिए गेहूं पैदा नही हुआ है वह किसान कागजों मे पचासों कुंतल गेहूं बेच रहा है।इसके साथ ही जिस किसान ने गेहू बोया ही नही और अपनी खेती दूसरे को एक साल के लिए बलकट देकर रुपया ले लिया है वह व्यक्ति भी अपने कागज लगाकर गेहू बेच रहा है।इस कारोबार मे किसानों के हित पर डाका डालकर मंडी समिति के कर्मचारी, दलाल व व्यापारी मालामाल हो रहे है,शायद बाद मे शासन के पास भी अपनी पीठ थपथपाने का मौका होगा कि हमने इतनी खराब करवायी जबकि हकीकत इससे बिल्कुल उलट है,किसान परेशान है और कोई दावा कोई शियासत किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने मे नाकाम दिख रही है।

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