नशे में दुबे बेरोजगार युवा
सिद्धार्थनगर। सीमा से सटे उपनगर बढनी के मोहल्ले गलियो में बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवको के सुनहरे सपने गाजा स्मैक हेरोइन की धुंए में उडता हुआ दिखायी पड़ रह है। स्मैक चरस की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। जिससे ये लोग नशे के आदी होते जा रहे है। लेकिन पुलिस इन पर अंकुश नही लगा पा रही है। जिससे अवैध कारोबार करने वलो के हौसले बुलंद है। युवाओ के कदम शाम होते ही पूरी तरह से डगमगाने लगते है। देर रात जब घर भी पहुं्रचते है तो नशे के काल के गाल में समाये रहते है।
पाने के लिए युवाओ द्वारा कुछ भी किया जा सकता है। चन्द रूपये की लालच में युवा वर्ग स्वयं को बेचने के लिए तैयार रहते है। जिस दिन इन युवाओ को ये नशीली पदार्थ नही मिलता है वो बेकाबू हो जाते है। इन युवाओ को ये नशीली पदार्थ कहां से मिलती है। इनकी तस्करी कहां से हो रही है इन नशीली पदार्थो के सौदागर को रोक नही लग पा रही है। इन युवाओ को नशे के मकड़जाल में फसाने से नही चूक रहे है।
सिद्धार्थनगर। सीमा से सटे उपनगर बढनी के मोहल्ले गलियो में बेरोजगारी का दंश झेल रहे युवको के सुनहरे सपने गाजा स्मैक हेरोइन की धुंए में उडता हुआ दिखायी पड़ रह है। स्मैक चरस की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। जिससे ये लोग नशे के आदी होते जा रहे है। लेकिन पुलिस इन पर अंकुश नही लगा पा रही है। जिससे अवैध कारोबार करने वलो के हौसले बुलंद है। युवाओ के कदम शाम होते ही पूरी तरह से डगमगाने लगते है। देर रात जब घर भी पहुं्रचते है तो नशे के काल के गाल में समाये रहते है।
पाने के लिए युवाओ द्वारा कुछ भी किया जा सकता है। चन्द रूपये की लालच में युवा वर्ग स्वयं को बेचने के लिए तैयार रहते है। जिस दिन इन युवाओ को ये नशीली पदार्थ नही मिलता है वो बेकाबू हो जाते है। इन युवाओ को ये नशीली पदार्थ कहां से मिलती है। इनकी तस्करी कहां से हो रही है इन नशीली पदार्थो के सौदागर को रोक नही लग पा रही है। इन युवाओ को नशे के मकड़जाल में फसाने से नही चूक रहे है।


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