अमेरिका ने पूर्व PM डॉ मनमोहन सिंह को दिया बड़ा सम्मान, PM मोदी को दिखाया बाहर का रास्ता
सत्येन्द्र उपाध्याय
बुधवार 2मई को अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल करीब एक साल पहले खत्म हो चुका है। लेकिन वहाँ से एक चौंकाने वाली खबर आई है। जो देश के सवा सौ करोड़ लोगों को गर्व और सम्मान की बात है। इस खबर को भारतीय मिडिया ने देश को दिखाया नही है। आपको बता दें बराक ओबामा ने जाते जाते अपने कार्यकाल की यादगार और मजबूत रिश्तों की खूबसुरत तस्वीरें जारी किया है। जिसमे बराक ओबामा की आख़िरी ‘फॉर्मल स्टेट अराइवल सेरेमनी’ के दौरान उन्होंने इसे जारी किया गया था।
वाइट हाउस के द्वारा ये एल्बम जारी किया गया है जिसमें 50 बड़े हस्तियाँ और सबसे ईमानदार नेताओं के फ़ोटो शामिल हैं. इस एल्बम में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी की तस्वीर सबसे पहले स्थान पर है वहीं दूसरी और भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें इस 50 नेताओं के लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, कहीं भी शामिल नहीं किया गया है जो भारत के वर्तमान सरकार के लिऐ बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस एल्बम में राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल की फ़ोटो हैं. उनके विदेशी दौरों को ध्यान में रखकर इस एल्बम को तैयार किया गया है। जाहिर सी बात है अगर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की तस्वीरें ओबामा जैसे लीडर और अमेरिका जैसे देश में सबसे पहले स्थान पर दिया गया है तो उसकी मुख्य वजह होगी और डॉ मनमोहन सिंह के प्रति सम्मान, ईमानदारी, प्रेम भाव और उनके शानदार कार्यकाल, दोनों देश के मजबूत रिश्ते है।
नीचें पढे डॉ मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी में बड़ा अन्तर |
महज 15 साल की उम्र में बंटवारे का दंश झेलकर अपने जन्मभूमि पाकिस्तान के गांव से अपने पराये सब छोड़ कर अमृतसर में बसने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का बचपन बेहद तंगहाली एवं गरीबी में गुजरा ।
बचपन में हीं मां का साया सिर से उठ गया।
हिंदू यूनिवर्सिटी अमृतसर से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एवं कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड तक का सफर स्कॉलरशीप के दम पर तय किऐ।
डॉ मनमोहन सिंह ऐसे पहले भारतीय छात्र थें जिन्हें वेरनबेरी स्कॉलरशीप मिला। यह स्कॉलरशीप दुनिया के गिने चुने छात्रों को मिलती है इन सब के बावजूद डॉ मनमोहन सिंह जी ने कभी मोदी जी के तरह अपनी गरीबी का रोना नहीं रोया।
मां के मरने की स्टोरी नहीं सुनाई।
बार बार अपने मां बाप की जाति नहीं बदली।
अपने मां बाप की मनगढंत स्टोरी नहीं सुनाई।
अति अल्पसंख्यक सिक्ख धर्म के होने की दुहाई नहीं दी कभी अपने पढ़े लिखे होने का घमंड नही होंगे।
कभी खुद की जाति, धर्म की बात नहीं किऐ ना किसी के डीएनए तो किसी की पैदाईश पर सवाल नहीं उठाया।
हर प्रकार के राजनीतिक हमले सहने के बावजूद कभी पीएम की गरिमा नहीं गिरने दिया।
कभी मर्यादाविहीन भाषण नहीं दिया ना पार्टी के लिऐ कभी प्रधानमंत्री का काम छोड़कर प्रचार किऐ।
कभी किसी बाबा के साथ स्टेज पर खड़े होकर समर्थन नही किया ना वोट माँगे।
कभी किसी पर तंज जुमले नही कसे कभी किसी को ओछी वाणी नही बोली.।
जब पूरी दुनिया आर्थिकमंदी पर चरमराई हुई थी तब दस साल लगातार देश को आर्थिक मोर्चो पर संभाले रखा और भारत को विश्व में तीसरी सबसे बड़ी महाशक्ति बनाऐ।
मनरेगा और आधारकार्ड, RTI जैसी जनहित और जनकल्याणकारी योजनाओं का सफल किर्यान्वन किऐ।
द ग्रेट इकनॉमिस्ट फॉर इंडिया, ऐसे हीं नही लगता है किसी के नाम के आगे डॉक्टर ओर किसी नाम के आगे चायवाला।
गरीब और पेपर बेचने वाले तो डाँ ऐपीजे अब्दुल कलाम जीं भी थे क्या कभी उन्होनें बोला कि मैं गरीब था पेपर बेचता था मेरी माँ झाडू पोछा लगाती थी?
प्रधानमंत्री पद की गारिमा होती है। देश की गारिमा होती है ना कि हर जगह पीएम मोदी के तरह पब्लिसिटी लो चाहे देश बदनाम हो जाऐ या बर्बाद हो जाऐ। आज इसी का उदाहरण है व्हाईट हाउस में प्रथम स्थान पर डॉ मनमोहन सिंह का फोटो लगना और पीएम मोदी को बाहर का रास्ता दिखाना.!
सत्येन्द्र उपाध्याय
बुधवार 2मई को अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल करीब एक साल पहले खत्म हो चुका है। लेकिन वहाँ से एक चौंकाने वाली खबर आई है। जो देश के सवा सौ करोड़ लोगों को गर्व और सम्मान की बात है। इस खबर को भारतीय मिडिया ने देश को दिखाया नही है। आपको बता दें बराक ओबामा ने जाते जाते अपने कार्यकाल की यादगार और मजबूत रिश्तों की खूबसुरत तस्वीरें जारी किया है। जिसमे बराक ओबामा की आख़िरी ‘फॉर्मल स्टेट अराइवल सेरेमनी’ के दौरान उन्होंने इसे जारी किया गया था।
वाइट हाउस के द्वारा ये एल्बम जारी किया गया है जिसमें 50 बड़े हस्तियाँ और सबसे ईमानदार नेताओं के फ़ोटो शामिल हैं. इस एल्बम में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और उनकी पत्नी की तस्वीर सबसे पहले स्थान पर है वहीं दूसरी और भारत के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीरें इस 50 नेताओं के लिस्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, कहीं भी शामिल नहीं किया गया है जो भारत के वर्तमान सरकार के लिऐ बड़ा झटका माना जा रहा है।
इस एल्बम में राष्ट्रपति ओबामा के कार्यकाल की फ़ोटो हैं. उनके विदेशी दौरों को ध्यान में रखकर इस एल्बम को तैयार किया गया है। जाहिर सी बात है अगर पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह की तस्वीरें ओबामा जैसे लीडर और अमेरिका जैसे देश में सबसे पहले स्थान पर दिया गया है तो उसकी मुख्य वजह होगी और डॉ मनमोहन सिंह के प्रति सम्मान, ईमानदारी, प्रेम भाव और उनके शानदार कार्यकाल, दोनों देश के मजबूत रिश्ते है।
नीचें पढे डॉ मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी में बड़ा अन्तर |
महज 15 साल की उम्र में बंटवारे का दंश झेलकर अपने जन्मभूमि पाकिस्तान के गांव से अपने पराये सब छोड़ कर अमृतसर में बसने वाले भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह जी का बचपन बेहद तंगहाली एवं गरीबी में गुजरा ।
बचपन में हीं मां का साया सिर से उठ गया।
हिंदू यूनिवर्सिटी अमृतसर से चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी एवं कैंब्रिज, ऑक्सफोर्ड तक का सफर स्कॉलरशीप के दम पर तय किऐ।
डॉ मनमोहन सिंह ऐसे पहले भारतीय छात्र थें जिन्हें वेरनबेरी स्कॉलरशीप मिला। यह स्कॉलरशीप दुनिया के गिने चुने छात्रों को मिलती है इन सब के बावजूद डॉ मनमोहन सिंह जी ने कभी मोदी जी के तरह अपनी गरीबी का रोना नहीं रोया।
मां के मरने की स्टोरी नहीं सुनाई।
बार बार अपने मां बाप की जाति नहीं बदली।
अपने मां बाप की मनगढंत स्टोरी नहीं सुनाई।
अति अल्पसंख्यक सिक्ख धर्म के होने की दुहाई नहीं दी कभी अपने पढ़े लिखे होने का घमंड नही होंगे।
कभी खुद की जाति, धर्म की बात नहीं किऐ ना किसी के डीएनए तो किसी की पैदाईश पर सवाल नहीं उठाया।
हर प्रकार के राजनीतिक हमले सहने के बावजूद कभी पीएम की गरिमा नहीं गिरने दिया।
कभी मर्यादाविहीन भाषण नहीं दिया ना पार्टी के लिऐ कभी प्रधानमंत्री का काम छोड़कर प्रचार किऐ।
कभी किसी बाबा के साथ स्टेज पर खड़े होकर समर्थन नही किया ना वोट माँगे।
कभी किसी पर तंज जुमले नही कसे कभी किसी को ओछी वाणी नही बोली.।
जब पूरी दुनिया आर्थिकमंदी पर चरमराई हुई थी तब दस साल लगातार देश को आर्थिक मोर्चो पर संभाले रखा और भारत को विश्व में तीसरी सबसे बड़ी महाशक्ति बनाऐ।
मनरेगा और आधारकार्ड, RTI जैसी जनहित और जनकल्याणकारी योजनाओं का सफल किर्यान्वन किऐ।
द ग्रेट इकनॉमिस्ट फॉर इंडिया, ऐसे हीं नही लगता है किसी के नाम के आगे डॉक्टर ओर किसी नाम के आगे चायवाला।
गरीब और पेपर बेचने वाले तो डाँ ऐपीजे अब्दुल कलाम जीं भी थे क्या कभी उन्होनें बोला कि मैं गरीब था पेपर बेचता था मेरी माँ झाडू पोछा लगाती थी?
प्रधानमंत्री पद की गारिमा होती है। देश की गारिमा होती है ना कि हर जगह पीएम मोदी के तरह पब्लिसिटी लो चाहे देश बदनाम हो जाऐ या बर्बाद हो जाऐ। आज इसी का उदाहरण है व्हाईट हाउस में प्रथम स्थान पर डॉ मनमोहन सिंह का फोटो लगना और पीएम मोदी को बाहर का रास्ता दिखाना.!

No comments:
Post a Comment