दुर्गन्ध से यात्री हो रहे परेशान , परिवहन विभाग नही दे रहा है इस पर ध्यान
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 13 मई, नगर स्थित परिवहन निगम का बस स्टेशन मौजूदा समय में उपेक्षा और दुर्दशा का शिकार हो गया है।
एक तरफ जहां स्टेशन में सुविधाओं आभाव है तो वहीं दूसरी तरफ स्टेशन परिसर में फैली गन्दगी व कूड़ा करकट के ढेर से उठने वाली दुर्गंध से बस के इंतजार में बैठे मुसाफिरों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं अपनी मंजिल तय करने के लिए यहां आने वाले लोगों को बसों के आने जाने के बारे में जानकारियां भी नहीं मिल पा रही है।
डुमरियागंज मुख्यालय स्थित रोडवेज बस स्टेशन दिन प्रतिदिन दुर्दशा और घोर अपेक्षा के चलते मुसाफिरों के लिए दिक्कतों का ससब बन गया है। बस स्टेशन परिसर व अलग-अलग कूड़ा करकट का ढेर व बजबजाती नालियांें से उठने वाली दुर्गंध बस के इंतजार में आने वाले यात्रियों को दिक्कतें पैदा कर रही है। बस स्टेशन पर तैनात बड़े बाबू व चैकीदार दोनों को एक साथ नदारद हो जाने के बाद पूछ ताछ कार्यालय बंद हो जाता है। जिससे बसों के आने और जाने के बारे में लोगों को कोई जानकारी नहीं मिल पाती। लोग बसों का घंटों इंतजार करते रहते हैं दूसरी तरफ बस स्टेशन के निकट स्थित सरकारी शराब की दुकानों पर शराबियों का उत्पाद शाम होते ही बढ़ जाता है। जिससे महिला मुसाफिरों को और भी दिक्कते होती है।
डुमरियागंज (सिद्धार्थनगर) 13 मई, नगर स्थित परिवहन निगम का बस स्टेशन मौजूदा समय में उपेक्षा और दुर्दशा का शिकार हो गया है।
एक तरफ जहां स्टेशन में सुविधाओं आभाव है तो वहीं दूसरी तरफ स्टेशन परिसर में फैली गन्दगी व कूड़ा करकट के ढेर से उठने वाली दुर्गंध से बस के इंतजार में बैठे मुसाफिरों को काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। इतना ही नहीं अपनी मंजिल तय करने के लिए यहां आने वाले लोगों को बसों के आने जाने के बारे में जानकारियां भी नहीं मिल पा रही है।
डुमरियागंज मुख्यालय स्थित रोडवेज बस स्टेशन दिन प्रतिदिन दुर्दशा और घोर अपेक्षा के चलते मुसाफिरों के लिए दिक्कतों का ससब बन गया है। बस स्टेशन परिसर व अलग-अलग कूड़ा करकट का ढेर व बजबजाती नालियांें से उठने वाली दुर्गंध बस के इंतजार में आने वाले यात्रियों को दिक्कतें पैदा कर रही है। बस स्टेशन पर तैनात बड़े बाबू व चैकीदार दोनों को एक साथ नदारद हो जाने के बाद पूछ ताछ कार्यालय बंद हो जाता है। जिससे बसों के आने और जाने के बारे में लोगों को कोई जानकारी नहीं मिल पाती। लोग बसों का घंटों इंतजार करते रहते हैं दूसरी तरफ बस स्टेशन के निकट स्थित सरकारी शराब की दुकानों पर शराबियों का उत्पाद शाम होते ही बढ़ जाता है। जिससे महिला मुसाफिरों को और भी दिक्कते होती है।

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