सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
सिद्धार्थनगर। इटवा कस्बे में बगैर लाइसेंस के कई दर्जन मीट शॉप संचालित किए जा रहे हैं जबकि पूरे जनपद में नाम मात्र लोगो के पास लाइसेन्स है। कई का लाइसेन्स अवधि भी खत्म हो गया है। बावजूद धड़ल्ले से इटवा कस्बे में मानको को दर किनार कर मीट की दुकाने संचालित हो रही है। लेकिन न तो प्रशासन के जिम्मेदार इस गंभीर विषय पर ध्यान दे रहे है। न ही जिम्मेदार विभाग । बता दे कि इन दिनों इटवा कस्बे में विभिन्न स्थानों पर संचालित मीट शाप पर बकरा व मुर्गा काटने के बाद उसका कचरा इधर उधर फेक देते है। जो सड़ने के साथ ही बदबू व गंदगी का रुप ले लेता है। जिससे अधिकांश स्थानों पर कस्बे वासियों का जीना मुहाल हुआ है। बावजूद जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुये है। जिससे लोगो में ािक्रोश का माहौल है। बतौर कस्बावासी विनोद कुमार , राम नाथ सोनी , अब्दुल हमीद , राम निरंजन मौर्य आदि ने जिला अधिकारी से कार्यवाही की मांग की है।
दुकानदार नहीं कराते मुर्गा व बकरे का स्वास्थ्य परीक्षण , स्वास्थ्य से हो रहा खिलवाड़
नियमों के मुताबिकए मीट बिक्री से पहले स्वास्थ्य अधिकारी की ओर से पशुओं के स्वास्थ्य की जांच होना जरूरी हैए मगर लाइसेंस की अवधि समाप्त होने पर अब दुकानों पर बिना जांच किए पशुओं की बिक्री हो रही है। ऐसे में लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। कई लोग तो मरे व बीमार बकरो को काटने से भी परहेज नहीं कर रहे है। जिससे लोगो में इसके प्रयोग से बीमारी को दावत देना ही है।
पर्दे के पीछे व मुख्य सड़क से अलग होना चाहिये मीट शाप
सबसे पहले तो मीट की दुकान मुख्य सड़क से अलग होना चाहियें जिससे आने जाने वालो को कोई परेशानी न उत्पन्न हो। वहीं दूसरी तरफ दुकान के सामने पर्दा लगा होना चाहिये जिससे काटते समय बच्चों आदि की नजर उस पर न पड़े । इसके अलावा जो कचरा व खून निकल रहा है। उसे दुकानदार द्वारा कस्बे से दूर मिट्टी खोद कर दफन कर देना चाहिये । जिससे गंदगी व बीमारी दो उत्पन्न होने के चांश न हो । लेकिन इटवा कस्बे में ऐशा नहीं हो रहा है। नतीजन लोगों को सड़न व दुर्गन्ध से काफी परेशानी हो रही है