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Friday, May 25, 2018

समीक्षा क्राइम इण्डिया 24न्यूज़

शैलेष सोनकर की रिपोर्ट 

पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों ने एक बार फिर से पूरे देश में हाहाकार मचा दिया है। लेकिन अगर आप अभी भी सोचते हैं कि आपने 1000 या 500 का पेट्रोल डलवाया तो आपकी गाड़ी में उतना ही पेट्रोल डाला गया है तो एक बार दोबारा से चेक करना ना भूलें।

दरअसल, आपकी आंखों के सामने पेट्रोल पंप के कर्मचारी आपको चूना लगा देते हैं। आपने अक्सर सुना होगा कि पेट्रोल पंप पर मीटर चलता रहता है, लेकिन कई बार पेट्रोल या डीजल कम डाला जाता है। हो सकता है कि आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ हो और आपने ध्यान न दिया हो। आज हम आपको पेट्रोल पंप वालों के उस खेल के बारे में बताएंगे, जिससे वो आपको खड़े-खड़े चूना लगा देते हैं। ये समस्या देश के कई राज्यों में कई सालों से ज्यों की त्यों बनी हुई।



पेट्रोल पंप के कर्मचारी इतने शातिर तरीके से आपको चूना लगा देते हैं कि आप सबकुछ देखते हुए भी उन्हें पकड़ नहीं पाते। पेट्रोल या डीजल भरवाते समय हमेशा कर्मचारी के हाथों पर ध्यान दें। अगर कार में बैठे हैं तो कार से उतरकर अपने सामने पेट्रोल डलवाएं। पेट्रोल या डीजल भरवाते समय अगर कर्मचारी बार-बार नोजल दबा रहा है तो समझ जाइए 100 पर्सेंट झोल है। होता कुछ यूं है कि जिस नोजल से कर्मचारी पेट्रोल डालते हैं वो सीधा मीटर से जुड़ा होता है। अगर मीटर में 200 रुपए का पेट्रोल फीड किया गया है तो एक बार नोजल का स्विच दबाने पर खुद-ब-खुद 200 रुपए का पेट्रोल डल जाएगा। उसे ऑफ करने की कोई जरूरत नहीं पड़ती। स्विच सिर्फ मीटर को ऑन करने के लिए होता है उसका ऑफ से कोई संबंध नहीं होता। मीटर फीड की हुई वैल्यू खत्म होने पर रुक जाता है।
अगर पेट्रोल डालते समय नोजल का स्विच बंद कर दिया जाए तो मीटर चलता रहता है, लेकिन नोजल बंद होने की वजह से पेट्रोल बाहर नहीं निकलता। इसी बात का फायदा उठाकर कर्मचारी करते ये हैं कि जब भी कोई पेट्रोल डलवाता है तो बीच-बीच में स्विच-ऑफ कर देते हैं, जिससे रुक-रुक कर पेट्रोल टंकी में जाता है और हम कंपनी को कम माइलेज की गाड़ी कहकर कोसने लगते हैं।
उदाहरण के तौर पर अगर आप बाइक लेकर पेट्रोल पंप पर गए। आपने 200 रुपए का पेट्रोल डलवाने को कहा। 200 रुपए का पेट्रोल डलने में 30-45 सेकंड का समय लगता है। इस दौरान कर्मचारी आपको मीटर पर 0 चेक करने को कहते हैं। आपका सारा ध्यान मीटर की रीडिंग पढ़ने में निकल जाता है और अगर कर्मचारी 10 सेकेंड के लिए भी स्विच ऑफ करते हैं, तो समझ लीजिये आपका 50 रुपए का पेट्रोल गया।
चिप से चोरीः इसके अलावा पेट्रोल पंप मशीन के अंदर एक खास तरह की चिप फिट की जाती है, जिसे रिमोट से नियंत्रित किया जाता है। सेल्समैन इसे एक बटन से नियंत्रित कर सकता है। तेल डालते समय बटन दबाने से तेल कम गिरने लगाता है। इससे मीटर तो चलता है, लेकिन आपको तब तक चूना लग चुका होता है। इसे कोई पकड़ भी नहीं सकता, क्योंकि जैसे ही आप चेक करने चलेंगे, उसे रिमोट से सही कर दिया जाएगा और तेल सही मात्रा में गिरेगा। पिछले साल यूपी के पेट्रोल पंपों में छापेमारी के दौरान ऐसी कई चिपें बरामद हुई थीं।
कैसे बचें: कभी भी पेट्रोल या डीजल भरवाते वक्त फिक्स अमाउंट जैसे 100, 200 या 500 या 1000 रुपए का तेल न खरीदें। हमेशा रैंडम अमाउंट बताए, जैसे 104, 207 या जो भी सिक्के आपकी जेब में हों उन्हें जोड़कर ही खरीदें, क्योंकि कई पेट्रोल पंप वाले मशीनों से छेड़छाड़ करके उन्हें तेज कर देते हैं। इससे मीटर जंप करता है और पेट्रोल कम मिलता है। जब आप ऑड नंबर यानी 107, 135 या 1009 आदि का पेट्रोल डलवाते हैं, तो उसे मैनुअली पेट्रोल डालना पड़ता है, इससे मीटर जंप नहीं कर पाता।
छुट्टे पैसों का झोलः तेल भरवाने के लिए सुबह सुबह जो भी लोग पेट्रोल पंप पर जाते हैं उनमें से अधिकतर नौकरीपेशा लोग होते हैं, इन्हें ऑफिस पहुंचने की जल्दी होती है। अक्सर ऐसा होता है कि किसी शख्स ने 200 या 300 का तेल भरवाया और उसने कर्मचारी को 1000 रुपए का नोट दिया। कर्मचारी क्या तिकड़म करते हैं, वो शख्स को 800 या 700 रुपए नहीं बल्कि 600 या 400 रुपए थमा देते हैं। ऑफिस पहुंचने की हड़बड़ी में शख्स के लिए हर बार नोट को गिनना आसान नहीं होता है। अगर उसने नोट गिने और चोरी पकड़ी गई तो कर्मचारी हैरानी जता देता है या फिर मासूम सी मुस्कान के साथ बाकी रुपए वापस कर देता है।
ये बातें रखें ध्यान : पेट्रोल लेने से पहले मीटर पर शून्य रीडिंग के लिए आश्वस्त हो लें मिलावट का संदेह होने पर फिल्टर पेपर परीक्षण की मांग करें। और हां हर बार पेट्रोल-डीजल डलवाते वक्त रसीद लेना न भूलें, या फिर कैशलेस भुगतान करें क्योंकि यही एक सबूत है, जिससे ये साबित होगा कि आपने फलां पेट्रोल पंप से तेल डलवाया था।

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