सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
चीन ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि वह 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंट और आतंकी सरगना हाफिज सईद को किसी दूसरे देश में भेज दें। दरअसल हाफिज के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दवाब लगातार बढ़ता जा रहा है और ऐसे समय में पाकिस्तान के परम मित्र चीन ने पाकिस्तान को सुझाव दिया है कि वह हाफिज सईद को किसी दूसरे पश्चिमी एशियाई देश में शिफ्ट करे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बारे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से पिछले महीने बोआवो फोरम के इतर मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अब्बासी को सुझाव दिया कि वह आंतकी सरगना हाफिज सईद को किसी पश्चिमी एशियाई देश में शिफ्ट करे तांकि वह (हाफिज) चैन की जिंदगी जी सके।
पाकिस्तानी पीएम के एक खास सहयोगी ने कहा कि जिनपिंग और अब्बासी के बीच करीब 35 मिनट तक चली इस बैठक में 10 मिनट केवल हाफिज सईद को लेकर चर्चा हुई। चीनी राष्ट्रपति ने हाफिज को सुर्खियों से दूर रखने के लिए जल्द से जल्द रास्ता निकालने को कहा। अखबार के मुताबिक, अब्बासी ने इसके बाद अपनी सरकारी कानूनी टीम से सलाह-मशविरा किया।
फिलहाल यह टीम इस मामले पर मंथन कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इस बारे में अगली सरकार ही फैसला लेगी क्योंकि अब्बासी का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो रहा है।
चीन ने पाकिस्तान को सलाह दी है कि वह 26/11 मुंबई आतंकी हमलों के मास्टरमाइंट और आतंकी सरगना हाफिज सईद को किसी दूसरे देश में भेज दें। दरअसल हाफिज के खिलाफ कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय दवाब लगातार बढ़ता जा रहा है और ऐसे समय में पाकिस्तान के परम मित्र चीन ने पाकिस्तान को सुझाव दिया है कि वह हाफिज सईद को किसी दूसरे पश्चिमी एशियाई देश में शिफ्ट करे। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस बारे में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी से पिछले महीने बोआवो फोरम के इतर मुलाकात की थी। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने अब्बासी को सुझाव दिया कि वह आंतकी सरगना हाफिज सईद को किसी पश्चिमी एशियाई देश में शिफ्ट करे तांकि वह (हाफिज) चैन की जिंदगी जी सके।
पाकिस्तानी पीएम के एक खास सहयोगी ने कहा कि जिनपिंग और अब्बासी के बीच करीब 35 मिनट तक चली इस बैठक में 10 मिनट केवल हाफिज सईद को लेकर चर्चा हुई। चीनी राष्ट्रपति ने हाफिज को सुर्खियों से दूर रखने के लिए जल्द से जल्द रास्ता निकालने को कहा। अखबार के मुताबिक, अब्बासी ने इसके बाद अपनी सरकारी कानूनी टीम से सलाह-मशविरा किया।
फिलहाल यह टीम इस मामले पर मंथन कर रही है। ऐसा माना जा रहा है कि इस बारे में अगली सरकार ही फैसला लेगी क्योंकि अब्बासी का कार्यकाल 31 मई को खत्म हो रहा है।


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