शैलेष सोनकर की रिपोर्ट
कैश की किल्लत से जूझ रही कांग्रेस ने आम जनता से सहयोग की अपील की है।
कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से लोगों से देश की सबसे पुरानी पार्टी को पैसा देने की गुजारिश की है। बता दें कि 2014 में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस की माली हालत लगतार खराब हो रही है। कांग्रेस को न सिर्फ कम चंदा मिल रहा है बल्कि पार्टी का रोज़मर्रा का खर्च चलाने में भी परेशानी पेश आ रही है। आलम यह है कि पार्टी को 2019 का चुनाव लडऩे में फंड की कमी का डर अभी से ही सता रहा है। पार्टी ने 250 रुपये से लेकर 10 हजार तक का चंदे वाला विकल्प आम लोगों को दिया है। पार्टी चेक से भी चंदा लेने को तैयार है। पार्टी की कई राज्य इकाइयां जहां सरकार नहीं है, को रोजमर्रा के लिए खर्च कुछ महीनों से नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा पहले ही पार्टी के सांसदों और विधायकों से पार्टी फंड में 1 महीने की तनख्वाह देने की अपील कर चुके हैं। पार्टी ने सांसदों और विधायकों के साथ ही पूर्व मंत्रियों से पार्टी के नए कार्यालय के निर्माण के लिए सहयोग की मांग कर चुकी है। बाकी कार्यकर्ताओं से फंड तो लिया ही जा रहा है, साथ ही सदस्यता शुल्क से फंड आना आम बात ही है। पार्टी नेताओं से आधिकारिक यात्रा के दौरान कम खर्च करने की अपील की गई है।
कैश की किल्लत से जूझ रही कांग्रेस ने आम जनता से सहयोग की अपील की है।
कांग्रेस ने अपने ट्विटर हैंडल से लोगों से देश की सबसे पुरानी पार्टी को पैसा देने की गुजारिश की है। बता दें कि 2014 में सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस की माली हालत लगतार खराब हो रही है। कांग्रेस को न सिर्फ कम चंदा मिल रहा है बल्कि पार्टी का रोज़मर्रा का खर्च चलाने में भी परेशानी पेश आ रही है। आलम यह है कि पार्टी को 2019 का चुनाव लडऩे में फंड की कमी का डर अभी से ही सता रहा है। पार्टी ने 250 रुपये से लेकर 10 हजार तक का चंदे वाला विकल्प आम लोगों को दिया है। पार्टी चेक से भी चंदा लेने को तैयार है। पार्टी की कई राज्य इकाइयां जहां सरकार नहीं है, को रोजमर्रा के लिए खर्च कुछ महीनों से नहीं मिल रहा है। कांग्रेस के कोषाध्यक्ष मोतीलाल वोरा पहले ही पार्टी के सांसदों और विधायकों से पार्टी फंड में 1 महीने की तनख्वाह देने की अपील कर चुके हैं। पार्टी ने सांसदों और विधायकों के साथ ही पूर्व मंत्रियों से पार्टी के नए कार्यालय के निर्माण के लिए सहयोग की मांग कर चुकी है। बाकी कार्यकर्ताओं से फंड तो लिया ही जा रहा है, साथ ही सदस्यता शुल्क से फंड आना आम बात ही है। पार्टी नेताओं से आधिकारिक यात्रा के दौरान कम खर्च करने की अपील की गई है।


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