सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट
यूपी की डुमरियागंज सीट महागठबंधन के बाद सपा और कांग्रेस के खाते में जाने के साथ ही शनिवार को एक बदला सा समीकरण सामने आ गया। जब पूर्व विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुलाकात लखनऊ में हो गई। मुलाकात के साथ ही चर्चा तेज हो गई कि माता प्रसाद को ही सपा इस सीट पर उम्मीदवार बनाने जा रही है। उम्मीदवारी को लेकर चर्चा ज्यादा गंभीर इसलिए भी हो रही है कि खुद अखिलेश यादव ने ही माता प्रसाद पांडेय को फोन करके लखनऊ बुलाया था। अब लखनऊ में पांडेय और अखिलेश की मुलाकात होते ही तेजी से खबर फैली की लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें हरी झंडी मिल गई है।
पूर्वांचल में सपा के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरा हैं माता प्रसाद
जहां तक माता प्रसाद पांडेय का सवाल है तो निश्चय ही वे पूर्वांचल की राजनीति में एक नामचीन चेहरा है। कह सकते हैं कि स्व वृजभूषण तिवारी, जनेश्वर मिश्र आदि के बाद पांडेय ही पूर्वांचल में सपा का ब्राम्हण चेहरा बचे हैं। ऐसे में सपा इन्हें इग्नोर करने की स्थित में नहीं है। वे इटवा विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक और मंत्री रहे हैं। दो बार की विधानसभा में वे स्पीकर भी रहे। लोकसभा का चुनाव दो बार लड़े जरूर लेकिन दोनों बार ही जगदंबिका पाल से हार गए। इस बार एकजुट विपक्ष स्वंय को भाजपा को शिकस्त देने का दावा कर रहा है लेकिन यदि ये ऐसे ही अलग अलग मैदान में उतरे तो इनका दावा फूस्स हो सकता है। चुनाव और गठबंधन को लेकर ऐसी खबरों के इतर अभी तक अधिकृत रूप से कुछ भी सामने नहीं आया है लेकिन वक्त वक्त पर जो तस्वीरें सामने आ रही है तो जाहिर है चर्चा का बाजार भी उसी अनुपात से गर्म होगा। तो गठबंधन और उम्मीदवारों को लेकर कह सकते हैं कि अभी बस चर्चाओं का बाजार ही गर्म है।
कुछ दिन पहले पीएम मोदी से मिले थे जगदंबिका पाल
इस सीट को लेकर किस तरह की सरगर्मी अभी से है इस बात को ऐसे भी समझा जा सकता है कि अभी दो दिन पहले की कांग्रेस के पूर्व सांसज मोहम्म मुकीन ने राहुल गांधी से मिलकर डुमरियागंज से उम्मीदवार बनाये जाने का भरोसा पाया थो तो उधर भाजपा के दिग्गज नेता और मौजूदा सासंद जगदंबिका पाल ने भी पीएम मोदी से मुलाकात कर भाजपा की प्रबल दावेदारी पर मुहर लगा दिया था। अब अखिलेश से मुलाकात के बाद जिस तेजी से माता प्रसाद के नाम की चर्चा उठी है उसी साफ है कि किसी दल को उम्मीदवार कोई भी हो लेकिन यहां का चुनाव दिग्गज नेताओं के लिए भी काफी अहम है।
यूपी की डुमरियागंज सीट महागठबंधन के बाद सपा और कांग्रेस के खाते में जाने के साथ ही शनिवार को एक बदला सा समीकरण सामने आ गया। जब पूर्व विधान सभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मुलाकात लखनऊ में हो गई। मुलाकात के साथ ही चर्चा तेज हो गई कि माता प्रसाद को ही सपा इस सीट पर उम्मीदवार बनाने जा रही है। उम्मीदवारी को लेकर चर्चा ज्यादा गंभीर इसलिए भी हो रही है कि खुद अखिलेश यादव ने ही माता प्रसाद पांडेय को फोन करके लखनऊ बुलाया था। अब लखनऊ में पांडेय और अखिलेश की मुलाकात होते ही तेजी से खबर फैली की लोकसभा चुनाव के लिए उन्हें हरी झंडी मिल गई है।
पूर्वांचल में सपा के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरा हैं माता प्रसाद
जहां तक माता प्रसाद पांडेय का सवाल है तो निश्चय ही वे पूर्वांचल की राजनीति में एक नामचीन चेहरा है। कह सकते हैं कि स्व वृजभूषण तिवारी, जनेश्वर मिश्र आदि के बाद पांडेय ही पूर्वांचल में सपा का ब्राम्हण चेहरा बचे हैं। ऐसे में सपा इन्हें इग्नोर करने की स्थित में नहीं है। वे इटवा विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक और मंत्री रहे हैं। दो बार की विधानसभा में वे स्पीकर भी रहे। लोकसभा का चुनाव दो बार लड़े जरूर लेकिन दोनों बार ही जगदंबिका पाल से हार गए। इस बार एकजुट विपक्ष स्वंय को भाजपा को शिकस्त देने का दावा कर रहा है लेकिन यदि ये ऐसे ही अलग अलग मैदान में उतरे तो इनका दावा फूस्स हो सकता है। चुनाव और गठबंधन को लेकर ऐसी खबरों के इतर अभी तक अधिकृत रूप से कुछ भी सामने नहीं आया है लेकिन वक्त वक्त पर जो तस्वीरें सामने आ रही है तो जाहिर है चर्चा का बाजार भी उसी अनुपात से गर्म होगा। तो गठबंधन और उम्मीदवारों को लेकर कह सकते हैं कि अभी बस चर्चाओं का बाजार ही गर्म है।
कुछ दिन पहले पीएम मोदी से मिले थे जगदंबिका पाल
इस सीट को लेकर किस तरह की सरगर्मी अभी से है इस बात को ऐसे भी समझा जा सकता है कि अभी दो दिन पहले की कांग्रेस के पूर्व सांसज मोहम्म मुकीन ने राहुल गांधी से मिलकर डुमरियागंज से उम्मीदवार बनाये जाने का भरोसा पाया थो तो उधर भाजपा के दिग्गज नेता और मौजूदा सासंद जगदंबिका पाल ने भी पीएम मोदी से मुलाकात कर भाजपा की प्रबल दावेदारी पर मुहर लगा दिया था। अब अखिलेश से मुलाकात के बाद जिस तेजी से माता प्रसाद के नाम की चर्चा उठी है उसी साफ है कि किसी दल को उम्मीदवार कोई भी हो लेकिन यहां का चुनाव दिग्गज नेताओं के लिए भी काफी अहम है।


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