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Saturday, May 26, 2018

समीक्षा क्राइम इण्डिया 24न्यूज़

सत्येन्द्र उपाध्याय की रिपोर्ट 
इटवा(सिद्धार्थनगर)। विधायक से लेकर मुख्यमंत्री तक का आदेश मिश्रौलिया पुलिस के लिए सब बेमाने है। वह तो सिर्फ अपने मर्जी का ही करती है। 

जब मुख्यमंत्री जी निलम्बन की कार्यवाही करते हैं तो रोष प्रकट किया जाता है कि योगी सरकार कर्मचारियों का उत्पीडन करती है। जैसा कि गत मार्च माह में मुख्यमंत्री जी एक महिला के शिकायत के समाधान में लापरवाही करने पर एक थाना अध्यक्ष व एक एसआई को निलम्बित करने का आदेश दिया था।

इसी प्रकार मिश्रौलिया थाना क्षेत्र के ग्राम खैराखास का मामला है। पीडित राम अधीन ने गत 14 मई 2018 को मुख्यमंत्री को सम्बोधित प्रार्थना पत्र श्री गोरखनाथ मन्दिर पर दिया। जिसमें कहा गया कि गाटा संख्या 622 मेरा जमीन है। जिस पर पुराना छप्पर रखा था। सड़ चुके छप्पर को बदल कर दूसरा छप्पर पुलिस रखने से मना कर रही है। निस्तारण के लिए इस प्रार्थना पत्र को पृष्ठांकित कर उपजिला अधिकारी को स्थानान्तरित किया गया। परन्तु अब तक को कार्यवाही नहीं हुई।

 शनिवार को इटवा विधायक डा. सतीश चन्द्र द्विवेदी ने आवेदक को बुला कर उसके पक्ष को जानने के बाद थाना अध्यक्ष मिश्रौलिया को फोन कर मामले को गुणदोष के आधार पर निपटाने का निर्देश दिया। थाना अध्यक्ष ने पीडित पक्ष को थाने पर बुलाने के बाद कहा कि लेखपाल को बुलाओ मैं अपने सामने पैमाइश कराऊंगा। गांव में लेखपाल के आने के बाद मौके पर न तो थाना अध्यक्ष आये न उनका कोई प्रतिनिधि ही आया।

राजस्व विभाग के सूत्रों का कहना है कि गाटा संख्या 622 में राम अधीन का छप्पर है तथा इस जमीन पर इनका कब्जा भी है। रही बात धारा 24 की पैमाइश की तो इसकी प्रक्रिया चल रही है। पुलिस को छप्पर रखने से नहीं रोकना चाहिए। पैमाइश के बाद जमीन जिसको मिलेगी। वह अपना कब्जा लेगा।

इस सम्बंध में जब थाना अध्यक्ष मिश्रौलिया से उनका पक्ष जानना चाहा तो वह प्रकरण पर बात करने के बजाय उसे टालते हुए कहा कि मैं इस समय थाने पर नहीं हूँ। निस्तारण होने लायक रहेगा तो किया जायेगा। जमीनी विवाद तो आता रहता है।

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